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क्या होते हैं डिप्टी सीएम के अंतिम संस्कार के नियम, क्या कोई भी हो सकता है शामिल?

संवैधानिक रूप से उपमुख्यमंत्री का पद कैबिनेट मंत्री के बराबर माना जाता है. ऐसे में उन्हें राजकीय सम्मान देना पूरी तरह से राज्य सरकार और मुख्यमंत्री के विवेक पर निर्भर करता है. 

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार का आज बुधवार सुबह एक दर्दनाक विमान हादसे में निधन हो गया है. उनका चार्टर प्लेन बारामती एयरपोर्ट पर लैंडिंग के दौरान क्रैश हो गया, जिसमें उनके साथ सवार सभी लोगों की जान चली गई. इस दुखद खबर के बाद राज्य में तीन दिवसीय राजकीय शोक की घोषणा की गई है और कल उनका अंतिम संस्कार बारामती के काटेवाड़ी गांव में किया जाएगा. इस घटना के बाद अब चर्चा इस बात की है कि एक उपमुख्यमंत्री के अंतिम विदाई के प्रोटोकॉल क्या होते हैं और क्या इसमें आम जनता भी शामिल हो सकती है. चलिए अब आपको बताते हैं कि डिप्टी सीएम के अंतिम संस्कार के नियम क्या होते हैं और क्या कोई भी उनके अंतिम संस्कार में शामिल हो सकता है. 

उप मुख्यमंत्री के लिए क्या है आधिकारिक प्रोटोकॉल?

भारत में संवैधानिक पदों पर आसीन व्यक्तियों के निधन के बाद अंतिम विदाई के नियम काफी स्पष्ट है. गृह मंत्रालय के स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल के अनुसार, राजकीय सम्मान केवल राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, पूर्व राष्ट्रपति और राज्यपालों के लिए अनिवार्य है. वहीं संवैधानिक रूप से उपमुख्यमंत्री का पद कैबिनेट मंत्री के बराबर माना जाता है. ऐसे में उन्हें राजकीय सम्मान देना पूरी तरह से राज्य सरकार और मुख्यमंत्री के विवेक पर निर्भर करता है. 

राजकीय सम्मान और तिरंगे का नियम 

राजकीय सम्मान मिलने पर ही पार्थिव शरीर को राष्ट्रीय ध्वज में लपेटा जा सकता है. भारतीय ध्वज संहिता 2002 के तहत इसका पालन करना अनिवार्य है. बिना आधिकारिक आदेश के तिरंगे का इस्तेमाल कानून का उल्लंघन माना जाता है. इसके अलावा राज्य पुलिस या सैनिक  टुकड़ी की ओर से गार्ड ऑफ ऑनर दिया जाता है. वहीं औपचारिक रूप से बंदूक की सलामी दी जाती है, जो राजकीय विदाई का मुख्य हिस्सा है. वहीं राजकीय शोक के दौरान सरकारी इमारतों पर झंडा झुका रहता है और आधिकारिक मनोरंजन कार्यक्रम रद्द कर दिए जाते हैं. 

महाराष्ट्र का विशिष्ट प्रोटोकॉल 

महाराष्ट्र में एक पुरानी परंपरा रही है कि राज्य के विकास में बड़ा योगदान देने वाले नेताओं को, चाहे वे अनिवार्य कैटेगरी में न भी आते हों, राजकीय सम्मान दिया जाता है. अजित पवार के मामले में भी राज्य के प्रोटोकॉल विभाग ने पूरी तैयारी कर ली है, ताकि स्थापित मानदंडों के अनुसार गरिमापूर्ण विदाई सुनिश्चित की जा सके. 

क्या कोई भी शामिल हो सकता है डिप्टी सीएम के अंतिम संस्कार में?

आमतौर पर राजकीय अंतिम संस्कार में प्रशासन की ओर व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की जाती है. अंतिम संस्कार की पूरी व्यवस्था राज्य प्रशासन संभालता है, जिसमें परिवार के साथ समन्वय किया जाता है. ऐसे में समर्थक और जनता अंतिम दर्शन कर सकते हैं. लेकिन सुरक्षा और प्रोटाेकॉल के चलते श्मशान घाट या अंतिम संस्कार स्थल पर प्रवेश को सीमित किया जा सकता है. 

ये भी पढ़ें-Ajit Pawar Death: जिस घड़ी से हुई अजित पवार के शव की पहचान, वह किस कंपनी की, कितनी है उसकी कीमत?

कविता गाडरी बीते कुछ साल से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता की दुनिया से जुड़ी हुई है. राजस्थान के जयपुर से ताल्लुक रखने वाली कविता ने अपनी पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय भोपाल से न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी में मास्टर्स और अपेक्स यूनिवर्सिटी जयपुर से बैचलर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में की है. 
पत्रकारिता में अपना सफर उन्होंने राजस्थान पत्रिका से शुरू किया जहां उन्होंने नेशनल एडिशन और सप्लीमेंट्स जैसे करियर की उड़ान और शी न्यूज के लिए बाय लाइन स्टोरी लिखी. इसी दौरान उन्हें हेलो डॉक्टर शो पर काम करने का मौका मिला. जिसने उन्हें न्यूज़ प्रोडक्शन के लिए नए अनुभव दिए. 

इसके बाद उन्होंने एबीपी नेटवर्क नोएडा का रुख किया. यहां बतौर कंटेंट राइटर उन्होंने लाइफस्टाइल, करंट अफेयर्स और ट्रेडिंग विषयों पर स्टोरीज लिखी. साथ ही वह कंटेंट मैनेजमेंट सिस्टम और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी लगातार सक्रिय रही. कविता गाडरी हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में दक्ष हैं. न्यूज़ राइटिंग रिसर्च बेस्ड स्टोरीटेलिंग और मल्टीमीडिया कंटेंट क्रिएशन उनकी खासियत है. वर्तमान में वह एबीपी लाइव से जुड़ी है जहां विभिन्न विषयों पर ऐसी स्‍टोरीज लिखती है जो पाठकों को नई जानकारी देती है और उनके रोजमर्रा के जीवन से सीधे जुड़ती है.

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