भारत ही नहीं, अमेरिका में भी वोटर लिस्ट की गलतियां; कैसे हुईं हजारों एंट्री?
अमेरिका में सॉफ्टवेयर की तकनीकी कमियों के कारण पिछले दो दशकों में तीस हजार से अधिक गैर-नागरिकों के नाम वोटर लिस्ट में जुड़ गए, जिससे चुनावी प्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं.

भारत की तरह से अमेरिका में भी मतदाता सूचियों में गंभीर गड़बड़ियों और तकनीकी खामियों का सनसनीखेज मामला सामने आया था. आधिकारिक दस्तावेजों और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले दो दशकों में अमेरिका के अलग-अलग राज्यों में ड्राइविंग लाइसेंस और सरकारी पहचान पत्र बनवाने के दौरान साफ्टवेयर की तकनीकी त्रुटियों तथा दफ्तर की मामूली गलतियों के कारण तीस हजार से अधिक ऐसे लोगों के नाम मतदाता सूची में जुड़ गए, जिन्होंने खुद को गैर-नागरिक घोषित किया था. इस खुलासे ने दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के गढ़ वाले राज्यों की चुनाव प्रणालियों की पोल खोल दी है, जिससे प्रशासनिक तंत्र की कार्यशैली पर बड़े सवाल खड़े हो गए.
सॉफ्टवेयर की तकनीकी खामियां और दस्तावेजों की भूल
अमेरिका के विभिन्न राज्यों में मतदाता पंजीकरण प्रणाली के भीतर सॉफ्टवेयर के काम करने के तरीकों में बड़ी तकनीकी खामियां पाई गई हैं. जब कोई भी व्यक्ति ड्राइविंग लाइसेंस या राज्य का आईडी कार्ड बनवाने के लिए आवेदन करता है, तो उसे अपनी नागरिकता से जुड़ा कॉलम भरना होता है. इसके बावजूद तकनीकी गड़बड़ियों के कारण गैर-नागरिकों के नाम भी वोटर लिस्ट का हिस्सा बन गए. अधिकारियों के अनुसार, ये गड़बड़ियां किसी सोची-समझी साजिश का हिस्सा नहीं थीं, बल्कि प्रशासनिक और तकनीकी स्तर पर हुई अनजाने में की गई गलतियों का परिणाम थीं, जिन्हें समय रहते सुधारा नहीं जा सका.
एक दर्जन राज्यों में सामने आए गड़बड़ी के मामले
रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस प्रकार की प्रशासनिक चूक का असर अमेरिका के एक दर्जन से अधिक राज्यों में देखने को मिला है. इनमें डेमोक्रेट्स के प्रभाव वाले राज्यों के साथ-साथ रिपब्लिकन पार्टी के मजबूत गढ़ माने जाने वाले इलाके भी शामिल हैं. कैलिफोर्निया, इलिनोइस, आयोवा, नेवादा, ओहियो, ओरेगन, पेनसिल्वेनिया, दक्षिण डकोटा, टेक्सास, यूटा और वर्जीनिया जैसे प्रमुख राज्यों में इस तरह की गलतियों की पुष्टि की गई है, जिससे यह साफ होता है कि यह समस्या किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं थी.
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न्यू जर्सी में उजागर हुआ बड़ा मामला
इस कड़ी का सबसे ताजा और चर्चित मामला इस साल गर्मियों में न्यू जर्सी राज्य से सामने आया था. वहां के प्रशासन ने खुद इस बात का खुलासा किया था कि एक तकनीकी सॉफ्टवेयर गड़बड़ी की वजह से जून 2023 से जून 2024 के बीच लगभग 6,600 ऐसे गैर-नागरिकों के नाम वोटर लिस्ट में जुड़ गए थे, जिन्होंने आवेदन पत्र भरते समय नागरिकता वाले सवाल के जवाब में स्पष्ट रूप से 'नहीं' यानी नो लिखा था. इस बड़ी तकनीकी भूल के सामने आने के बाद पूरे देश में चुनावी सॉफ्टवेयर और डेटा प्रोसेसिंग की सुरक्षा को लेकर बहस छिड़ गई है.
चुनाव परिणामों पर कितना पड़ा है इसका असर?
भले ही तकनीकी गलतियों के कारण तीस हजार से ज्यादा नाम गलत तरीके से सूची में जुड़े हों, लेकिन देश के कुल 17 करोड़ से अधिक पंजीकृत मतदाताओं के मुकाबले यह आंकड़ा बेहद छोटा है. रिपोर्ट्स की मानें तो यह संख्या इतनी कम है कि इससे देश के आम चुनावों के परिणामों पर कोई भी बड़ा असर पड़ने की संभावना नहीं है. इसके अलावा, जांच एजेंसियों और अधिकारियों के पास इस बात के पुख्ता आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं कि इनमें से वास्तव में कितने गैर-नागरिकों ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल करके वोट डाला था.

राजनीतिक बयानबाजी और नागरिकता के सबूत की मांग
इस पूरे प्रकरण को लेकर अमेरिका की राजनीति में जोरदार सरगर्मी तेज हो गई है. पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और उनके समर्थकों का दावा है कि गैर-नागरिकों द्वारा मतदान किया जाना एक बहुत बड़ी समस्या है और यह विपक्षी डेमोक्रेट्स पार्टी की एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा है ताकि वे आगामी चुनावों में फायदा उठा सकें. इस घटना का हवाला देते हुए ट्रंप समर्थक लगातार सांसदों पर दबाव बना रहे हैं कि मतदाता पंजीकरण के नियमों को बेहद सख्त किया जाए और पंजीकरण के वक्त नागरिकता का पक्का सबूत दिखाना अनिवार्य कर दिया जाए.
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