Anti Defection Law: दुनिया के इन देशों में बहुत सख्त है दल-बदल कानून, पार्टी छोड़ते ही चली जाती है सदस्यता
Anti Defection Law: दुनिया के कई देशों में दल-बदल कानून बेहद सख्त हैं. बांग्लादेश, केन्या, सिंगापुर और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों में पार्टी छोड़ते ही सदस्यता स्वतः समाप्त हो जाती है. चलिए जानें.

- यूके, कनाडा में विशेष कानून नहीं, नैतिक निर्णय.
Anti Defection Law: लोकतंत्र में राजनीतिक दलों का महत्व सर्वोपरि है, लेकिन जब नेता निजी स्वार्थ या अवसरवाद या किसी भी वजह से रातों-रात अपनी पार्टी बदल लेते हैं, तो मतदाताओं के भरोसे को गहरा धक्का लगता है. भारत में हाल ही में आम आदमी पार्टी के सात राज्यसभा सांसदों के इस्तीफे ने एक बार फिर दल-बदल कानून की प्रासंगिकता पर बहस छेड़ दी है. दुनिया के अलग-अलग देशों में इस समस्या से निपटने के लिए बेहद कड़े कानून बनाए गए हैं, जहां नेता का पार्टी छोड़ना सीधे तौर पर उनकी सदस्यता के खात्मे का कारण बन जाता है.
बांग्लादेश
बांग्लादेश में दल-बदल को लेकर नियम दुनिया के सबसे सख्त कानूनों में से एक हैं. यहां का संविधान किसी भी जन प्रतिनिधि को पार्टी के खिलाफ बगावत करने की खुली छूट नहीं देता है. संविधान के अनुच्छेद 70 के अनुसार, यदि कोई सांसद अपनी पार्टी के विरुद्ध मतदान करता है या पार्टी बदलने का साहस करता है, तो उसे अपनी सदस्यता गंवानी पड़ सकती है. यहां का कानून राजनेताओं को पार्टी के अनुशासन में रहने के लिए बाध्य करता है, जिससे सदन की स्थिरता बनी रहती है.
केन्या
केन्या में दल-बदल विरोधी कानून का दायरा काफी विस्तृत है. वहां के संविधान का आर्टिकल 40 स्पष्ट रूप से उल्लेख करता है कि यदि कोई जन प्रतिनिधि अपनी मूल पार्टी का साथ छोड़ता है, तो उसे संसद की अपनी सीट खाली करनी अनिवार्य होगी. इसका फैसला स्पीकर द्वारा किया जाता है. हालांकि, सदस्य के पास हाई कोर्ट में अपील करने का कानूनी विकल्प होता है, लेकिन यह प्रक्रिया स्पष्ट संकेत देती है कि केन्या में राजनीतिक दल-बदल को केवल एक निजी निर्णय नहीं, बल्कि जनप्रतिनिधित्व का उल्लंघन माना जाता है.
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सिंगापुर
सिंगापुर में दल-बदल करना किसी भी नेता के लिए राजनीतिक अंत जैसा है. वहां के कानून के मुताबिक, यदि कोई सदस्य पार्टी छोड़ता है या उसे पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया जाता है, तो उसे अपनी सीट तुरंत प्रभाव से खाली करनी पड़ती है. संविधान के अनुच्छेद 46 के तहत, ऐसे सदस्यों की अयोग्यता का निर्णय संसद द्वारा लिया जाता है. सिंगापुर का यह सख्त कानून सुनिश्चित करता है कि कोई भी जनप्रतिनिधि पार्टी की विचारधारा के विपरीत जाकर अपनी कुर्सी सुरक्षित न रख सके.
दक्षिण अफ्रीका
दक्षिण अफ्रीका के संविधान का अनुच्छेद 47 दल-बदल करने वालों के लिए काल साबित होता है. वहां नियम इतना स्पष्ट है कि जैसे ही कोई सदस्य अपनी पार्टी छोड़ता है, सदन की उसकी सदस्यता स्वतः ही समाप्त हो जाती है. यह प्रणाली राजनीतिक स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए अपनाई गई है ताकि सांसदों का ध्यान दलबदल की राजनीति के बजाय जनसेवा और नीतिगत कार्यों पर केंद्रित रहे. वहां का सिस्टम राजनीतिक निष्ठा को कानूनी सुरक्षा प्रदान करता है.
यूनाइटेड किंगडम और कनाडा
यूके और कनाडा में स्थितियां भारत या बांग्लादेश जैसी सख्त नहीं हैं. वहां दलबदल विरोधी कोई विशेष कानून नहीं है, जैसा कि अमेरिका या यूरोप के अन्य हिस्सों में देखा जाता है. वहां 'क्रॉसिंग द फ्लोर' या 'क्रॉसिंग द लाइन' की परंपरा है, जहां सांसद अपनी सीट छोड़कर विपक्ष की तरफ बैठ सकते हैं. ब्रिटेन में इसे केवल एक राजनीतिक संकेत माना जाता है, न कि सदस्यता खत्म करने का आधार. वहां का लोकतंत्र आंतरिक चर्चाओं पर निर्भर है, जहां दल-बदल का मतलब सीट खोना नहीं होता, बल्कि एक नैतिक निर्णय के तौर पर देखा जाता है.
यूरोप का कड़ा नजरिया और लोकतंत्र की मर्यादा
यूरोप के अधिकांश देशों में दल-बदल को काफी गंभीरता से लिया जाता है. वहां कानून के दायरे में रहकर जनप्रतिनिधियों को अपनी पार्टी के प्रति वफादार रहने के लिए कड़े निर्देश दिए गए हैं. यदि कोई सदस्य पार्टी का साथ छोड़ता है, तो इसे देश के कानून और मतदाताओं के जनादेश का उल्लंघन माना जाता है. यूरोपीय देशों का मानना है कि पार्टी के नाम पर वोट मांगने वाले नेता को अपनी पार्टी बदलने का कोई नैतिक या कानूनी अधिकार नहीं है, और ऐसा करने पर सदस्यता समाप्त करना ही एकमात्र उपाय है.
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