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India China Conflict: क्या अरुणाचल को अपना बताने भर से चीन का हो जाएगा यह इलाका, कैसे कोई जमीन किसी देश की हो जाती है? 

India China Conflict: चीन अरुणाचल प्रदेश को दक्षिणी तिब्बत बताता है और पूरे तिब्बत के साथ अरुणाचल प्रदेश पर भी अपना दावा करता है और यहां की 90 हजार वर्ग किलोमीटर जमीन को अपना बताता है. 

Arunachal Pradesh India China Conflict: भारत और चीन के बीच लंबे समय से चला रहा सीमा विवाद एक बार फिर हरा हो गया है. अब चीन ने अरुणाचल प्रदेश को भारत का हिस्सा मानने से इनकार कर दिया, जवाब में भारतीय विदेश मंत्रालय ने भी चीन को खरी-खरी सुनाई है और अरुणाचल को लेकर रुख एकदम स्पष्ट कर दिया है. यह विवाद तब सामने आया, जब अरुणाचल प्रदेश की महिला प्रेमा वांगियोग थोंगडोक को शंघाई पुडोंग एयरपोर्ट पर चीनी इमिग्रेशन अधिकारियों द्वारा कई घंटों तक रोका गया. वजह सिर्फ इतनी थी कि प्रेमा अरुणाचल प्रदेश की रहने वाली थीं और उनके पास भारतीय पासपोर्ट था. 

इस विवाद के बाद चीन के विदेश मंत्रालय का बयान भी सामने आया, जिसमें कहा गया है कि चीन कभी भी अवैध तौर पर बसाए गए तथाकथित अरुणाचल प्रदेश को मान्यता नहीं देता. जवाब में भारत ने नाराजगी जताई और कहा है कि अरुणाचल प्रदेश बिना शक भारतीय इलाका है और इसके निवासियों को भारतीय पासपोर्ट रखने और उससे यात्रा करने का पूरा अधिकार है. 

बता दें, भारतीय चीन के बीच इस तरह का सीमा विवाद नया नहीं है. चीन इससे पहले भी पूर्वी लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश के कई जिलों को अपना बताने की हिमाकत कर चुका है. यहां तक कि चीन ने कई बार भारतीय इलाकों के नए नाम भी रखे हैं. हालांकि, भारत ने सभी दावों को पूरी तरह खारिज किया है. ऐसे में सवाल उठता है कि कोई जमीन का टुकड़ा किसी देश का कैसे हो जाता है, इसको लेकर नियम क्या हैं? और क्या अरुणाचल प्रदेश को अपना बताने भर से यह चीन का हो जाएगा? 
 
क्या है अरुणाचल प्रदेश पर विवाद?

सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि भारत और चीन के बीच अरुणाचल प्रदेश को लेकर विवाद क्या है? बता दें, भारत और चीन 3500 किलोमीटर लंबी सीमा को साझा करते हैं, जिसमें कई इलाकों को लेकर दोनों के बीच विवाद की स्थिति है, जिसे लंबे समय से सुलझाने का प्रयास किया जा रहा है. 1962 में भारत-चीन के बीच हुआ युद्ध भी सीमा विवाद के कारण हुआ था, इसके बाद भी दोनों देशों के बीच तनाव बना रहता है. जहां तक अरुणाचल प्रदेश की बात है तो चीन इसे दक्षिणी तिब्बत बताता है और पूरे तिब्बत के साथ अरुणाचल प्रदेश पर भी अपना दावा करता है और यहां की 90 हजार वर्ग किलोमीटर जमीन को अपना बताता है. 

क्या है अंतरराष्ट्रीय मापदंड?

भले ही चीन अरुणाचल प्रदेश को लेकर लंबे समय से अपना दावा ठोकता आया हो, लेकिन भारत का रुख एकदम स्पष्ट है. भारत सरकार का मानना है कि अरुणाचल पूरी तरह से भारत का हिस्सा है और इसकी संप्रभुता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा. इतना ही नहीं अरुणाचल प्रदेश को भारतीय हिस्सा मानते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय मान्यता भी मिली है. अंतरराष्ट्रीय मानचित्रों में भी अरुणाचल प्रदेश को भारत का हिस्सा माना गया है. 

कोई क्षेत्र किसी देश का कैसे हो जाता है?

इसके चार आधार होते हैं - ऐतिहासिक प्रमाण, कानूनी नियंत्रण, संधि व समझौते और अंतरराष्ट्रीय मान्यता. अब जहां तक अरुणाचल प्रदेश की बात है तो भारत के पक्ष में यह चारों आधार हैं. इसका ऐतिहासिक प्रमाण मैकमोहन रेखा है, जो अरुणाचल प्रदेश को भारत का हिस्सा बताती है. भारत इस रेखा को अंतिम सीमा मानता है, लेकिन चीन इसे अवैध मानता है. इसके बाद बात आती है कानूनी नियंत्रण की तो अरुणाचल प्रदेश पूरी तरह से भारतीय इलाका है, वहां का प्रशासन और कानून व्यवस्था भारत सरकार के हाथ में है. इसके अलावा अरुणाचल को लेकर किए गए संधि व समझौते भी भारतीय पक्ष में हैं. जहां तक अंतरराष्ट्रीय मान्यता की बात है तो दुनिया के कई देशों से लेकर संयुक्त राष्ट्र तक मैक मोहन रेखा को मान्यता देते हैं और अरुणाचल प्रदेश को भारतीय इलाका मानते हैं. ऐसे में स्पष्ट है कि किसी क्षेत्र पर दावा कर देने मात्र से वह उसका नहीं हो जाता है. इसके लिए कई तरह के प्रमाण की आवश्यकता होती है. 

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प्रांजुल श्रीवास्तव एबीपी न्यूज में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. फिलहाल फीचर डेस्क पर काम कर रहे प्रांजुल को पत्रकारिता में 9 साल तजुर्बा है. खबरों के साइड एंगल से लेकर पॉलिटिकल खबरें और एक्सप्लेनर पर उनकी पकड़ बेहतरीन है. लखनऊ के बाबा साहब भीम राव आंबेडकर विश्वविद्यालय से पत्रकारिता का 'क, ख, ग़' सीखने के बाद उन्होंने कई शहरों में रहकर रिपोर्टिंग की बारीकियों को समझा और अब मीडिया के डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़े हुए हैं. प्रांजुल का मानना है कि पाठक को बासी खबरों और बासी न्यूज एंगल से एलर्जी होती है, इसलिए जब तक उसे ताजातरीन खबरें और रोचक एंगल की खुराक न मिले, वह संतुष्ट नहीं होता. इसलिए हर खबर में नवाचार बेहद जरूरी है.

प्रांजुल श्रीवास्तव काम में परफेक्शन पर भरोसा रखते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता सिर्फ सूचनाओं को पहुंचाने का काम नहीं है, यह भी जरूरी है कि पाठक तक सही और सटीक खबर पहुंचे. इसलिए वह अपने हर टास्क को जिम्मेदारी के साथ शुरू और खत्म करते हैं. 

अलग अलग संस्थानों में काम कर चुके प्रांजुल को खाली समय में किताबें पढ़ने, कविताएं लिखने, घूमने और कुकिंग का भी शौक है. जब वह दफ्तर में नहीं होते तो वह किसी खूबसूरत लोकेशन पर किताबों और चाय के प्याले के साथ आपसे टकरा सकते हैं.

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