कहां से आया रेड कारपेट कल्चर, पहली बार किसके लिए बिछाया गया था इसे?
बड़े नेताओं और खास मेहमानों के स्वागत में बिछने वाले रेड कारपेट को बेहद खास माना जाता है, लेकिन क्या आप जानतें है रेड कारपेट कल्चर कहां से आया और इसका इतिहास कितना पुराना है?

किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयजित शंघाई सहयोग संगठन समिट में दुनिया के कई बड़े नेता एक ही मंच पर नजर आए. ऐसे हाई-प्रोफाइल अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में नेताओं के औपचारिक स्वागत और आगमन के दौरान नजर आने वाला रेड कारपेट सिर्फ सजावट नहीं, बल्कि सम्मान और खास दर्जे का प्रतीक माना जाता है. ऐसे में क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर रेड कारपेट की यह परंपरा शुरू कहां से हुई और सबसे पहले इसे किसके लिए बिछाया गया था? आइए जानते हैं रेड कारपेट कल्चर का इतिहास.
हजारों साल पुरानी है रेड कारपेट कहानी
आज रेड कारपेट का नाम लेते ही दिमाग में हॉलीवुड, फिल्म स्टार्स और अवॉर्ड समारोह आते हैं. असल में इसकी शुरूआत प्राचिन समय में हुई थी. रेड कारपेट के बारे में सबसे पहले साहित्यिक उल्लेख 458 ईसा पूर्व में लिखे गए प्राचीन यूनानी नाटक Agamemnon में पता चलता है. इसे मशहूर ग्रीक नाटककार Aeschylus ने लिखा था. नाटक में ट्रॉय युद्ध से जीतकर लौटे राजा अगामेमनन के स्वागत के लिए उनकी पत्नी क्लाइटेमनेस्ट्रा एक लाल रंग की भव्य राह बिछाती है.
स्वागत के लिए बिछाया गया था रेड कारपेट
कहानी में क्लाइटेमनेस्ट्रा अपने पति अगामेमनन का भव्य स्वागत करती है और उनके घर तक पहुंचने के लिए लाल रंग की कालीननुमा राह बिछवाती है. इस स्वागत के पीछे सिर्फ सम्मान नहीं था, इतनी भव्य राह पर चलना उस समय देवताओं के लिए उपयुक्त माना जाता था. यहीं से रेड कारपेट का एक महत्वपूर्ण अर्थ सामने आता है कि सामान्य लोगों से अलग किसी व्यक्ति को विशेष सम्मान देने के लिए इसका उपयोग किया जाता है. हालांकि यह उल्लेख केवल एक नाटक में है.
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जेम्स मोनरो के लिए भी बिछाया गया था रेड कारपेट
आधिकारिक तौर पर रेड कारपेट 1821 में अमेरिका के राष्ट्रपति जेम्स मोनरो के स्वागत में बिछाया गया था. बाद में 19वीं और 20वीं सदी में रेड कारपेट का चलन शाही कार्यक्रमों और औपचारिक आयोजनों में आम हो गया. रेड कार्पेट को वैश्निक स्तर पर पहचान अभिनेता और ग्लैमर से जुड़ने के बाद मिली. खासकर ऑस्कर जैसे कार्यक्रमों से यह काफी लोकप्रिय हो गया.
लाल रंग ही क्यों?
दरअसल, प्राचीन समय से ही लाल रंग को संपन्नता, सम्मान और राजसी वैभव से जोड़कर देखा जाता है. वहीं पूराने समय में लाल रंग को तैयार करना उतना आसान नहीं होता था, जिससे इसे केवल खास और विशेष लोगों के लिए ही तैयार किया जाता था. ऐसे में आम लोगो के लिए इसे पाना मुश्किल होता था.
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