कौन थीं अटल बिहारी वाजपेयी की गर्लफ्रेंड, जिनकी बेटी को पूर्व पीएम ने लिया था गोद?
Atal Bihari Vajpayee Birth Anniversary: आज देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की बर्थ एनिवर्सरी है. इस खास मौके पर हम आपको उनकी जिंदगी से जुड़ा एक बेहद दिलचस्प किस्सा सुनाने जा रहे हैं.

Atal Bihari Vajpayee Birth Anniversary: “हमने देखी है उन आंखों की महकती खुशबू, हाथ से छूके इसे रिश्तों का इल्जाम न दो…” यह गाना शायद उस अनकहे एहसासों को छूता है जो अटल बिहारी वाजपेयी और राजकुमारी कौल के बीच दशकों लंबे रिश्ते में पनपे. राजनीतिक दुनिया में अपनी सादगी, मर्यादा और शानदार कविताओं के लिए याद किए जाने वाले वाजपेयी की निजी जिंदगी में एक ऐसा बंधन था जिसे उन्होंने कभी नाम नहीं दिया, लेकिन उसे अस्वीकार भी नहीं किया और जीवन भर साथ निभाया.
आखिर वह महिला कौन थीं और अटल बिहारी वाजपेयी के साथ उनका रिश्ता क्या था, और क्यों वाजपेयी ने उनकी बेटी को अपने घर में अपनाया? आइए अटल जी की बर्थ एनिवर्सरी के मौके पर इस बारे में विस्तार से जानें.
अटल और राजकुमारी की मुलाकात
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और राजकुमारी हक्सर (बाद में कौल) की दोस्ती 1940 के दशक के मध्य में ग्वालियर के विक्टोरिया कॉलेज (अब महारानी लक्ष्मीबाई कॉलेज) में शुरू हुई थी. दोनों के बीच शुरुआती दिनों में मित्रता धीरे‑धीरे गहराती चली गई, और तब के रूढ़िवादी समाज में यह एक खास बंधन बन गया. वाजपेयी ने एक प्रेम‑भरा पत्र राजकुमारी की किताब में छुपा दिया था, लेकिन दुर्भाग्य से वह जवाब कभी उनके पास नहीं पहुंचा.
अटल रिश्ता
समय के साथ दोनों का रिश्ता और गहरा हुआ. राजकुमारी अटल जी से शादी करना चाहती थीं, लेकिन उनके परिवार ने रोज शाखा में जाने वाले शख्स को अपनी बेटी के लायक नहीं समझा. इसलिए दोनों की शादी नहीं हो पाई. खैर..राजकुमारी का विवाह ब्रिज नारायण कौल से हो गया, लेकिन यह विवाह उनके अटल से कनेक्शन को खत्म नहीं कर पाया. राजकुमारी के घर पर वाजपेयी अक्सर आते‑जाते रहते थे और धीरे‑धीरे उनका परिवार और दोस्ती स्थायी रूप से जुड़ गई. राजकुमारी के दोनों बच्चों नमिता और निहारिका के साथ भी उनका गहरा स्नेह रहा.
गोद लिया गया परिवार
1978 में जब वाजपेयी विदेश मंत्री थे, तो राजकुमारी कौल, उनके पति और दोनों बेटियां उनके सरकारी आवास पर रहने लगे. इसी दौरान उन्होंने नमिता कौल को औपचारिक रूप से गोद ले लिया और बाद में निहारिका को भी आत्मीय रूप से अपनाया माना गया. गोद लेने का यह निर्णय पारिवारिक रूप से ही नहीं, बल्कि भावनात्मक रूप से भी गहरा था. वाजपेयी ने इन बच्चों को वही प्यार और सुरक्षा दी, जो एक पिता के रूप में अपेक्षित है.
अनकहा और गहरा बंधन
राजकुमारी कौल और अटल बिहारी वाजपेयी के रिश्ते की प्रकृति को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहसें भी हुईं. कुछ आलोचक और विश्लेषक यह मानते थे कि यह रिश्ता केवल गहरी दोस्ती और पारिवारिक नजदीकी थी, तो कुछ ने इसे संबंध से जोड़कर भी देखा, पर दोनों ने कभी इसे सार्वजनिक रूप से परिभाषित नहीं किया. राजकुमारी ने एकमात्र इंटरव्यू में स्पष्ट कहा कि उन्हें वाजपेयी से अपने रिश्ते के बारे में किसी से सफाई देने की जरूरत नहीं पड़ी, क्योंकि उनके रिश्ते में पारिवारिक सम्मान और आत्मीयता स्पष्ट थी.
राजनैतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया
यह रिश्ता भारतीय राजनीति में अपनी तरह का अनूठा उदाहरण था- जहां एक उच्च‑स्तरीय नेता और एक शिक्षित महिला के बीच नजदीकी संबंध को मीडिया और राजनीतिक आलोचक अलग‑अलग तरीकों से पेश करते रहे. आरएसएस जैसे संगठनों के भीतर भी समय‑समय पर इसे लेकर चर्चाएं होती रहीं, लेकिन वाजपेयी ने न कभी इसे सार्वजनिक मसला बनाया और न ही अपने राजनीतिक करियर से इससे दूरी बनाई.
परिवार की मजबूती और जीवन भर साथ
राजकुमारी कौल और अटल बिहारी वाजपेयी ने अपने बंधन को नाम से ऊपर रखकर जीवन भर निभाया. वाजपेयी की मौत के समय उनकी गोद ली हुई बेटी नमिता ने उनके अंतिम संस्कार के संस्कार में प्रमुख भूमिका निभाई थी, यह दर्शाता है कि यह रिश्ता केवल औपचारिक या सतही नहीं था.
उनके अंतिम वर्ष और विरासत
राजकुमारी कौल का निधन 2014 में हार्ट अटैक से हुआ था. उनके जाने के साथ उस अनूठी दोस्ती का भी एक युग समाप्त हो गया. वाजपेयी का निधन चार साल बाद, 2018 में हुआ, और उनके जीवन व राजनीतिक योगदान को देश ने बड़े सम्मान के साथ याद किया. अपनी निजी जिंदगी की अप्रकाशित परतों के बावजूद उनका महत्व भारतीय राजनीति में सदैव एक प्रेरणा के रूप में बना रहेगा.
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Source: IOCL






















