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Cow Dung Electricity: क्या घर पर गोबर से बिजली बना सकते हैं, क्या इससे AC भी चल सकता है?

Cow Dung Electricity: काफी कम लोग यह जानते हैं कि गाय के गोबर से बिजली भी बन सकती है. आइए जानते हैं कि क्या इससे एयर कंडीशनर भी चल सकता है.

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  • गाय के गोबर से बायोगैस डाइजेस्टर में बनती है बिजली।
  • आम घरेलू बायोगैस प्लांट खाना पकाने, रोशनी के लिए पर्याप्त।
  • एयर कंडीशनर चलाने हेतु बड़े प्लांट, अधिक गोबर की आवश्यकता।
  • कमर्शियल प्लांट घर के कई उपकरण, पंप, मोटर चला सकते हैं।

Cow Dung Electricity: घर पर बायोगैस सिस्टम के जरिए गाय के गोबर से बिजली बनाई जा सकती है. साथ ही सही हालात में यह बिजली एयर कंडीशनर जैसे उपकरणों को भी चला सकती है. हालांकि एयर कंडीशनर चलाने के लिए गांव में खाना पकाने वाली गैस के लिए इस्तेमाल होने वाले छोटे बायोगैस प्लांट से कहीं ज्यादा बड़े सेटअप की जरूरत होती है. एक आम घरेलू बायोगैस प्लांट आमतौर पर किचन स्टोव और रोशनी की छोटी-मोटी जरूरत के लिए काफी होता है. लेकिन एयर कंडीशनर जैसे भारी उपकरण चलाने के लिए कमर्शियल लेवल या फिर ज्यादा क्षमता वाले घरेलू सेटअप की जरूरत होती है. 

बायोगैस से बनेगी बिजली 

गाय का गोबर खुद सीधे बिजली नहीं बनाता. यह प्रक्रिया बायोगैस डाइजेस्टर के अंदर शुरू होती है. इसे आमतौर पर गोबर गैस प्लांट कहा जाता है. गाय के गोबर और पानी का मिश्रण एक हवा बंद टैंक में डाला जाता है जहां बैक्टीरिया ऑक्सीजन की गैर मौजूदगी में ऑर्गेनिक चीजों को तोड़ते हैं.‌ इस प्रक्रिया से मीथेन से भरपूर बायोगैस बनती है. फिर इस गैस को बायोगैस से चलने वाले इंजन या फिर जनरेटर में भेजा जाता है.  फिर यह इंजन या फिर जनरेटर इस ईंधन को बिजली में बदल देते हैं. 

आम घरेलू प्लांट की क्षमता 

गांव के घरों में लगे ज्यादातर छोटे घरेलू बायोगैस सिस्टम मुख्य रूप से खाना पकाने के मकसद से बनाए जाते हैं. ऐसे प्लांट आमतौर पर किचन बर्नर चलाने और कुछ छोटे बल्ब या फिर कम बिजली लेने वाले बिजली उपकरण चलाने के लिए काफी गैस बनाते हैं. ये सिस्टम आमतौर पर 2 से 4 मवेशियों से इकट्ठा किए गए गोबर पर निर्भर होते हैं और लगातार ज्यादा लोड वाले उपकरण चलाने के लिए उतने शक्तिशाली नहीं होते.

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 एयर कंडीशनर चलाने के लिए बड़े सिस्टम की जरूरत

एक आम 1.5 टन के इनवर्टर एयर कंडीशनर को चलाते समय आमतौर पर लगभग 1.5 से 2 किलोवाट बिजली की जरूरत होती है. शुरू होते समय तो इससे भी ज्यादा बिजली चाहिए होती है. इस लोड को ठीक से संभालने के लिए कम से कम 3 किलो वाट से 5 किलोवाट क्षमता वाले बायोगैस जनरेटर की जरूरत होगी.

सबसे बड़ी चुनौती जरूरी कच्चे माल की मात्रा है. एयर कंडीशनर को रोजाना लगभग 5 से 6 घंटे लगातार चलने के लिए रोजाना लगभग 150 से 200 किलोग्राम ताजा गाय के गोबर की जरूरत पड़ सकती है. इस वजह से ऐसे सिस्टम आम शहरी घरों के मुकाबले डेरी फार्म, गौशाला या फिर ज्यादा मवेशी रखने वाले खेती-बाड़ी के कामों के लिए ज्यादा फायदेमंद होते हैं. 

कमर्शियल प्लांट पूरे घर को बिजली दे सकते हैं 

बड़े पैमाने पर लगाए गए बायोगैस सिस्टम सिर्फ एयर कंडीशनर चलाने से कहीं ज्यादा काम कर सकते हैं. कमर्शियल बायोगैस प्लांट इतनी बिजली पैदा कर सकते हैं जिससे घर के उपकरण, पानी के पंप, ट्यूबवेल, खेती की मोटर और यहां तक कि घर या फिर फॉर्म के कई कमरों को भी बिजली मिल सके.

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स्पर्श गोयल एबीपी लाइव के साथ कंटेंट राइटर के तौर पर जुड़े हुए हैं. वह जनरल नॉलेज बीट की जिम्मेदारी संभालते हैं. कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में उन्हें चार साल का अनुभव है. एबीपी से पहले वह डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद में करीब दो साल तक काम कर चुके हैं. उन्होंने नमस्कार भारत से अपने करियर की शुरुआत की थी. .

वह अलग-अलग विषयों पर रिसर्च करके पाठकों के लिए जानकारी को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण अंदाज में पेश करते हैं. उन्होंने न्यूज राइटिंग के साथ-साथ स्क्रीनराइटिंग में भी अपनी पकड़ मजबूत की.

उन्होंने मां शाकुम्भरी यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में मास्टर्स की डिग्री हासिल की है. इसके साथ उन्होंने एशियन एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलिविजन से स्क्रीनप्ले का डिप्लोमा भी हासिल किया है.

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