क्या हाफिज सईद और मसूद अजहर के लिए पाकिस्तान को मजबूर कर सकता है भारत, क्या दोनों देशों के बीच है प्रत्यर्पण संधि?
सवाल उठता है क्या भारत हाफिज सईद और मसूद अजहर को सौंपने के लिए पाकिस्तान को मजबूर नहीं कर सकता है? क्या दोनों देशों के बीच इसको लेकर कोई प्रत्यर्पण संधि नहीं है?

पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री बिलावल अली भुट्टो जरदारी ने भारत को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने संकेत दिया है कि पाकिस्तान लश्कर-ए-तैयबा प्रमुख हाफिज सईद और जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख मसूद अजहर को भारत को सौंप सकता है. बशर्ते नई दिल्ली इस प्रक्रिया में सहयोग करने की इच्छा दिखाए. बिलावल भुट्टो ने ये बातें अल जजीरा के साथ एक साक्षात्कार के दौरान कही हैं.
उनकी इस टिप्पणी के बाद सवाल उठता है क्या भारत हाफिज सईद और मसूद अजहर को सौंपने के लिए पाकिस्तान को मजबूर नहीं कर सकता है? क्या दोनों देशों के बीच इसको लेकर कोई प्रत्यर्पण संधि नहीं है? चलिए जानते हैं इन सवालों का जवाब?
क्या होती है प्रत्यर्पण संधि?
सबसे पहले तो यह जान लीजिए कि प्रत्यर्पण संधि क्या होती है? दरअसल, जब दो देशों के बीच प्रत्यर्पण संधि होती है तो दोनों ही देश एक-दूसरे देश के आरोपी व वांधित व्यक्तियों को सौंपने के लिए बाध्य होते हैं. आसान भाषा में समझें तो जिन दो देशों के बीच प्रत्यर्पण संधि है तो अगर किसी देश का कोई नागरिक, जो किसी मामले में वांधित है और भागकर ऐसे देश में शरण लेता है, जिससे उसके साथ संधि है तो ऐसी स्थिति में उस देश को वांधित व्यक्ति को सौंपना पड़ता है. हालांकि, दो देशों के बीच प्रत्यर्पण संधि में बहुत सी शर्तें भी तय की जाती हैं, जिसमें कई व्यक्तियों को प्रत्यर्पण से छूट भी मिल जाती है.
क्या पाकिस्तान के साथ है प्रत्यर्पण संधि?
अब सवाल है कि क्या भारत और पाकिस्तान के बीच भी प्रत्यर्पण संधि है और क्या भारत हाफिज सईद और मसूद अजहर को सौंपने के लिए पाकिस्तान को मजबूर कर सकता है? तो ऐसा नहीं है, क्योंकि भारत और पाकिस्तान के बीच किसी तरह की प्रत्यर्पण संधि नहीं है. पहले भी जब भारत ने हाफिज सईद को सौंपने की मांग की थी तो पाकिस्तान ने यह कहकर भारत की मांग ठुकरा दी थी कि दोनों देशों के बीच कोई द्विपक्षीय प्रत्यर्पण संधि नहीं है.
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