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यह पक्षी न होता तो नहीं बन पाती बुलेट ट्रेन, जानें सच

जापान की बुलेट ट्रेन पहले तेज आवाज करती थी, इसे शांत बनाने के लिए इंजीनियरों ने किंगफिशर पक्षी की चोंच से लिया अनोखा आइडिया.

Shinkansen bullet train design: जापान की बुलेट ट्रेन यानी शिंकानसेन दुनिया की सबसे तेज ट्रेनों में से एक है. यह करीब 320 किलोमीटर प्रति घंटा की स्पीड से चलती है. लेकिन पहले यह ट्रेन बहुत तेज और परेशान करने वाली आवाज करती थी. जिसकी वजह से अधिकतर लोगों को दिक्कत होती थी. इस दिक्कत को दूर करने के लिए इंजीनियरों ने एक अनोखा तरीका सोचा. उन्होंने आइडिया लिया किंगफिशर पक्षी से.

दिक्कत क्या थी

जब यह ट्रेन सुरंगों से गुजरती थी, तो बहुत तेज धमाके जैसी आवाज आती थी. ऐसा हवा के दबाव की वजह से होता था. ट्रेन जब तेजी से सुरंग में घुसती, तो आगे की हवा अचानक दब जाती और तेज आवाज पैदा होती. यह आवाज इतनी तेज होती कि सुरंग के दूसरी तरफ रहने वाले लोगों को भी दिक्कत होती थी.

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किंगफिशर पक्षी ने कैसे मदद की

इंजीनियरों ने इस दिक्कत को हल करने के लिए कुदरत की तरफ देखा. उन्होंने गौर किया कि किंगफिशर पक्षी जब पानी में तेजी से गोता लगाकर मछली पकड़ता है, तो पानी में बिना आवाज के अंदर चला जाता है. ऐसा उसकी चोंच के खास आकार की वजह से होता है. उसकी चोंच लंबी, पतली और नुकीली होती है, जो हवा और पानी को आसानी से चीर देती है. इंजीनियरों ने यही आइडिया लिया और ट्रेन के अगले हिस्से यानी नाक का डिजाइन बदल दिया.

अब ट्रेन का अगला हिस्सा किंगफिशर की चोंच जैसा लंबा और नुकीला बना दिया गया, ताकि सुरंग में घुसते समय हवा आसानी से किनारे हो जाए और तेज आवाज न हो. इसके साथ ही इस नए डिजाइन के बाद सुरंग से गुजरते समय होने वाली तेज आवाज काफी कम हो गई. साथ ही एक और फायदा भी हुआ, ट्रेन को हवा की जो रुकावट झेलनी पड़ती थी, वो भी कम हो गई. इससे ट्रेन कम बिजली में भी तेज रफ्तार से चलने लगी.

कुदरत से सीखने का कमाल

यह पूरी कहानी बताती है कि इंसान कुदरत को ध्यान से देखकर बड़ी-बड़ी दिक्कतों का हल निकाल सकता है. किंगफिशर पक्षी की चोंच से मिला यह आइडिया आज दुनिया भर की तेज रफ्तार ट्रेनों के लिए एक मिसाल बन चुका है. जापान की यह बुलेट ट्रेन आज भी अपनी स्पीड और शानदार डिजाइन के लिए मशहूर है. इसके पीछे की यह छोटी सी कहानी बताती है कि कुदरत से सीखकर कैसे बड़ी चुनौतियों को भी आसानी से पार किया जा सकता है.

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