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क्या चांद पर बन सकती है ऑक्सीजन, यहां से मंगल क्यों जाना चाह रहा है इंसान?

वैज्ञानिक चांद पर ऑक्सीजन बनाने की कोशिश में जुटे हुए हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि चांद पर ऑक्सीजन कैसे बन सकता है और यहां वैज्ञानिक मंगल ग्रह क्यों जाना चाहते हैं. जानिए इसके पीछे का कारण.

अंतरिक्ष की दुनिया रहस्यों से भरी हुई दुनिया है. इन रहस्यों को सुलझाने के लिए अधिकांश देशो के स्पेस वैज्ञानिक काम कर रहे हैं. इसी क्रम में अमेरिका के निजी कंपनी सिएरा स्पेस के वैज्ञानिक चांद जैसे माहौल में ऑक्सीजन बनाने के प्रयोग में लगे हैं. अब सवाल ये है कि क्या चांद पर ऑक्सीजन बन सकती है. आज हम आपको इसका जवाब देंगे.

चांद पर ऑक्सीजन की तलाश

इंसान और जानवर हर किसी को जिंदा रहने के लिए ऑक्सीजन की जरूरत होती है. बिना ऑक्सीजन गैस के इंसान जिंदा नहीं रह सकता है. अगर वायुमंडल में ऑक्सीजन गैस नहीं होगा, तो सजीव जीवों का जीवन संभव नहीं है. 

चांद पर बन सकता है ऑक्सीजन

अब सवाल ये है कि क्या चांद पर ऑक्सीजन बन सकता है? इसको लेकर सिएरा स्पेस के प्रोगाम मैनेजर ने बताया है. उनके मुताबिक चांद पर पाई जाने वाली धातुओं की पपड़ी (रिगलिथ) मेटल ऑक्साइड से भरी हुई है. धरती पर तो मेटल ऑक्साइड से ऑक्सीजन निकालने का विज्ञान आसान है. लेकिन चांद पर ये काम ज्यादा कठिन होगा, क्योंकि पृथ्वी और चांद का माहौल अलग है. उन्होंने यह भी कहा कि एक ऐसी अहम चीज है, जिसकी आप पृथ्वी या अपने ग्रह की कक्षा के चारों ओर जांच नहीं कर सकते वो है चांद का गुरुत्वाकर्षण. उन्होंने कहा कि चांद पर पाए जाने वाला गुरुत्वाकर्षण पृथ्वी पर पाए जाने वाले गुरुत्वाकर्षण का छठा हिस्सा ही होता है. उन्होंने कहा कि ऑक्सीजन हासिल करने वाली कुछ तकनीकों की राह में चांद का गुरुत्वाकर्षण एक अड़चन पैदा कर सकता है.

चांद से मंगल का सफर

वैज्ञानिक इसलिए भी चांद पर ऑक्सीजन बनाना चाहते हैं, जिससे वो वहां से मंगल ग्रह तक जा सके. अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर वैज्ञानिक पृथ्वी से सीधे मंगल ग्रह पर क्यों नहीं जा सकते हैं. दरअसल पृथ्वी से सबसे नजदीक चांद है. बता दें कि चंद्रमा पृथ्वी से 384 400 किलोमीटर की दूरी पर है और यह पृथ्वी के सबसे पास का खगोलीय पिंड है. वहीं मंगल की पृथ्वी से औसत दूरी 990.8 लाख किलोमीटर है.

मंगल पर जीवन की संभावना?

वैज्ञानिक मंगल ग्रह पर भी जीवन की तलाश कर रहे हैं. लेकिन अब तक मंगल ग्रह पर जीवन मिल नहीं पाया है. इसकी सबकी बड़ी वजह ये है कि मंगल ग्रह पर पानी नहीं है. दूसरा सबसे बड़ा कारण ये है कि मंगल ग्रह का वायुमंडल पृथ्वी के वायुमंडल की तुलना में बहुत पतला है. यह वायुमंडल सूर्य की हानिकारक किरणों से पर्याप्त सुरक्षा प्रदान नहीं कर सकता है, जिससे जीवन के लिए आवश्यक जैविक अणु नष्ट हो जाते हैं. मंगल ग्रह पर जीवन की संभावना खत्म नहीं है. लेकिन वैज्ञानिक अभी भी इस ग्रह पर जीवन की खोज जारी रखे हुए हैं. वैज्ञानिक ये भी तलाश रहे हैं कि क्या मंगल ग्रह पर भविष्य में जीवन संभव हो सकता है.

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