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Satellite Computer: क्या सैटेलाइट फोन की तरह‌ सैटेलाइट कंप्यूटर भी होते हैं, जानें कौन करता है इनका इस्तेमाल?

Satellite Computer: अक्सर ही लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि क्या सैटेलाइट फोन की तरह सैटेलाइट कंप्यूटर भी होते हैं. आइए जानते हैं क्या है इस सवाल का जवाब.

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  • कंप्यूटर को सैटेलाइट इंटरनेट से जोड़ने के लिए विशेष उपकरण चाहिए।
  • यह बिना मोबाइल टावर दूरस्थ स्थानों पर कनेक्टिविटी देता है।
  • अधिक लागत और उपकरण के कारण व्यक्तिगत उपयोग सीमित है।
  • सैन्य, आपदा राहत, समुद्री क्षेत्र मुख्य उपयोगकर्ता हैं।

Satellite Computer: सैटेलाइट फोन सीधे सैटेलाइट से बात करने के लिए बनाए जाते हैं. इससे यूजर्स ऐसी जगहों पर भी कॉल कर सकते हैं जहां पर मोबाइल टावर मौजूद नहीं होते. इससे अक्सर एक और बड़ा सवाल उठता है कि क्या ऐसे सैटेलाइट कंप्यूटर भी हैं जो इसी तरह से काम करते हैं? इसका जवाब है नहीं. लेकिन आम कंप्यूटर और लैपटॉप तब सैटेलाइट इनेबल्ड हो जाते हैं जब उन्हें खास टर्मिनल और मॉडेम का इस्तेमाल करके सैटलाइट इंटरनेट सिस्टम से जोड़ा जाता है. 

कंप्यूटर सैटेलाइट से कैसे कनेक्ट होते हैं? 

सैटेलाइट फोन के उलट जो इनबिल्ट हार्डवेयर का इस्तेमाल करके सीधे सैटेलाइट से बात करते हैं, कंप्यूटर के लिए अलग से इक्विपमेंट की जरूरत होती है. लैपटॉप या फिर डेस्कटॉप को सैटेलाइट मॉडेम और सैटेलाइट रिसीवर डिश या फिर टर्मिनल से जोड़ा जाता है. 

सैटेलाइट टर्मिनल पृथ्वी की परिक्रमा कर रहे सैटेलाइट से सिग्नल भेजता और प्राप्त करता है. इससे मोबाइल टावर या फिर फाइबर ऑप्टिक केबल पर निर्भर हुए बिना इंटरनेट और नेटवर्क कनेक्टिविटी मिलती है. एक बार कनेक्ट हो जाने के बाद कंप्यूटर किसी भी दूसरे इंटरनेट-इनेबल्ड डिवाइस की तरह काम करता है. बस फर्क यह है कि इसका कनेक्शन जमीनी नेटवर्क के बजाए सैटेलाइट के जरिए रूट किया जाता है.

इस तकनीक का इस्तेमाल क्यों नहीं किया जाता? 

हालांकि सैटलाइट इंटरनेट लगभग किसी भी जगह पर कनेक्टिविटी दे सकता है लेकिन यह आम ब्रॉडबैंड या फिर मोबाइल इंटरनेट के तुलना में काफी ज्यादा महंगा है. इसके लिए खास हार्डवेयर की भी जरूरत होती है. इसमें सैटेलाइट डिश, मॉडेम और कई मामलों में बिना रुकावट बिजली की सप्लाई शामिल हैं. ज्यादा लागत और इक्विपमेंट की जरूरत की वजह से सैटेलाइट कनेक्टेड कंप्यूटर आमतौर पर रोजमर्रा के पर्सनल इस्तेमाल के बजाय प्रोफेशनल, कमर्शियल और सरकारी कामों के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं. 

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कौन करता है इनका इस्तेमाल? 

मिलिट्री और डिफेंस फोर्स सैटेलाइट-बेस्ड कंप्यूटर नेटवर्क के सबसे बड़े यूजर्स में से एक हैं. ये सिस्टम बॉर्डर वाले इलाकों, संघर्ष वाले क्षेत्र और दूर दराज के मिलिट्री ठिकानों पर सुरक्षित कम्युनिकेशन, इंटेलिजेंस शेयरिंग और रियल टाइम डेटा ट्रांसफर को मुमकिन बनाते हैं, जहां आम नेटवर्क मौजूद नहीं हो सकता है या फिर सुरक्षित नहीं हो सकता. 

इसी के साथ आपदा राहत एजेंसी भी सैटेलाइट कम्युनिकेशन पर निर्भर होती हैं. बाढ़, भूकंप, चक्रवात या फिर दूसरी प्राकृतिक आपदाओं के समय मोबाइल टावर और फाइबर ऑप्टिक इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचता है. ऐसी स्थिति में नेशनल डिजास्टर रिस्पांस फोर्स जैसी संस्थाएं बचाव कार्यों में ताल मेल बिठाने के लिए सैटेलाइट इनेबल्ड कंप्यूटर का इस्तेमाल करती हैं.

वैज्ञानिक रिसर्च के लिए जरूरी 

समुद्री और एविएशन सेक्टर में सैटेलाइट से जुड़े कंप्यूटर का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाता है. बड़े कार्गो जहाज, क्रूज लाइनर और कमर्शियल हवाई जहाज जमीन पर मौजूद नेटवर्क से दूर यात्रा करते समय मौसम की जानकारी, नेविगेशन डेटा, ऑपरेशन से जुड़ी जानकारी और इमरजेंसी मैसेज के आदान-प्रदान के लिए सैटलाइट कम्युनिकेशन पर निर्भर होते हैं.

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स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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