किसने डिजाइन किया BRICS का लोगो, इसका मतलब क्या?
BRICS Summit 2026: भारत में 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन आयोजित किया गया है. इस शिखर सम्मेलन में कई देशों के बड़े नेता हिस्सा ले रहे हैं. इसी बीच आइए जानते हैं कि इसका लोगो किसने डिजाइन किया था.

- ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का लोगो सुदीप गांधी ने डिजाइन किया।
- कमल भारत के मूल्यों, नमस्ते सहयोग का प्रतीक है।
- रंग ब्रिक्स देशों की विविधता, साझा लक्ष्य दर्शाते हैं।
- लोगो भारत की अध्यक्षता के मानवता-केंद्रित विजन से जुड़ा।
BRICS Summit 2026: 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का दूसरा दिन नई दिल्ली के भारत मंडपम में हो रहा है. इसमें रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और ईरान, दक्षिण अफ्रीका में मिस्र के राष्ट्रीय अध्यक्ष समेत दुनिया के कई बड़े नेता हिस्सा ले रहे हैं. इस कार्यक्रम पर दुनिया भर की नजरे हैं और ब्रिक्स के लोगो को लेकर भी चर्चा छिड़ चुकी है. आइए जानते हैं कि इसका लोगो किसने डिजाइन किया था और इस लोगो का क्या मतलब है.
किसने किया यह लोगो डिजाइन?
ब्रिक्स समिट 2026 का आधिकारिक लोगो एक पब्लिक डिजाइन प्रतियोगिता के जरिए चुना गया था और इसे 13 जनवरी 2026 को विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर ने आधिकारिक तौर पर लॉन्च किया था. इस लोगो को सुदीप सुभाष गांधी ने डिजाइन किया है.
कमल भारत की पहचान को दर्शाता है
ब्रिक्स समिट 2026 के लोगो का सबसे जरूरी हिस्सा कमल है. यह भारत का राष्ट्रीय फूल है. कमल पारंपरिक भारतीय मूल्यों को दर्शाता है और साथ ही आधुनिक सोच, मजबूती, समृद्धि और सद्भाव को भी दिखाता है.
इसका प्रतीकात्मक महत्व इस वजह से भी ज्यादा है क्योंकि कमल मुश्किल हालात में भी खिलता है. भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के संदर्भ में यह चुनौतियों से पार पाने और मुश्किल हालात के बावजूद विकास और तरक्की हासिल करने की क्षमता को दर्शाता है.

नमस्ते सम्मान और सहयोग का संदेश देता है
कमल के बीच में पारंपरिक भारतीय नमस्ते मुद्रा है. यह मुद्रा सम्मान और अपनापन दिखाती है और साथ ही अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ बातचीत और जुड़ाव के प्रति भारत के नजरिए को भी दर्शाती है. लोगो में इसे शामिल करना देशों के बीच समावेशिता, आपसी सम्मान और सहयोग के विचारों को दिखाता है. यह डिजाइन को एक खास भारतीय सांस्कृतिक पहचान भी देता है.
रंग ब्रिक्स की विविधता को दर्शाते हैं
कमल की पंखुड़ियों में ब्रिक्स सदस्य देशों के राष्ट्रीय झंडों से प्रेरित चमकीले रंग हैं. यह हिस्सा संगठन में मौजूद सांस्कृतिक विविधता को दर्शाता है. इसी के साथ अलग-अलग रंगों का मेल इस बात का संदेश देता है कि अलग-अलग संस्कृति और पहचान वाले देश साझा लक्ष्यों के लिए मिलकर काम कर सकते हैं.

लोगो भारत की ब्रिक्स थीम को दर्शाता है
यह डिजाइन भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता की मुख्य थीम से जुड़ा है. मजबूती, इनोवेशन, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण मुख्य थीम है. इनमें से हर विचार लोगो की विजुअल भाषा के जरिए झलकता है. कमल का फूल मुश्किलों का सामना करने की क्षमता और विकास का प्रतीक है. इसी के साथ अलग-अलग राष्ट्रीय रंगों और नमस्ते की मुद्रा का मेल सहयोग, सबको साथ लेकर चलने की भावना और सामूहिक प्रगति को दर्शाता है.
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कैसे चुना गया था यह लोगो?
भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के लिए आयोजित पब्लिक डिजाइन प्रतियोगिता के जरिए चुने जाने के बाद इस आधिकारिक लोगो को सुदीप सुभाष गांधी ने डिजाइन किया था. यह डिजाइन सिर्फ समिट का एक प्रतीक नहीं है बल्कि इसमें भारत की सांस्कृतिक पहचान और ब्रिक्स सहयोग के व्यापक सिद्धांतों का मेल है. कमल का फूल, नमस्ते की मुद्रा और कई रंगों वाली पंखुड़ियां मिलकर मुश्किलों का सामना करने की क्षमता, इनोवेशन, सहयोग और सस्टेनेबिलिटी के प्रति भारत के विजन को पेश करते हैं. इस तरह यह लोगो भारत की अध्यक्षता की एक विजुअल पहचान के तौर पर काम करता है.
भारत की इस बार की अध्यक्षता पूरी तरह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'मानवता प्रथम और जन केंद्रित' विजन पर ही आधारित है. इसका उद्देश्य सिर्फ बड़े देशों का फायदा ही नहीं बल्कि पूरी मानव जाति का कल्याण और ग्लोबल साउथ के विकासशील देशों को मजबूत बनाना है.
यह भारत के लिए अब तक की सबसे मुश्किल कूटनीतिक परीक्षा मानी जा रही है. एक तरफ तो पश्चिम एशिया में तनाव और अमेरिका इजरायल के समीकरण हैं, वहीं दूसरी तरफ भारत इस मंच पर चीन और रूस के साथ बैठकर ग्लोबल साउथ के लिए एक नई पेमेंट प्रणाली और व्यापारिक रास्ते तैयार करने पर बात कर रहा है.
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