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World Order if US leaves NATO: नाटो से अलग हुआ अमेरिका तो किसे होगा सबसे ज्यादा फायदा? समझें फैक्ट फाइल

World Order if US leaves NATO: अगर इस वैश्विक तनाव के बीच अमेरिका नाटो से बाहर निकल जाए तो आखिर किसको होगा फायदा, चलिए जानते हैं.

World Order if US leaves NATO: नाटो (NATO) संगठन की जड़ें हिलती नजर आ रही हैं, जैसे कि हाल ही में अमेरिका के राष्ट्रपति ने बयान दिया जिसमें उन्होंने एक संकेत दिया कि वह अमेरिका को नाटो से अलग करने की बात पर काफी ज्यादा विचार कर रहे हैं. अगर ऐसा हुआ तो नाटो जैसा महा-गठबंधन टूट जाएगा. नाराजगी का मुख्य कारण साथी देशों का ईरान के खिलाफ कुछ न बोलना है. ट्रंप को ऐसा लगता है कि अमेरिका नाटो देशों की सुरक्षा का भारी बोझ उठा रहा है, लेकिन जब अमेरिका को समर्थन की जरूरत होती है, तो ये देश पीछे हट जाते हैं. ट्रंप का मानना है कि नाटो अब उनके किसी काम का नहीं है, वह बस अमेरिका के संसाधनों का इस्तेमाल कर रहा है. अगर नाटो टूटा तो किसको होगा सबसे ज्यादा फायदा, आइए जानते हैं.

यूरोप के लिए चुनौती

अमेरिका के नाटो से अलग होने की संभावना यूरोपीय देशों के लिए बड़ा झटका साबित हो सकती है. नाटो की सुरक्षा व्यवस्था में अमेरिका की सैन्य शक्ति और परमाणु हथियार अहम भूमिका निभाते हैं. अगर अमेरिका हट जाता है, तो पूर्वी यूरोप के छोटे देश रूस के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला नहीं कर पाएंगे. फ्रांस और जर्मनी जैसे देशों को अपने रक्षा बजट को बढ़ाने और सेनाओं का पुनर्गठन करने की जरूरत होगी, जिससे यूरोप अस्थिर और असुरक्षित क्षेत्र बन जाएगा.

रूस के लिए सुनहरा अवसर

अमेरिका की गैरमौजूदगी रूस के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है. नाटो की सामूहिक सुरक्षा अमेरिकी सेना के हाथों में है, और जब वह हट जाएगी, तो रूस पूर्वी यूरोप में अपने प्रभाव को और मजबूत कर सकता है. पुतिन के लिए यह मौका है कि वह सोवियत संघ के पुराने गौरव को लौटाने के लिए अपनी सैन्य गतिविधियों को तेज कर सकता है. यूक्रेन पर इसका असर भी गहरा होगा, क्योंकि अमेरिका के बिना उसे मिलने वाली सैन्य और आर्थिक मदद भी काफी प्रभावित होगी.

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चीन के लिए फायदे

नाटो से अमेरिका का निकलना केवल यूरोप तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका असर प्रशांत और एशियाई देशों पर भी पड़ेगा. अमेरिका का ध्यान नाटो से हटते ही चीन अपनी विस्तारवादी नीतियों को तेजी से आगे बढ़ा सकेगा. ताइवान और दक्षिण चीन सागर में चीन की पकड़ मजबूत होगी और वैश्विक शक्ति संतुलन बदलकर बहुध्रुवीय की जगह रूस और चीन के प्रभाव वाली स्थिति बन सकती है.

भारत के लिए नए अवसर

यह वैश्विक बदलाव भारत के लिए भी सकारात्मक साबित हो सकता है. यूरोपीय देशों को अमेरिकी हथियारों पर निर्भरता कम करनी पड़ेगी और वे नया रक्षा साझेदार ढूंढेंगे. भारत अपनी 'मेक इन इंडिया' पहल के तहत किफायती और भरोसेमंद रक्षा समाधान पेश कर वैश्विक बाजार में अपनी स्थिति मजबूत कर सकता है. यह भारत के लिए वैश्विक डिफेंस मार्केट में अपनी जगह बनाने का महत्वपूर्ण अवसर हो सकता है.

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