Countries Ruled By Persia: दुनिया के किन देशों पर था फारस का राज, ईरान बनने तक कैसे सिमट गईं इसकी सीमाएं?
Countries Ruled By Persia: मिडिल ईस्ट में इस वक्त इजरायल, यूनाइटेड स्टेट्स और ईरान के बीच तनाव चल रहा है. इसी बीच आइए जानते हैं कि कितने देशों पर था फारस का राज.

Countries Ruled By Persia: मिडिल ईस्ट में इजरायल, यूनाइटेड स्टेट्स और ईरान के बीच बढ़ते झगड़े ने ईरान को दुनिया भर की नजरों में ला दिया है. मॉडर्न ईरान के एक नेशन स्टेट के तौर पर बनने से काफी पहले यह इलाका दुनिया के सबसे ताकतवर साम्राज्य में से एक पर्शियन साम्राज्य का केंद्र था. अपने पीक पर पर्शियन साम्राज्य तीन कॉन्टिनेंट में फैला हुआ था. आइए जानते हैं कि दुनिया के किन देशों पर फारस का राज था और ईरान बनने तक इसकी सीमाएं कैसे सिमटीं.
पर्शियन साम्राज्य की ताकत
पर्शियन साम्राज्य अकेमेनिड राजवंश के दौरान अपनी सबसे बड़ी ताकत तक पहुंचा. साइरस द ग्रेट और डेरियस I जैसे शासकों के अंडर पर्शिया पुरानी दुनिया का सबसे बड़ा साम्राज्य बन गया था. ऐसा कहा जाता है कि अपने पीक पर इस साम्राज्य ने दुनिया के लगभग 44% आबादी पर राज किया था. यह पुराने समय के लिए एक काफी बड़ी बात है. इसका इलाका एशिया, यूरोप और अफ्रीका के बड़े हिस्सों में फैला हुआ था.
वे देश, जो कभी फारसी शासन के अधीन थे
मिडिल ईस्ट और वेस्ट एशिया में फारस का कंट्रोल उन इलाकों पर था जिन में अब इराक, ईरान, सीरिया, जॉर्डन, लेबनान, इजरायल, फिलिस्तीन और तुर्की के बड़े हिस्से शामिल हैं. सेंट्रल एशिया में फारसी असर अफगानिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, उज्बेकिस्तान, तजिकिस्तान और अजरबैजान तक फैला हुआ था. साम्राज्य साउथ एशिया तक भी पहुंच गया था. यह अब पाकिस्तान के कुछ हिस्सों खासकर बलूचिस्तान और सिंधु घाटी के इलाके और साथ ही भारत के कुछ उत्तर पश्चिमी हिस्सों को कंट्रोल करता था.
फारसी ताकत अफ्रीका खासकर मिस्त्र और लीबिया के कुछ हिस्सों तक भी फैली हुई थी. यूरोप में फारसी राज उत्तरी ग्रीस, बुल्गारिया, रोमानिया, यूक्रेन के कुछ हिस्सों और आर्मेनिया और जॉर्जिया समेत कॉकेशस इलाके तक फैला हुआ था.
फारसी एम्पायर का पतन
फारसी एम्पायर का पतन 330 BC में शुरू हुआ. उस समय अलेक्जेंडर द ग्रेट ने आखिरी अकेमेनिड राजा डेरियस III को हराया. अलेक्जेंडर की जीत ने पहले फारसी एम्पायर को खत्म कर दिया और इस इलाके को ग्रीक असर में ला दिया. हालांकि फारसी पॉलीटिकल पावर पूरी तरह से खत्म नहीं हुई थी. भारत के राजवंशों जैसे पार्थियन और ससैनियन एम्पायर ने फारसी राज को फिर से जिंदा किया और ताकत के कुछ हिस्सों को फिर से ठीक किया. लेकिन बाद के एम्पायर ने रोमन एम्पायर और बाद के बाइजेंटाइन एम्पायर जैसे ताकतवर दुश्मनों के खिलाफ लगातार लड़ाइयां लड़ीं. इस वजह से कई इलाकों पर फारस का कंट्रोल कमजोर हो गया.
अरब जीत और इस्लाम का फैलाव
एक बड़ा टर्निंग पॉइंट 7वीं सदी में आया. उस वक्त अरब मुस्लिम सेनाओं ने ससैनियन एम्पायर को हरा दिया. इस जीत ने पुराने फारसी शाही सिस्टम को खत्म कर दिया और इस इलाके को इस्लामी शासन के तहत ला दिया. इस्लाम धीरे-धीरे फारसी जमीनों में फैल गया. इससे वहां का धार्मिक और राजनीतिक माहौल बदल गया.
मंगोल और तुर्की हमले
आने वाली सदियों में फारस को ताकतवर खानाबदोश साम्राज्यों से बार-बार हमले का सामना करना पड़ा. 13वीं सदी में चंगेज खान के नेतृत्व में मंगोल हमलों ने फारसी शहरों में भारी तबाही मचाई. इसके बाद तुर्की राजवंशों और शासकों ने भी फारसी इलाके के बड़े हिस्सों पर कब्जा कर लिया. 18वीं और 19वीं सदी के दौरान यूरोपीय कॉलोनियल ताकतों के असर की वजह से फारस का सिकुड़ना तेज हो गया. रूस ने दक्षिण की ओर कॉकेशस और सेंट्रल एशिया में अपना विस्तार किया. उसने उन इलाकों पर कब्जा कर लिया जो पहले फारसी असर का हिस्सा थे. उसी समय भारत की खाड़ी के इलाके में ब्रिटिश असर बढ़ा. इससे आसपास के इलाकों पर फारस का कंट्रोल कम हो गया.
फारस से ईरान में नाम बदलना
1935 में देश ने ऑफिशियली अपना इंटरनेशनल नाम बदल दिया. राजा रेजा शाह पहलवी ने विदेशी सरकारों से फारस के बजाय ईरान नाम इस्तेमाल करने की रिक्वेस्ट की. ईरान शब्द पुराने शब्द आर्यों की जमीन से आया है. यह इस इलाके की गहरी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को दिखाता है.
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Source: IOCL

























