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Ramlala Pran Pratishtha: अयोध्या के कुबेर टीला में क्या है, जहां प्राण प्रतिष्ठा के बाद सबसे पहले जाएंगे पीएम मोदी

Ram Mandir Pran Pratishtha: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रामलला की प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा के बाद सबसे पहले कुबेर टीला जाएंगे. इस टीले का इतिहास काफी प्राचीन है.

Ram Mandir Inauguration: अयोध्या में आज रामलला की प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा होगी. जिसे लेकर देश विदेश में खुशी का माहौल है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी आज अयोध्या में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होंगे. रामलला की प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा के बाद पीएम मोदी कुबेर टीला जाएंगे. वह यहां भगवान शिव के दर्शन और पूजा अर्चना करेंगे.

श्री राम जन्मभूमि परिसर में कुबेर टीला है.यह टीला करीब सौ फुट ऊंचा है, यह मिट्टी और पत्थरों से बना हुआ है. जहां कामेश्वर महादेव का पुराना मंदिर है. रिपोर्ट्स के अनुसार इस मंदिर की दीवार करीब ढाई फीट चौड़ी और 5 फीट ऊंची थी.  राम मंदिर के निर्माण के साथ-साथ ट्रस्ट ने इसका भी जीर्णोद्धार कराया है. बताया जाता है कि इस स्थान पर कुबेर जी का आगमन हुआ था. टीले पर शिवलिंग की स्थापना की गई. उसके बाद लोगों ने श्री गणेश, माता पार्वती, कार्तिकेय, नंदी, कुबेर सहित नौ देवी देवता की प्रतिमा स्थापित की थी.

प्राचीन है कुबेर टीला का इतिहास

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने कुबेर टीले का पुनरुद्धार कराया है, जहां कुबेर टीला मार्ग पर जटायु की प्रतिमा लगाई गई है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 30 फुट ऊंची बनाई गई जटायु की प्रतिमा का अनावरण करेंगे. कुबेर टीला का इतिहास भी प्राचीन है. माना जाता है कि यह टीला भगवान राम के जन्म से भी पहले से मौजूद था. अयोध्या के महाकाव्यों में भी कुबेर टीला का उल्लेख मिलता है. यह एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है. रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद इसका महत्व और भी बढ़ने की उम्मीद है.

राममय हुआ पूरा देश

अयोध्या में अपनी जन्मभूमि पर करीब 500 वर्ष बाद श्रीराम फिर से विराजमान होंगे. रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के मौके पर केवल अयोध्या या यूपी ही नहीं, पूरा देश आनंद और उत्साह से भरा हुआ है. देश के हर शहर में इस दिन को उत्सव के रूप में मनाया जा रहा है. लोगों ने अपने घरों में भगवान श्री राम के झंडे लगाए हैं. तमाम जगह पूजा-अर्चना की जा रही है. झांकियां निकाली जा रही हैं.

यह भी पढ़ें- Ramlala Pran Pratishtha: रामलला के हो चुके हैं औषधाधिवास, केसराधिवास, घृताधिवास, मध्याधिवास... जानिए ये क्या होते हैं?

पत्रकारिता की दुनिया में जब बात पढ़ाई-लिखाई, लाइफस्टाइल, फीचर या न्यूज की आती है, तो चन्द्रिल कुलश्रेष्ठ का नाम सहज ही सामने आता है. जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त कर चुके चन्द्रिल बीते पांच वर्षों से मीडिया जगत में सक्रिय हैं और इस दौरान इन्होंने पत्रकारिता के कई रंग देखे हैं - खबरों की तह तक जाना, आम लोगों की जिंदगी से जुड़ी बातें सामने लाना और क्राइम से जुड़ी कहानियों को तथ्यात्मक ढंग से पेश करना उनकी खासियत बन चुकी है.

चन्द्रिल न सिर्फ रिपोर्टिंग में निपुण हैं, बल्कि कंटेंट राइटिंग, स्टोरी कंसेप्टिंग और फीचर प्रजेंटेशन में भी उनका अंदाज बेहद खास है. खबरों की दुनिया में जहां अक्सर रफ्तार और सनसनी का बोलबाला होता है, वहीं चन्द्रिल की कलम तथ्यों के साथ संतुलन और संवेदनशीलता बनाए रखते हुए काम करती है. वह मानते हैं कि पत्रकारिता का असली उद्देश्य जनता को सही और सटीक जानकारी देना है, न कि महज ध्यान खींचना. यही वजह है कि उनके द्वारा लिखी गई स्टोरीज ना सिर्फ पढ़ने में रोचक होती हैं, बल्कि विश्वसनीयता के मानक पर भी खरी उतरती हैं.

इन दिनों चन्द्रिल ABP Live से जुड़कर कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर काम कर रहे हैं. चाहे बात सरकारी नौकरियों की अपडेट्स की हो, स्कूली शिक्षा में हो रहे बदलावों की या फिर खेती-किसानी से जुड़े जमीनी मुद्दों की हर विषय पर उनकी पकड़ गहरी और प्रस्तुतिकरण सहज होता है. वह खबर को महज सूचना नहीं, बल्कि एक अनुभव की तरह पेश करने में यकीन रखते हैं, ताकि पाठक उससे खुद को जोड़ सके.

क्राइम रिपोर्टिंग में भी चन्द्रिल की शैली अलग है. वह किसी भी केस को सिर्फ घटनाओं के सिलसिले के रूप में नहीं दिखाते, बल्कि उसके पीछे छिपे सामाजिक, मनोवैज्ञानिक और कानूनी पहलुओं को भी उजागर करने की कोशिश करते हैं.

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