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बिहार का सबसे पढ़ा-लिखा जिला कौन सा, क्या है साक्षरता रेट?

Bihar Literacy Rate: बिहार में शिक्षा क्षेत्र वक्त के साथ-साथ काफी ज्यादा प्रगति कर रहा है. इसी बीच आइए जानते हैं बिहार के सबसे ज्यादा पढ़े-लिखे जिले के बारे में.

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  • रोहतास बिहार का सबसे साक्षर, पूर्णिया सबसे कम साक्षर।
  • रोहतास 73.37% साक्षरता, सर्वाधिक महिला साक्षरता दर भी।
  • पूर्णिया 51.08% न्यूनतम साक्षरता, बाढ़-गरीबी प्रमुख कारण।

Bihar Literacy Rate: पूरे बिहार में शिक्षा का स्तर काफी अलग-अलग है. कुछ जिले काफी ज्यादा प्रगति कर रहे हैं और कुछ खराब बुनियादी ढांचे, गरीबी और कम स्कूल नामांकन से अभी भी जूझ रहे हैं. आधिकारिक जनगणना आंकड़ों के मुताबिक रोहतास राज्य का सबसे साक्षर जिला बनकर उभरा है. इसी के साथ पूर्णिया में सबसे कम शिक्षा है और यह सबसे निचले पायदान पर है. आंकड़े लिटरेसी में एक बड़े लिंग अंतर को भी दर्शाते हैं.

लिटरेसी में रोहतास बिहार में सबसे ऊपर 

दक्षिण पश्चिमी बिहार में स्थित रोहतास का लिटरेसी रेट राज्य में सबसे ज्यादा यानी 73.37% है. यह 73% का आंकड़ा पार करने वाला एकमात्र जिला है. जिले ने एक शिक्षा केंद्र के रूप में प्रतिष्ठा बनाई है. सासाराम और डेहरी जैसे शहर गुणवत्तापूर्ण स्कूलों और कोचिंग सेंटर के लिए जाने जाते हैं. रोहतास ने अपनी मजबूत शैक्षिक संस्कृति में योगदान देते हुए बड़ी संख्या में प्रतियोगी परीक्षाओं और सरकारी नौकरियों की तैयारी करने वाले उम्मीदवारों को भी तैयार किया है.

रोहतास में पुरुष और महिला साक्षरता 

साक्षरता को लिंग के आधार पर विभाजित करने पर भी रोहतक का प्रदर्शन काफी अच्छा है. पुरुष साक्षरता दर 82.88% है और महिला साक्षरता दर 62.97% है.‌ हालांकि अभी भी लगभग 20% अंक का लिंग अंतर है. रोहतास ने बिहार के सभी जिलों में सबसे ज्यादा महिला साक्षरता दर दर्ज की है.  यह राज्य के बाकी हिस्सों की तुलना में लड़कियों के लिए बेहतर शैक्षिक अवसरों को दर्शाता है. 


बिहार का सबसे पढ़ा-लिखा जिला कौन सा, क्या है साक्षरता रेट?

रोहतास बेहतर प्रदर्शन क्यों करता है? 

रोहतास को बिहार का सबसे लिटरेट जिला बनाने में कई चीजों ने योगदान दिया है. इस क्षेत्र में प्रतिष्ठित स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों का एक लंबे समय से स्थापित नेटवर्क है. माता-पिता शिक्षा को एक बड़ा महत्व देते हैं और हायर स्टडी और प्रतियोगी परीक्षाओं के बारे में जागरूकता कई दूसरे जिलों की तुलना में यहां ज्यादा है. 

पटना दूसरे स्थान पर 

राज्य की राजधानी पटना 70.68 प्रतिशत की लिटरेसी रेट के साथ दूसरे स्थान पर है. पटना बिहार के कुछ बड़े विश्वविद्यालय, कॉलेज और कोचिंग संस्थानों का घर है. जिले में पुरुष साक्षरता दर 78.48% और महिला साक्षरता दर 61.96% दर्ज की गई है. हालांकि पूरे जिले का औसत एक बड़े ग्रामीण क्षेत्र से प्रभावित होता है. 

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भोजपुर, मुंगेर और औरंगाबाद की स्थिति 

तीन दूसरे जिले भी बिहार के सबसे साक्षर क्षेत्रों में शामिल हैं. भोजपुर में कुल साक्षरता दर 70.47% दर्ज की गई है. इसमें पुरुष साक्षरता 81.74% और महिला साक्षरता 58.01% है. जिले ने पारंपरिक रूप से सशस्त्र बलों और सिविल सेवाओं के लिए कई उम्मीदवार तैयार किए हैं.

मुंगेर 70.46% की साक्षरता दर के साथ काफी आगे हैं. इसके लंबे औद्योगिक और प्रशासनिक इतिहास ने इसके शैक्षिक बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में काफी मदद की है. इसी के साथ इसकी महिला साक्षरता दर 61.53% है. औरंगाबाद की कुल साक्षरता दर 70.32% है. यहां 80.11% पुरुष साक्षरता और 59.71% महिला साक्षरता दर्ज की गई है.

पूर्णिया में साक्षरता दर सबसे कम 

अगर स्पेक्ट्रम के दूसरे छोर पर देखें तो बिहार के सीमांचल क्षेत्र में स्थित पूर्णिया में साक्षरता दर सबसे कम है. जिले की कुल साक्षरता दर सिर्फ 51.08% है. यह राज्य में सबसे कम है. इसी के साथ पुरुष साक्षरता 59.06% है. महिला साक्षरता यहां सिर्फ 42.34% है.


बिहार का सबसे पढ़ा-लिखा जिला कौन सा, क्या है साक्षरता रेट?

पूर्णिया क्यों पिछड़ गया? 

काफी लंबे वक्त से चले आ रहे कई मुद्दों ने पूर्णिया में शैक्षणिक प्रगति को काफी ज्यादा प्रभावित किया है. कोसी और दूसरी नदियों की वजह से बार-बार आने वाली बाढ़ से दैनिक जीवन बाधित होता है और बुनियादी ढांचे को भी नुकसान पहुंचता है. रोजगार की तलाश में बड़े पैमाने पर प्रवासन, व्यापक गरीबी और ग्रामीण क्षेत्रों में उच्च माध्यमिक विद्यालयों की कमी की वजह भी शिक्षा तक पहुंच सीमित कर रही है. इसका सबसे ज्यादा असर लड़कियों पर पड़ रहा है. इन सभी वजहों ने जिले को राज्य के सबसे निचले साक्षरता स्तर को लगातार दर्ज करने में योगदान दिया है.

आधिकारिक जनगणना आंकड़ों के मुताबिक बिहार की कुल साक्षरता दर 61.8% है. इसमें पुरुष साक्षरता दर 71.20% है और महिला साक्षरता दर 51.50% है. आसान शब्दों में कहें तो लिंग अंतर लगभग 20% है.

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स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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