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अल्लू अर्जुन तो पहले से जमानत पर थे, तो अब कोर्ट ने उन्हें कौन सी जमानत दे दी है? जान लीजिए अंतर 

हैदराबाद की नामपल्ली कोर्ट ने अल्लू अर्जुन को जो जमानत दी है, उसे नियमित या रेगुलर बेल कहते हैं. इससे पहले अल्लू अर्जुन अंतरिम जमानत पर बाहर थे. आइए जानते हैं दोनों में अंतर...

पुष्पा-2 की स्क्रीनिंग दौरान मची भगदड़ मामले में तेलुगु सुपरस्टार अल्लू अर्जुन को कोर्ट से जमानत मिल गई है. उन्हें शर्तों के तहत 50 हजार रुपये के दो जमानती पेश करने के साथ ही पुलिस स्टेशन में भी पेश होने का निर्देश दिया गया है. अब सवाल यह है कि अल्लु अर्जुन तो पहले से जमानत पर थे. ऐसे में अब उन्हें कोर्ट ने किस आधार पर और कौन सी जमानत दी है? दोनों जमानत में क्या अंतर होता है? बता दें, हैदराबाद की नामपल्ली कोर्ट ने अल्लू अर्जुन को जो जमानत दी है, उसे नियमित या रेगुलर बेल कहते हैं. इससे पहले अल्लू अर्जुन अंतरिम जमानत पर बाहर थे. आइए जानते हैं अंतर... 

अल्लू अर्जुन को मिली हुई थी अंतरिम जमानत

इससे पहले अल्लू अर्जुन को संध्या थियेटर में मची भगदड़ मामले में 13 दिसंबर को गिरफ्तार किया गया था. इस भगदड़ में एक महिला की मौत हो गई थी और उसका बेटा भी गंभीर रूप से घायल हुआ था. मामले में पुलिस ने एफआईआर दर्ज की थी. इसी एफआईआर के आधार पर अल्लू अर्जुन की गिरफ्तारी हुई थी, जिसको लेकर काफी हंगामा मचा था. हालांकि, कुछ ही घंटो बाद उन्हें तेलंगाना हाईकोर्ट से अंतरिम जमानत मिल गई थी. अब उन्हें नामापल्ली कोर्ट ने इस केस में रेगुलर जमानत दी है. 

क्या होती है अंतरिम जमानत?

अंतरिम जमानत एक छोटी अवधि के लिए दी जाती है. यह जमानत तब दी जाती है, जब रेगुलर बेल के लिए आवेदन लंबित होता है. अंतरिम जमानत कुछ शर्तों के साथ दी जाती है, जिन्हें संबंधित व्यक्ति को पूरा करना जरूरी होती है. अंतरिम जमानत की अवधि समाप्त होने के बाद आरोपी को बिना वारंट के भी गिरफ्तार किया जा सकता है. इस अवधि को कोर्ट द्वारा बढ़ाया भी जा सकता है. जब तक अंतरिम जमानत की अवधि लंबित है, उसकी गिरफ्तार नहीं की जा सकती. 

रेगुलर बेल क्या होती है?

रेगुलर बेल या फिर नियमित जमानत सशर्त दी जाती है. अदालत किसी भी व्यक्ति को इस आशय के साथ रिहा करता है कि जब भी आवश्यकता पड़ेगी तब व्यक्ति अदालत में पेश होगा. जब तक मामला लंबित है कोर्ट द्वारा तय की गई शर्तों को मानना आवश्यक होता है. साधारण शर्तों में यह किसी भी अभियुक्त की सशर्त रिहाई है. अल्लू अर्जुन को अब यही नियमित जमानत मिली है. 

अग्रिम जमानत क्या होती है?

अंतरिम और नियमित जमानत के अलावा होती है अग्रिम जमानत. जब किसी व्यक्ति को किसी अपराध में गिरफ्तारी की आशंका होती है तो वह कोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन कर सकता है. हालांकि, यह कोर्ट तय करता है कि उसे इस तरह की जमानत दी जाए या नहीं. यह एक तरह से गिरफ्तारी से संरक्षण होता है.  

यह भी पढ़ें: 14 से 20 साल में कैसे रिहा हो जाते हैं उम्रकैद की सजा पाए कैदी, फिर इसे क्यों कहते हैं आजीवन कारावास?

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