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Bakrid 2026: बकरीद और बकरा ईद में क्या है अंतर, क्या है दोनों को मनाने की वजह?

Bakrid 2026: भारत में इस साल बकरीद कल यानी 28 मई 2026 को मनाई जाएगी. इस खास मौके पर लोग सुबह नमाज अदा करते हैं, एक-दूसरे को मुबारकबाद देते हैं, कुर्बानी करते हैं.

Bakrid 2026: ईद-उल-अजहा यानी बकरीद मुस्लिम समुदाय का सबसे अहम और पवित्र त्योहारों में से एक माना जाता है. भारत में इस साल बकरीद कल यानी 28 मई 2026 को मनाई जाएगी. इस खास मौके पर लोग सुबह नमाज अदा करते हैं, एक-दूसरे को मुबारकबाद देते हैं, कुर्बानी करते हैं और जरूरतमंदों की मदद करते हैं, लेकिन हर साल इस त्योहार को लेकर लोगों के मन में कई सवाल भी उठते हैं. जिसमें सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि आखिर बकरीद और बकरा ईद में क्या अंतर है. क्या ये दोनों अलग-अलग त्योहार हैं या एक ही हैं. इसके अलावा कई लोग यह भी जानना चाहते हैं कि दोनों को मनाने की वजह क्या है. तो आइए आज हम आपको बताते हैं कि बकरीद और बकरा ईद में क्या अंतर है और दोनों को मनाने की वजह क्या है. 

बकरीद और बकरा ईद में क्या अंतर है?

बकरीद और बकरा ईद में कोई अंतर नहीं है. बहुत से लोग सोचते हैं कि बकरीद और बकरा ईद दो अलग-अलग त्योहार हैं, लेकिन ऐसा नहीं है. यह दोनों नाम एक ही त्योहार के हैं. इस त्योहार का असली नाम ईद-उल-अजहा है. इसे कई जगह बकरीद कहा जाता है. वहीं कई लोग इसे बकरा ईद भी कहते हैं क्योंकि इस दिन कुर्बानी देने की परंपरा होती है और ज्यादातर लोग बकरे की कुर्बानी देते हैं. 

इन दोनों को मनाने की वजह क्या है?

इस्लामिक मान्यता के अनुसार अल्लाह ने हजरत इब्राहिम की आस्था की परीक्षा लेने के लिए उनसे उनकी सबसे प्यारी चीज कुर्बान करने को कहा था. हजरत इब्राहिम के लिए उनके बेटे हजरत इस्माइल सबसे प्यारे थे. ऐसे में जब उन्होंने अल्लाह के हुक्म को मानते हुए अपने बेटे की कुर्बानी देने का फैसला किया, तब अल्लाह उनकी नीयत और विश्वास से खुश हुए और हजरत इस्माइल की जगह एक दुम्बा भेज दिया. तभी से इस दिन कुर्बानी देने की परंपरा शुरू हुई. यही वजह है कि बकरीद पर जानवर की कुर्बानी के साथ अपने अंदर के लालच, घमंड और बुराइयों को खत्म करना भी माना जाता है. 

यह भी पढ़ें - Bakrid 2026: बकरीद पर कुर्बानी को लेकर देशभर में घमासान, जानें किस राज्य में कौन-से जानवर मारने पर सख्त हैं नियम?

बकरीद पर क्या किया जाता है?

इस दिन मुस्लिम समुदाय के लोग सुबह विशेष नमाज अदा करते हैं. नए कपड़े पहनते हैं और एक-दूसरे को ईद की मुबारकबाद देते हैं. इसके बाद कुर्बानी की रस्म निभाई जाती है. इसके अलावा गरीबों और जरूरतमंदों को दान दिया जाता है. रिश्तेदारों और दोस्तों से मुलाकात की जाती है. घरों में खास पकवान बनाए जाते हैं. साथ ही जरूरतमंदों में मांस बांटा जाता है. 

बकरीद पर किन जानवरों की कुर्बानी दी जा सकती है?

इस्लामिक शरीयत के अनुसार कुछ खास जानवरों की ही कुर्बानी दी जा सकती है.  इनमें बकरा, बकरी, भेड़, दुम्बा, भैंस, बैल, ऊंट शामिल हैं. साथ ही शरीयत के अनुसार हर जानवर की कुर्बानी सही नहीं मानी जाती है. अगर जानवर बीमार, कमजोर या विकलांग हो तो उसकी कुर्बानी जायज नहीं मानी जाती है. इसके अलावा भारत के कई राज्यों में कुछ जानवरों की कुर्बानी को लेकर कानून भी बने हुए हैं, इसलिए स्थानीय नियमों का पालन करना जरूरी होता है. 

यह भी पढ़ें - आखिर इन मुस्लिम देश को क्यों पड़ रही पवित्र तुलसी की जरूरत? वजह जानकर रह जाएंगे हैरान

मानसी उपाध्याय करीब दो साल से डिजिटल मीडिया और कंटेंट राइटिंग के क्षेत्र में काम कर रही हैं. मूल रूप से उत्तराखंड से जुड़ी मानसी ने अपनी स्कूली शिक्षा केंद्रीय विद्यालय से पूरी की. इसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीए (ऑनर्स) हिंदी पत्रकारिता की पढ़ाई की और वर्तमान में राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय से मास्टर्स इन जर्नलिज्म कर रही हैं. पत्रकारिता में उन्होंने अपने करियर की शुरुआत अक्टूबर 2024 में एबीपी नेटवर्क से की. अब वह डिजिटल कंटेंट राइटिंग के क्षेत्र में सक्रिय हैं. उन्हें फीचर और इंफॉर्मेटिव स्टोरीज लिखने के साथ-साथ स्क्रिप्ट राइटिंग, सोशल मीडिया और रिसर्च आधारित कंटेंट तैयार करने में रुचि है. हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं पर अच्छी पकड़ रखने वाली मानसी ऐसी स्टोरीज लिखना पसंद करती हैं, जो पाठकों को नई और जरूरी जानकारी आसान भाषा में दें. उनकी कोशिश रहती है कि कंटेंट सिर्फ जानकारी देने वाला ही नहीं, बल्कि पढ़ने में दिलचस्प और पाठकों की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ा हुआ भी हो.

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