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आम पुलिस से कितनी अलग होती है SIT? जानें यहां

Special Investigation Team: अयोध्या राम मंदिर में जांच के लिए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम का गठन किया गया है. आइए जानते हैं कि यह टीम पुलिस से कैसे अलग होती है?

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  • यह राजनीतिक दबाव से मुक्त, गहन फोरेंसिक जांच करती है।

Special Investigation Team: जब भी किसी हाई प्रोफाइल घोटाले, हत्या, दंगे या फिर भ्रष्टाचार के मामले की जांच की बात आती है तो अक्सर स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम के गठन की खबर सामने आती है. हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर अयोध्या राम मंदिर में दान की कथित चोरी और हेरा फेरी की जांच के लिए एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम बनाई गई.  इसी बीच आइए जानते हैं कि आम पुलिस के उलट स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम किस तरह से काम करती है और यह आम पुलिस से कैसे अलग होती है. 

स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम क्या है? 

स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम एक अस्थायी जांच संस्था है जिसे किसी खास मामले या फिर उससे जुड़े मामलों के समूह की जांच के लिए बनाया जाता है. आमतौर पर इसका गठन तब किया जाता है जब मामला बड़े जनहित से जुड़ा हो, प्रभावशाली लोगों पर आरोप हों या फिर ऐसी आशंका हो कि आम पुलिस जांच निष्पक्ष नहीं हो पाएगी. मामले की प्रकृति के आधार पर स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम का गठन सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट या फिर केंद्रीय या राज्य सरकार द्वारा किया जा सकता है. आम पुलिस जो रोजमर्रा की पुलिसिंग के काम करती है, उसके उलट स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम का ध्यान पूरी तरह से उसे सौंपी गई जांच पर ही होता है.


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स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम आम पुलिस से कैसे अलग है? 

दोनों के बीच सबसे बड़ा अंतर उनकी जिम्मेदारियों की प्रकृति में है. आम पुलिस एक स्थायी संस्था है जो कानून व्यवस्था को बनाए रखने, अपराध को रोकने, जांच करने, ट्रैफिक संभालने, सुरक्षा देने और रोजमर्रा के पुलिसिंग काम करने के लिए जिम्मेदार होती है. दूसरी तरफ स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम सिर्फ एक खास जांच के लिए बनाई जाती है. जैसे ही काम खत्म हो जाता है और अंतिम रिपोर्ट जमा हो जाती है टीम को भंग कर दिया जाता है. 

पुलिस और स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम के गठन के तरीके में भी बड़ा अंतर है. आम पुलिस सामान्य प्रशासनिक ढांचे के तहत राज्य के गृह विभाग के अधीन काम करती है. लेकिन स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम का गठन सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट या फिर केंद्र या राज्य सरकार द्वारा किसी खास मकसद के लिए जारी खास आदेश के जरिए किया जाता है. 

स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम में कौन-कौन शामिल होता है? 

स्थानीय पुलिस स्टेशन की जांच के उलट स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम में सबसे अनुभवी अधिकारी शामिल होते हैं. टीम में वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी, विशेष इकाइयों के जांचकर्ता, फोरेंसिक विशेषज्ञ, साइबर अपराध विशेषज्ञ, वित्तीय जांचकर्ता और कानूनी सलाहकार शामिल हो सकते हैं. यह मल्टी डिसीप्लिनरी एप्रोच स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम को सामान्य जांच की तुलना में ज्यादा असरदार तरीके से मुश्किल फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन की जांच करने से, क्राइम सीन को फिर से बनाने, डिजिटल सबूत को इकट्ठा करने और फोरेंसिक पदार्थ की जांच करने में सक्षम बनाती है.


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संवेदनशील मामले इसी टीम को क्यों सौंपे जाते हैं?

स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम आमतौर पर तब बनाई जाती है जब ऐसी चिंता हो के सामान्य पुलिस जांच पर राजनीतिक दबाव, प्रशासनिक दखल या फिर हित के टकराव का असर पड़ सकता है. इसे तब भी बनाया जाता है जब मामलों में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार, सांप्रदायिक हिंसा, संगठित अपराध, फाइनेंशियल घोटाले या फिर देशभर का ध्यान खींचने वाली घटना शामिल हो. क्योंकि स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम स्वतंत्र रूप से काम करती है और सिर्फ सौंपे गए मामले पर ध्यान देती है इस वजह से उससे जांच में ज्यादा प्रदर्शित और जनता का भरोसा बनाए रखने की उम्मीद की जाती है.

कैसे होती है जांच? 

स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम उसे बनाने वाली अथॉरिटी द्वारा जारी साफ तौर पर तय किए गए टर्म्स ऑफ रेफरेंस के तहत काम करती है. यह लिखित निर्देश जांच का दायरा बताते हैं और अक्सर अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिए एक समय सीमा तय करते हैं. टीम सबसे पहले सभी मौजूदा सबूतों को इकट्ठा करके और उनकी समीक्षा करके शुरुआत करती है. इसके बाद जरूरत पड़ने पर फॉरेंसिक जांच, क्राइम सीन को फिर से बनाने, डिजिटल जांच और फाइनेंशियल रिकॉर्ड की जांच के जरिए वैज्ञानिक विश्लेषण करती है.

गवाहों और संदिग्धों से अक्सर दोबारा पूछताछ की जाती है. ऐसा इसलिए ताकि विरोधाभास या फिर पहले छूट गए सबूतों का पता लगाया जा सके. क्योंकि जांच स्थानीय पुलिस व्यवस्था से स्वतंत्र रूप से की जाती है इस वजह से स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम स्थानीय प्रशासनिक प्रभाव के बिना लोगों से पूछताछ कर सकती है.

यह भी पढ़ेंः मुगल दौर में इश्क करने की सजा, शहजादियों के साथ क्या-क्या हुआ?

स्पर्श गोयल एबीपी लाइव के साथ कंटेंट राइटर के तौर पर जुड़े हुए हैं. वह जनरल नॉलेज बीट की जिम्मेदारी संभालते हैं. कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में उन्हें चार साल का अनुभव है. एबीपी से पहले वह डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद में करीब दो साल तक काम कर चुके हैं. उन्होंने नमस्कार भारत से अपने करियर की शुरुआत की थी. .

वह अलग-अलग विषयों पर रिसर्च करके पाठकों के लिए जानकारी को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण अंदाज में पेश करते हैं. उन्होंने न्यूज राइटिंग के साथ-साथ स्क्रीनराइटिंग में भी अपनी पकड़ मजबूत की.

उन्होंने मां शाकुम्भरी यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में मास्टर्स की डिग्री हासिल की है. इसके साथ उन्होंने एशियन एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलिविजन से स्क्रीनप्ले का डिप्लोमा भी हासिल किया है.

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