फैक्टरी में कैसे बनती है सिलिकॉन चिप, जान लीजिए पूरा प्रोसेस
Silicon Chip Manufacturing: भारत में सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग को लेकर बड़े कदम उठाए जा रहे हैं. इसी बीच आइए जानते हैं कि सिलिकॉन चिप कैसे बनती है और इसे बनाने में कितना समय लगता है.

- सिलिका रेत से अत्यधिक शुद्ध सिलिकॉन निकालकर वेफर बनते हैं।
- फोटोलीथोग्राफी द्वारा वेफर पर जटिल सर्किट डिज़ाइन प्रिंट होते हैं।
- नक्काशी, डोपिंग से परतें बनतीं, फिर परीक्षण व पैकेजिंग होती।
Silicon Chip Manufacturing: भारत सेमीकंडक्टर विनिर्माण में बड़े विकास देख रहा है क्योंकि देश घरेलू चिप उद्योग बनाने के लिए काम कर रहा है. भारत सेमीकंडक्टर मिशन और हाल ही में स्वीकृत सेमीकॉन 2.0 योजना जैसी पहलों के जरिए से सरकार चिप डिजाइन, उपकरण निर्माण और आवश्यक सामग्रियों के उत्पादन पर ध्यान लगा रहा है. जैसे-जैसे सेमीकंडक्टर निर्माण का महत्व बढ़ रहा है यह समझना कि एडवांस्ड कारखाने के अंदर सिलिकॉन चिप्स का उत्पादन कैसे किया जाता है काफी जरूरी हो चुका है.
पूरी निर्माण प्रक्रिया में कितना समय लगता है?
सिलिकॉन चिप्स का निर्माण दुनिया की सबसे मुश्किल तकनीकी प्रक्रियाऊ में से एक है. उत्पादन खास सुविधाओं में होता है जिन्हें फेब्रिकेशन प्लांट या फिर फैब्स के रूप में जाना जाता है. यहां सूक्ष्म धूल के कण भी नाजुक सर्किट को नुकसान पहुंचा सकते हैं. इन सुविधाओं को सामान्य अस्पताल ऑपरेटिंग थियेटरों से कहीं ज्यादा साफ सफाई के स्तर पर बनाए रखा जाता है. इस पूरी निर्माण प्रक्रिया में कई हफ्ते लग सकते हैं.

रेत से सिलिकॉन निकालना
उत्पादन प्रक्रिया सिलिका रेत से शुरू होती है. इसे क्वार्ट्ज रेत भी कहा जाता है. इसमें सिलिकॉन डाइऑक्साइड होता है. काफी ज्यादा उच्च तापमान पर सामग्री को पिघलाकर सिलिकॉन निकाला जाता है. इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में इस्तेमाल के लिए सिलिकॉन को असाधारण रूप से उच्च शुद्धता स्तर प्राप्त करना होगा. यह लगभग 99.9999999% तक पहुंच जाएगा. यह काफी ज्यादा शुद्ध सिलिकॉन सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस की नींव बनाता है. यहां तक कि गैर जरूरी सामग्री की थोड़ी मात्रा भी अंतिम चिप के प्रदर्शन को प्रभावित कर सकती है.
सिलिकॉन सिल्लियां और वेफर्स बनाना
एक बार जब सिलिकॉन शुद्ध हो जाता है तो इसे पिघलाया जाता है और एक बड़े बेलनाकार ब्लॉक में बनाया जाता है जिसे पिंड कहते हैं. फिर इन सिल्लियों को सटीक हीरे की आरी का इस्तेमाल करके काफी पतली गोलाकार डिस्क में काटा जाता है.
डिस्क को वेफर्स के रूप में जाना जाता है. जब तक उनकी सतह असाधारण रूप से चिकनी, सपाट और परावर्तक नहीं हो जाती तब तक उन्हें व्यापक पॉलिशिंग से गुजरना पड़ता है. एक समान वेफर सतह जरूरी है क्योंकि बाद में इस पर मुश्किल इलेक्ट्रॉनिक सर्किट बनाए जाएंगे.
सर्किट डिजाइन को प्रिंट करना
के निर्माण में फोटोलिथोग्राफी काफी ज्यादा जरूरी चरणों में से एक है. फोटोरेसिस्ट नामक एक लाइट सेंसेटिव केमिकल वेफर की सतह पर समान रूप से लगाया जाता है. चिप का सर्किट डिजाइन जो ब्लूप्रिंट के रूप में काम करता है, को फिर अल्ट्रावायलेट लाइट का इस्तेमाल करके वेफर पर प्रोजेक्ट किया जाता है. उन्नत चिप विनिर्माण काफी ज्यादा छोटे और विस्तृत सर्किट पैटर्न बनाने के लिए एक्सट्रीम अल्ट्रावायलेट टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर सकता है. यह प्रक्रिया निर्माता को काफी ज्यादा परिशुद्धता के साथ मुश्किल डिजाइनों को वेफर पर बनाने में मदद करती है.

सिलिकॉन की नक्काशी और डोपिंग
अल्ट्रावॉयलेट लाइट के संपर्क में आने के बाद वेफर के चुनिंदा हिस्सों को नक्काशी के जरिए से हटा दिया जाता है. गैर जरूरी चीजों को खत्म करने और जरूरी सर्किट पैटर्न को उभारने के लिए रसायन या फिर गैस का इस्तेमाल किया जाता है.
इसके बाद वेफर डोपिंग से गुजरता है. यह एक प्रक्रिया है जिसका इस्तेमाल सिलिकॉन के विद्युत गुणों को कंट्रोल करने के लिए किया जाता है. डोपिंग के दौरान सिलिकॉन में बिजली के प्रवाह को बदलने के लिए आयनों को पेश किया जाता है. यह लाखों या फिर अरबों छोटे ट्रांजिस्टर बनाने में मदद करता है जो एक चिप के अंदर इलेक्ट्रॉनिक ऑन ऑफ स्विच के रूप में काम करते हैं.
परतों और तांबे के कनेक्शन का निर्माण
एडवांस्ड चिप्स का निर्माण कई चक्रों से गुजरता है. कुछ एडवांस्ड चिप्स में 30 से ज्यादा परतें होती हैं. हर परत में कुछ खास सर्किट पैटर्न होते हैं. तांबे या फिर एल्युमिनियम जैसी सामग्रियों से बनी काफी पतली कनेक्टिंग लाइन अलग-अलग घटकों और परतों को जोड़ती हैं. यह कनेक्शन विद्युत संकेतों को चिप के अंदर कई ट्रांजिस्टर और दूसरे तत्वों के बीच गुजरने में मदद करते हैं.
वेफर का परीक्षण और काटना
सर्किट बनने के बाद स्वचालित परीक्षण उपकरण वेफर पर व्यक्तिगत चिप अनुभागों की जांच करता है. सिस्टम दोषपूर्ण चीजों की पहचान करता है ताकि उन्हें चिह्नित किया जा सके और कार्यात्मक अनुभागों से अलग किया जा सके.
इसके बाद वेफर को एक सटीक हीरे की आरी का इस्तेमाल करके काटा जाता है. यह प्रक्रिया अलग-अलग चिप इकाइयों को अलग करती है. इन्हें डाई कहा जाता है. हर डाई में पहले के विनिर्माण चरण के दौरान बनाई गई सर्किट संरचना शामिल होती है.
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चिप की पैकेजिंग
आखिरी चरण पैकेजिंग है. नाजुक सिलिकॉन डाई को एक सुरक्षात्मक केस के अंदर रखा जाता है. यह प्लास्टिक या फिर सिरेमिक से बना हो सकता है. मेटल पिन या फिर कॉन्टैक्ट पैड पैकेज से जुड़े होते हैं ताकि चिप कंप्यूटर, स्मार्टफोन या फिर किसी दूसरी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के मदरबोर्ड से कनेक्ट हो सके.
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