Explained: ब्रिटेन की व्हिस्की से पाउडर-क्रीम तक! क्या सस्ता हुआ और किसकी बढ़ेगी डिमांड, भारत-UK FTA से आपको क्या फायदा?
India UK Trade Deal: भारत-UK के बीच एग्रीमेंट की बातचीत 13 जनवरी 2022 को शुरू हुई थी, जो करीब 4 साल बाद पूरी हुई. 2014 से भारत ने मॉरीशस, UAE, ऑस्ट्रेलिया और EFTA के साथ 3 FTA पर हस्ताक्षर किए हैं.

करीब 4 साल की जद्दोजहद और 14 राउंड की बैठक के बाद 15 जुलाई 2026 से भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच मुफ्त व्यापार समझौता (FTA) लागू हो गया. यानी अब भारत के 99% सामानों को UK में जीरो टैरिफ पर निर्यात किया जाएगा. वहीं UK के 99% सामान 3% एवरेज टैरिफ पर आयात होंगे. इस डील ने अलग-अलग सेक्टर में फैले 95% से ज्यादा टैरिफ को खत्म या बहुत कम कर दिया है. केंद्र सरकार का अनुमान है कि इस डील से भारत को अगले पांच सालों में सिर्फ सर्विस सेक्टर से हर साल करीब 2.5 अरब डॉलर का एक्सट्रा रेवेन्यू मिलेगा. कुल द्विपक्षीय व्यापार मौजूदा 20 अरब डॉलर से 2030 तक 100 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है. यह डील सिर्फ सरकारों के बीच का कागजी समझौता नहीं, बल्कि सीधे आपकी और मेरी जिंदगी से जुड़ी चीज है...
सबसे पहले समझें कि क्या-क्या सस्ता होगा?
यह डील आपकी शॉपिंग लिस्ट के कई आइटम्स की कीमत घटाने वाली है. द स्टेट्समैन और वाणिज्य मंत्रालय की प्रेस रिलीज के मुताबिक, सबसे बड़ी राहत इन चीजों पर मिलेगी:
| सामान | मौजूदा स्थिति | FTA के बाद | कीमत पर अनुमानित असर |
| लग्जरी कारें (35 लाख से ऊपर) | 100% आयात शुल्क | घटाकर 70% किया | लैंड रोवर, जगुआर, रोल्स-रॉयस जैसी कारें 15-20 लाख रुपये तक सस्ती होंगी |
| 800cc से ऊपर मोटरसाइकिल | 50% आयात शुल्क | घटाकर 30% किया | ट्रायम्फ और हार्ले-डेविडसन (UK मॉडल्स) 2-4 लाख रुपये सस्ती होंगी |
| स्कॉच, व्हिस्की और जिन | 150% आयात शुल्क | पहले 100%, फिर 3 साल में 50% | अभी 3,000 वाली बोतल 2,500 में, तीन साल बाद 1,800-2,000 में मिल सकती है |
| इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) कंपोनेंट्स | 15-60% विभिन्न शुल्क | अधिकतर पर शून्य | भारत में बनने वाली इलेक्ट्रिक कारें 5-8% तक सस्ती हो सकती हैं |
| ऊनी और खास कपड़े | 20-30% आयात शुल्क | शून्य या बहुत कम | ब्रिटिश ब्रांड्स के सूट-ब्लेजर 15-25% सस्ते होंगे |
| मेडिकल इक्विपमेंट और डायग्नोस्टिक मशीनें | 30-40% शुल्क | शून्य के करीब | MRI और CT स्कैन जैसी जांचों की लागत घटने से हेल्थकेयर सस्ता होगा |
इसके अलावा UK से आयात होने वाले सैल्मन, लैंब, चॉकलेट, बिस्किट और सॉफ्ट ड्रिंक्स पर टैरिफ कम होगा. इससे ये उत्पाद भी सस्ते होंगे.
किन चीजों की मांग में जबरदस्त उछाल आएगा?
कीमतें घटने और बाजार खुलने का सीधा असर मांग पर पड़ता है. इस डील के बाद तीन सेक्टर में मांग का ग्राफ सबसे तेजी से ऊपर जाएगा:
- प्रीमियम कारें और बाइक्स: इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (SIAM) के अनुमान के मुताबिक, आयात शुल्क घटने से भारत में लग्जरी कार सेगमेंट की बिक्री अगले दो सालों में 25-30% तक बढ़ सकती है. इसका मतलब है ज्यादा डीलरशिप, ज्यादा सर्विस सेंटर और ज्यादा नौकरियां.
- स्कॉच और ब्रिटिश अल्कोहल ब्रांड्स: भारत पहले से ही दुनिया का सबसे बड़ा व्हिस्की बाजार है. कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन अल्कोहलिक बेवरेज कंपनीज (CIABC) का कहना है कि कीमतें घटने से अगले पांच सालों में स्कॉच और व्हिस्की का आयात तीन गुना तक बढ़ सकता है. इससे देसी कंपनियों पर क्वालिटी सुधारने का दबाव भी बढ़ेगा.
- ब्रिटिश फैशन और लाइफस्टाइल ब्रांड्स: मार्क्स एंड स्पेंसर, नेक्स्ट और बरबेरी जैसे ब्रांड्स के कपड़े और एक्सेसरीज अब पहले से सस्ते होंगे. रिटेलर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के मुताबिक, इस सेगमेंट में 20% तक की ग्रोथ देखने को मिल सकती है.
इन सामानों पर कोई टैरिफ नहीं लगेगा
मिनिस्ट्री ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री की रिपोर्ट के मुताबिक,
| आइटम | FTA से पहले | FTA के बाद |
| प्रोसेस्ड फूड | 70% | 0% |
| वेजिटेबल ऑयल | 20% | 0% |
| ट्रांसपोर्ट/ऑटो | 18% | 0% |
| लेदर/फुटवियर | 16% | 0% |
| मैकेनिकल मशीनरी | 14% | 0% |
| ग्लास/सिरेमिक/हैजर | 12% | 0% |
| टेक्सटाइल/क्लोदिंग | 12% | 0% |
| लकड़ी/पेपर | 10% | 0% |
| बेस मेटल | 10% | 0% |
| इलेक्ट्रिकल मशीनरी | 8% | 0% |
| मिनरल्स/कैमिकल्स | 8% | 0% |
| प्लास्टिक/रबर | 6% | 0% |
| घड़ी/इंस्ट्रूमेंट्स | 6% | 0% |
| जेम्स एंड ज्वैलरी | 4% | 0% |
| फर्नीचर/खेल का सामान | 4% | 0% |
| हथियार | 3% | 0% |
भारत के लिए सबसे बड़े फायदे क्या होंगे?
इस डील का असर सिर्फ आपकी शॉपिंग लिस्ट तक सीमित नहीं है. इसके 5 ऐसे फायदे हैं जो सीधे देश की अर्थव्यवस्था और रोजगार से जुड़ते हैं:
- भारतीय सामान को UK में एंट्री: इस समझौते के तहत, भारतीय टेक्सटाइल, लेदर, ज्वैलरी, इंजीनियरिंग गुड्स और फार्मा प्रोडक्ट्स को UK के बाजार में ड्यूटी-फ्री एंट्री मिलेगी. भारतीय निर्यातक संगठनों (FIEO) का अनुमान है कि इससे अकेले टेक्सटाइल सेक्टर का निर्यात अगले तीन सालों में 5 अरब डॉलर से बढ़कर 12 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है.
- सर्विस सेक्टर और नौकरियों की नई राह: यह डील भारत के IT, हेल्थकेयर और एजुकेशन सेक्टर के लिए किसी वरदान से कम नहीं है. UK ने भारतीय नर्सों, डॉक्टरों और IT प्रोफेशनल्स के लिए वीजा प्रक्रिया को आसान बना दिया है. इससे हर साल करीब 50,000 भारतीय पेशेवरों को UK में काम करने का मौका मिलेगा, जो अपने परिवारों को हर साल अरबों डॉलर भेजेंगे.
- निवेश का बड़े मौके: स्टेट्समैन की रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रिटिश कंपनियां भारत में मैन्युफैक्चरिंग, रिन्यूएबल एनर्जी और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में भारी निवेश करने की तैयारी में हैं. अगले पांच सालों में UK से भारत में 15-20 अरब डॉलर का फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) आ सकता है. यह पैसा सीधे नए प्रोजेक्ट्स, नई फैक्ट्रियों और नई नौकरियों में बदलेगा.
- MSME को बढ़ावा और निवेश में बढ़ोतरी: भारत के 6 करोड़ MSME को फायदा होगा. ये भारत के 40% निर्यात में योगदान देते हैं. इस एग्रीमेंट से उन्हें नए बाजार और बेहतर मार्जिन मिलेंगे. UK की कंपनियां भारत में IT, फाइनेंशियल सर्विसेज और ग्रीन टेक्नोलॉजी में निवेश बढ़ाएंगी. यह भारत के मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर को मजबूत करेगा.
लेकिन क्या सब कुछ सस्ता हो जाएगा या सरकार ने कुछ चीजें बचाई हैं?
यहीं पर सरकार ने सावधानी बरती है. हर चीज पर बाजार नहीं खोला गया है. भारत के छोटे किसानों और उद्योगों को बचाने के लिए कई संवेदनशील क्षेत्रों को इस डील से पूरी तरह बाहर रखा गया है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन चीजों पर कोई रियायत नहीं दी गई है:
- डेयरी प्रोडक्ट्स (दूध, पनीर, मक्खन)
- गेहूं, चावल और दूसरे मुख्य अनाज
- सब्जियां और फल
- जेनेरिक दवाएं (जिससे भारतीय दवा कंपनियों की बाजार हिस्सेदारी सुरक्षित रहेगी)
इसका मतलब है कि आपकी रसोई का बजट या दवाइयों का खर्च पर इस डील का असर नहीं पड़ेगा.
आम आदमी के लिए इस डील का मतलब क्या है?
अगर इस पूरी डील को एक लाइन में समेटना हो, तो वो यह है कि यह एक 'सिलेक्टिव बोनांजा' है. लग्जरी कार, बाइक या महंगी व्हिस्की, अब थोड़ी आसान हो जाएगी. फैशन और हेल्थकेयर पर खर्च घटेगा, लेकिन इससे भी बड़ी बात यह है कि यह डील देश में निवेश और नौकरियों के नए दरवाजे खोलेगी. आने वाले समय में इसका फायदा महंगाई को कंट्रोल करने और रोजगार बढ़ाने के रूप में सबको मिलेगा. यह डील भारत को दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल करने की दिशा में एक बड़ा और ठोस कदम है.






















