जब देश में लोकसभा है तो क्यों चुने जाते हैं राज्यसभा सांसद, जानिए कैसे काम करता है इसका सिस्टम?
साल 2026 में कुल मिलाकर 72 सीटें अलग-अलग चरणों में खाली होंगी. भारत एक लोकतांत्रिक देश है और यहां संसद कानून बनाने का सबसे बड़ा मंच है. संसद के दो सदन होते हैं.

भारत निर्वाचन आयोग ने मार्च 2026 में होने वाले राज्यसभा के द्विवार्षिक (हर दो साल में होने वाले) चुनावों के लिए अधिसूचना जारी कर दी है. इस बार 10 राज्यों की 37 सीटों पर चुनाव होंगे. ये सीटें अप्रैल में खाली हो रही हैं. साल 2026 में कुल मिलाकर 72 सीटें अलग-अलग चरणों में खाली होंगी. भारत एक लोकतांत्रिक देश है और यहां संसद कानून बनाने का सबसे बड़ा मंच है. संसद के दो सदन होते हैं. लोकसभा और राज्यसभा. अक्सर लोगों के मन में सवाल उठता है कि जब लोकसभा के सांसद सीधे जनता द्वारा चुने जाते हैं, तो फिर राज्यसभा की क्या जरूरत है. राज्यसभा सांसद क्यों चुने जाते हैं और उनका काम क्या होता है. तो आइए जानते हैं कि जब देश में लोकसभा है तो राज्यसभा सांसद क्यों चुने जाते हैं. इसका सिस्टम कैसे काम करता है.
जब देश में लोकसभा है तो राज्यसभा सांसद क्यों चुने जाते हैं?
भारत की संसद दो सदनों लोकसभा और राज्यसभा से मिलकर बनी है. लोकसभा जहां पूरे देश की जनता का सीधा प्रतिनिधित्व करती है, वहीं राज्यसभा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की आवाज को राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाने का काम करती है. राज्यसभा के सदस्य जनता द्वारा सीधे नहीं, बल्कि राज्यों की विधानसभाओं के चुने हुए प्रतिनिधियों द्वारा चुने जाते हैं, जिससे संघीय ढांचे को मजबूती मिलती है. यह सदन कानूनों की समीक्षा करता है, जरूरी संशोधन सुझाता है और जल्दबाजी में फैसले होने से रोकने का काम करता है. साथ ही यह एक स्थायी सदन है, जो कभी भंग नहीं होता, इसलिए शासन में निरंतरता बनी रहती है. इसी वजह से लोकसभा के होते हुए भी राज्यसभा सांसद चुने जाते हैं, ताकि लोकतंत्र संतुलित और मजबूत बना रहे.
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इसका सिस्टम कैसे काम करता है?
राज्यसभा का सिस्टम अप्रत्यक्ष चुनाव पर आधारित है. इसके सदस्य सीधे जनता द्वारा नहीं चुने जाते, बल्कि राज्य की विधानसभाओं के चुने हुए विधायक (MLA) उन्हें चुनते हैं. चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली से होता है, जिसमें विधायक उम्मीदवारों को प्राथमिकता के आधार पर वोट देते हैं. हर विधायक का वोट एक बार गिना जाता है और जितने उम्मीदवार को तय कोटा के बराबर पहली पसंद के वोट मिल जाते हैं, वह निर्वाचित हो जाता है. राज्यसभा एक स्थायी सदन है, इसलिए यह कभी भंग नहीं होती. इसके सदस्य 6 साल के लिए चुने जाते हैं और हर दो साल में एक-तिहाई सदस्य रिटायर होते हैं, जिनकी जगह नए सदस्य चुने जाते हैं. इस तरह यह प्रणाली राज्यों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करती है और संसद में संतुलन बनाए रखती है.
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