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Assembly Election 2026: बंगाल-तमिलनाडु नहीं इन विधानसभा चुनावों में भी हो चुकी है बंपर वोटिंग, देखें टॉप-5 राज्यों के नाम

Assembly Election 2026: साल 2026 के चुनावों में बंगाल और तमिलनाडु ने रिकॉर्ड तोड़ा है. वहीं कुछ और राज्य हैं, जहां बंपर मतदान हुआ, जो मतदाताओं की बढ़ती जागरूकता का प्रतीक है.

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  • पुडुचेरी, केरल, नागालैंड, त्रिपुरा में भी उच्च मतदान.

Assembly Election 2026: भारत के चुनावी इतिहास में वर्ष 2026 एक ऐसा अध्याय बनकर उभरा है, जिसे भविष्य में जनभागीदारी के सबसे सशक्त उदाहरण के तौर पर याद किया जाएगा. पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में हालिया विधानसभा चुनावों के दौरान जिस तरह से मतदाताओं ने घरों से निकलकर अपने मताधिकार का प्रयोग किया है, उसने न केवल राजनीतिक पंडितों को हैरान कर दिया है, बल्कि लोकतंत्र की जड़ों को और भी अधिक मजबूत कर दिया है. यह सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि उस बदलती जागरूकता का प्रतीक है, जो अब भारत के हर कोने में साफ देखी जा सकती है.

बंगाल में ऐतिहासिक जनसैलाब

पश्चिम बंगाल की 294 सीटों में से पहले चरण की 152 सीटों पर हुए मतदान ने सभी पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं. यहां 92.56 प्रतिशत का भारी मतदान दर्ज किया गया है, जो राज्य के चुनावी इतिहास में अभूतपूर्व है. इससे पहले 2011 में यहां 84.72 प्रतिशत वोटिंग हुई थी, लेकिन इस बार का उत्साह किसी बड़े बदलाव की आहट माना जा रहा है. सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि दशकों बाद राज्य में मतदान के दौरान हिंसा की खबरें न के बराबर रहीं, जिसे एक बड़े सुधार के तौर पर देखा जा रहा है.

तमिलनाडु में लोकतंत्र की नई इबारत

तमिलनाडु में भी कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला, जहां राज्य की सभी 234 विधानसभा सीटों पर जनता ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया. यहां 85.13 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जो कि आजादी के बाद का अब तक का उच्चतम आंकड़ा है. 2011 के 78.29 प्रतिशत के पिछले रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए तमिलनाडु के लोगों ने यह साबित कर दिया है कि वे अपनी सरकार चुनने में कितनी गंभीरता बरत रहे हैं. इस बंपर वोटिंग को सत्ता विरोधी लहर और जनता की सक्रिय भागीदारी के मेल के रूप में देखा जा रहा है.

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असम- इतिहास की सबसे बड़ी भागीदारी

असम के चुनावी सफर में 2026 का साल एक मील का पत्थर साबित हुआ है. पूर्वोत्तर के महत्वपूर्ण राज्य असम में भी चुनावी पारा अपने चरम पर रहा. यहां 85.91 प्रतिशत मतदान के साथ राज्य ने अपने इतिहास में सबसे अधिक वोटिंग का कीर्तिमान स्थापित किया है. मतदाताओं के इस भारी सैलाब ने राज्य के राजनीतिक समीकरणों को पूरी तरह से बदल कर रख दिया है. असम के विभिन्न क्षेत्रों में लोगों ने लंबी लाइनों में खड़े होकर अपने मताधिकार का उपयोग किया, जो वहां की राजनीतिक चेतना के उच्च स्तर को दर्शाता है.

पुडुचेरी में वोटिंग का जबरदस्त उत्साह

पुडुचेरी केंद्र शासित प्रदेश ने तो वोटिंग के मामले में लगभग शत-प्रतिशत के करीब पहुंचने का प्रयास किया है. साल 2026 में यहां की जनता ने 90 प्रतिशत मतदान करके देश के सामने एक मिसाल पेश की है. इतने छोटे से क्षेत्र में इतनी भारी संख्या में लोगों का मतदान केंद्रों तक पहुंचना यह बताता है कि स्थानीय मुद्दों के प्रति वहां की जनता कितनी संवेदनशील है. यह आंकड़ा न केवल पुडुचेरी के लिए बल्कि पूरे देश के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण है.

केरल का निरंतर चुनावी जोश

केरल, जो पहले से ही साक्षरता और जागरूकता के मामले में अव्वल रहा है, उसने इस बार भी अपनी साख कायम रखी है. 2026 में केरल में 78.27 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया है, जो कि 1987 के बाद का सबसे बड़ा आंकड़ा है. केरल की राजनीति हमेशा से दिलचस्प रही है, और वहां के मतदाताओं का यह अनुशासन बताता है कि उन्हें अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का सही इस्तेमाल करना बखूबी आता है. चुनावी सक्रियता के मामले में केरल ने एक बार फिर अपनी पहचान को और प्रगाढ़ किया है.

नागालैंड का शानदार प्रदर्शन

नागालैंड में 2023 के दौरान हुए चुनावों में भी वोटिंग का स्तर बहुत ऊंचा रहा था, जहां 85 प्रतिशत से अधिक मतदाताओं ने अपने अधिकार का प्रयोग किया था. नागालैंड की चुनावी प्रक्रिया में जनता का यह भारी समर्थन साबित करता है कि पूर्वोत्तर के राज्यों में लोकतंत्र की जड़ें कितनी गहरी हैं. कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और तमाम चुनौतियों के बावजूद लोगों का इतनी बड़ी तादाद में मतदान करना, राष्ट्र के प्रति उनकी अटूट निष्ठा और विश्वास का प्रतीक है.

त्रिपुरा की चुनावी सक्रियता

त्रिपुरा ने भी हालिया चुनावों में 86 प्रतिशत से अधिक मतदान दर्ज कर देश के शीर्ष चुनावी राज्यों में अपना नाम दर्ज कराया है. त्रिपुरा के मतदाताओं में हमेशा से ही राजनीतिक मुद्दों पर गहन चर्चा और भागीदारी का रुझान रहा है. 2023 के चुनावों में वहां का प्रदर्शन इस बात का गवाह है कि कैसे एक छोटा राज्य पूरे देश के लिए मतदान का मानक तय कर सकता है. वहां की जनता ने साबित किया है कि सही सरकार चुनने के लिए वे कितने जागरूक और प्रतिबद्ध हैं.

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About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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