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Eid al Adha 2026: अमेरिका में रहने वाले मुसलमान कैसे मनाते हैं बकरीद, क्या वहां भी होती है घर पर बकरे की कुर्बानी?

Eid al Adha 2026: बकरीद का त्योहार कुछ ही दिनों में आने वाला है. इसी बीच आइए जानते हैं कि अमेरिका में ईद कैसे मनाई जाती है.

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  • अमेरिका में घर पर कुर्बानी पर प्रतिबंध है, इसलिए बूचड़खानों का सहारा लेते हैं।
  • लोग कुर्बानी के लिए पहले से जानवरों की बुकिंग करवा लेते हैं।
  • कई मुस्लिम अब विदेश में कुर्बानी के लिए ऑनलाइन दान करते हैं।
  • स्थानीय कसाई की दुकानों से हलाल गोश्त खरीदकर भी ईद मनाते हैं।

Eid al Adha 2026: जैसे-जैसे बकरीद करीब आ रही है दुनिया भर के मुस्लिम समुदायों में इसकी तैयारी शुरू हो चुकी है. भारत जैसे देशों में पशु बाजार खरीदारों से खचाखच भर जाते हैं. हालांकि संयुक्त राज्य अमेरिका में इस त्योहार को मनाने का तरीका काफी अलग है. आइए जानते हैं कि क्या अमेरिका में भी घर पर बकरे की कुर्बानी होती है?

बूचडखानों का इस्तेमाल 

अमेरिका में घर पर, घर के बैकयार्ड में या फिर रिहायशी इलाकों में खुलेआम बकरे या फिर किसी भी जानवर की कुर्बानी देना आमतौर पर सार्वजनिक स्वास्थ्य, स्वच्छता, जोनिंग और पशु कल्याण से जुड़े स्थानीय कानून के तहत प्रतिबंधित है. अब क्योंकि घरों में कुर्बानी देना कानूनी तौर पर मान्य नहीं है इस वजह से कई मुस्लिम परिवार अपनी कुर्बानी का इंतजाम लाइसेंस हलाल बूचड़खानों या फिर फार्मों के जरिए करते हैं.

ईद से पहले लोग अक्सर सरकारी मंजूर जगहों पर बकरों या भेड़ों की बुकिंग पहले से ही करवा लेते हैं. ईद की नमाज अदा करने के बाद परिवार या तो खुद उन जगहों पर जाते हैं या फिर प्रशिक्षित कसाइयों को इस्लामी परंपराओं के मुताबिक कुर्बानी देने का अधिकार देते हैं. यह व्यवस्था धार्मिक रीति रिवाज को जारी रखने के साथ-साथ अमेरिका कानून द्वारा तय स्वास्थ्य और सुरक्षा मानकों को बनाए रखने में भी मदद करती है.

विदेश में कुर्बानी के लिए ऑनलाइन दान

अमेरिका में अब बड़ी संख्या में मुसलमान स्थानीय स्तर पर कुर्बानी का इंतजाम करने के बजाय ऑनलाइन कुर्बानी सेवाओं और चैरिटी दान का विकल्प चुनते हैं. इस्लामिक रिलीफ और मुस्लिम एड जैसे संगठन लोगों को डिजिटल जरिए से पैसे दान करने की सुविधा देते हैं. ये चैरिटी संस्थाएं फिर पाकिस्तान, भारत, बांग्लादेश या फिर अफ्रीका के कई देशों में जानवरों की कुर्बानी का इंतजाम करती हैं. यहां कुर्बानी का गोश्त गरीब परिवारों के बीच बांटा जाता है. यह विकल्प अब तेजी से लोकप्रिय हो रहा है. 

यह भी पढ़ेंः बकरीद पर न नमाज न कुर्बानी... पाकिस्तान में इन मुसलमानों को बकरा काटने पर हो जाती है जेल

सीधे हलाल गोश्त की खरीद 

एक और आम तरीका यह है कि ईद की नमाज के बाद स्थानीय कसाई की दुकानों से सीधे हलाल प्रमाणित गोश्त खरीदा जाए. कुर्बानी की प्रक्रिया में खुद शामिल होने के बजाय कुछ परिवार पहले से तैयार हलाल गोश्त खरीदते हैं. साथ ही उसका कुछ हिस्सा अपने रिश्तेदारों, दोस्तों और अपने समुदाय के जरूरतमंद लोगों के बीच बांट देते हैं. 

कहां की जाती है ईद की नमाज अदा?

कई मुस्लिम बहुल देशों के उलट संयुक्त राज्य अमेरिका में ईद कोई राष्ट्रीय सार्वजनिक अवकाश नहीं है. इसलिए ज्यादातर मुसलमान इस त्योहार को मनाने के लिए काम या फिर स्कूल से छुट्टी लेते हैं. क्योंकि बड़े शहरों की मस्जिदों में अक्सर ईद की भारी भीड़ के लिए जगह नहीं होती इस वजह से नमाज अक्सर कन्वेंशन सेंटर, खेल के मैदान, फुटबॉल स्टेडियम या फिर पब्लिक पार्क में आयोजित की जाती है.

यह भी पढ़ेंः इन देशों में कबूतर को दाना डालने पर प्रतिबंध, जानें क्या है इंसानों को इस पंछी से खतरा?

स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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