बिना फाइटर जेट और टैंक कैसे पाकिस्तान को घुटनों पर लाया बलूचिस्तान? जानें 'दबंग बलोच' ताकतों की हकीकत
बलूचिस्तान ने सोशल मीडिया पर पाकिस्तान से अलग खुद को स्वतंत्र देश घोषित कर दिया है और 85% हिस्से पर कब्जे का दावा किया है. चलिए जानें कि बिना लड़ाकू टैंक और फाइटर जेट के उन्होंने पाकिस्तानियों को कैसे झुकाया.

पाकिस्तान के सबसे बड़े सूबे बलूचिस्तान से एक ऐसी हैरान करने वाली खबर सामने आई है, जिसने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है. सोशल मीडिया पर खुद को रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान बताते हुए एक स्वतंत्र देश घोषित करने का दावा किया गया है. बलूच विद्रोहियों का दावा है कि उनकी सेना ने क्षेत्र के 85 प्रतिशत हिस्से पर पूरी तरह नियंत्रण कर लिया है और वे जल्द अपना झंडा, करेंसी और राष्ट्रगान लागू करने जा रहे हैं. सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि बिना किसी वायुसेना, आधुनिक टैंक या फाइटर जेट के बलोच ताकतें इस मुकाम तक कैसे पहुंचीं.
मिट्टी-पत्थरों से तैयार सटीक सैन्य वार रूम
बलूच लिबरेशन आर्मी जैसे संगठन पाकिस्तानी फौज के खिलाफ बेहद पारंपरिक लेकिन अचूक तकनीकों का इस्तेमाल करते हैं. वे किसी महंगी सैटेलाइट मैप या अत्याधुिक कंप्यूटर के बजाए सीधे जमीन की मिट्टी और पत्थरों से युद्ध क्षेत्र का हूबहू ढांचा तैयार करते हैं. इस जमीनी मॉडल की मदद से बलोच लड़ाके पाकिस्तानी चौकियों और सेना के बड़े काफिलों की सही लोकेशन का सटीक अंदाजा लगाते हैं और फिर घने जंगलों या पहाड़ों के बीच अचानक जानलेवा हमला कर देते हैं.
महिला सुसाइड बॉम्बर्स और माजिद ब्रिगेड का खौफ
बलोच विद्रोहियों की ताकत सिर्फ छापामार युद्ध तक सीमित नहीं है, बल्कि उनकी विशेष माजिद ब्रिगेड पाकिस्तानी सेना के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द बन चुकी है. इस ब्रिग्रेड में युवा बलूच महिलाओं को सुसाइड बॉम्बर के रूप में शामिल किया गया है, जो इस आंदोलन का एक नया और खतरनाक चेहरा हैं. सुरक्षा चौकियों और पाकिस्तानी खुफिया तंत्र के लिए इन महिला फिदायीनों को भांप पाना मुश्किल हो रहा है, जिससे पाकिस्तानी फौज में डर का माहौल है.
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बलूचिस्तान की बुनियादी व्यवस्था पूरी तरह से ठप करना
पाकिस्तानी फौज को पूरी तरह से अपाहिज बनाने के लिए बलूच के लड़ाके वहां के रेल नेटवर्क को निशाना बनाते हैं. वे लगातार रेल पटरियों को बम से उड़ा देते हैं और बलूचिस्तान को पाकिस्तान से जोड़ने वाले मेन हाईवे पर पूरी तरह से कब्जा कर लेते हैं. हालत यह हो चुकी है कि पाकिस्तानी रेलवे ने सुरक्षा की गारंटी न होने के चलते अपनी मशहूर जाफर एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों का संचालन अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिया है.
बलोच के लड़ाकों के पास कौन से और कहां से आए हथियार?
बलूच विद्रोहियों के पास अब सिर्फ पुरानी बंदूकें या एके-47 नहीं है, बल्कि उनके पास अफगानिस्तान से तस्करी होकर आए आधुनिक अमेरिकी हथियार पहुंच चुके हैं. तालिबान के कब्जे के बाद अमेरिकी सेना द्वारा छोड़े गए खतरनाक हथियार अब बलोच लड़ाकों के हाथों में हैं. इनमें थर्मल वेपन साइट्स शामिल हैं, जो कि धुंध या घने अंधेरे में भी पाकिस्तानी सैनिकों की बॉडी हीट को मीलों दूर से पहचान कर उनको निशाना बनाने की ताकत रखते हैं.
लेटेस्ट स्नाइपर राइफल्स और नाइट विजन
पाकिस्तानी सेना के पास आज भी पुरानी तकनीकों के नाइट विजन उपकरण हैं, जबकि बलूच लड़ाके नई पीढ़ी के अमेरिकी नाइट विजन सिस्टम का इस्तेमाल कर रहे हैं. इसके अलावा विद्रोही करीब 20 लाख रुपये तक की कीमत वाली घातक अमेरिकी एम4 कारबाइन और स्नाइपर राइफल्स से लैस हैं. ये स्नाइपर राइफल्स दो किलोमीटर दूर से भी पाकिस्तानी कमांडरों को निशाना बना सकती है.
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