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Meat Ads Ban: दुनिया के इन 50 शहरों में है मीट से बनी चीजों के विज्ञापन पर बैन, जानें क्यों लगाई गई रोक?

Meat Ads Ban: दुनिया भर में जलवायु परिवर्तन को रोकने के लिए अनोखे कदम उठाए जा रहे हैं. आइए जानते हैं कि दुनिया के किन 50 शहरों ने मांस के विज्ञापन पर प्रतिबंध लगा दिया है.

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  • जलवायु परिवर्तन से लड़ने कई शहर मांस विज्ञापनों पर रोक लगा रहे हैं।
  • मांस उत्पादन से ग्रीनहाउस गैसें पर्यावरण को गंभीर रूप से प्रभावित करती हैं।
  • नीदरलैंड के शहर मांस विज्ञापन प्रतिबंधों में अग्रणी बने हैं।
  • यह प्रतिबंध मांस से आगे बढ़कर वैश्विक स्तर पर फैल रहे हैं।

Meat Ads Ban: दुनिया भर में ज्यादा से ज्यादा शहर जलवायु परिवर्तन से लड़ने के लिए कुछ अनोखे कदम उठा रहे हैं. यूरोप, उत्तरी अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और एशिया के 50 से ज्यादा शहर होने मांस से बने उत्पादों का प्रचार करने वाले सार्वजनिक विज्ञापनों पर या तो रोक लगा दी है या फिर उन्हें सीमित कर दिया है. खास बात यह है कि शहरों ने मांस की  बिक्री या फिर उसके सेवन पर रोक नहीं लगाई है. इसके बजाय यह पाबंदी उन विज्ञापनों पर लागू होती हैं जो बर्गर, फ्राइड चिकन, सॉसेज, नगेट्स और दूसरे ज्यादा कार्बन वाले खाद्य पदार्थों का प्रचार करते हैं.

मांस के विज्ञापनों पर रोक क्यों लगाई जा रही है?

इन पाबंदियों के पीछे मुख्य वजह मांस उत्पादन से पर्यावरण पर पड़ने वाला असर है. वैज्ञानिक और पर्यावरण संगठन बार-बार इस बात को दोहरा रहे हैं कि पशुपालन खासकर बीफ और पोर्क का उत्पादन मीथेन और कार्बन डाइऑक्साइड जैसी बड़ी मात्रा में ग्रीन हाउस गैस पैदा करता है. ये उत्सर्जन ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन में योगदान देते हैं. 

हरियाली भरी जीवन शैली को बढ़ावा देना 

कई शहर प्रशासन विज्ञापनों पर लगाई गई पाबंदियों को पर्यावरण के अनुकूल जीवन शैली को बढ़ावा देने का बड़ा प्रयास मान रहे हैं. जिस तरह कुछ सरकार विज्ञापन पर नियम बनाकर तंबाकू के इस्तेमाल को हतोत्साहित करती हैं इस तरह ये शहर उम्मीद करते हैं कि मांस के विज्ञापनों को कम दिखाने से वहां के निवासी पेड़ पौधों से मिलने वाले भोजन के ज्यादा विकल्पों को आजमाने के लिए प्रेरित होंगे.

एमस्टरडैम का लक्ष्य 

आपको बता दें की मांस के विज्ञापनों पर सार्वजनिक रोक लगाने के मामले में दुनिया का पहला शहर हार्लेम है जो नीदरलैंड्स का है. इसी के साथ मांस के विज्ञापनों पर प्रतिबंध लगाने वाली दुनिया की पहली राजधानी नीदरलैंड की राजधानी एमस्टरडैम ही है. एमस्टरडैम का लक्ष्य है कि 2050 तक वहां के कम से कम 50% निवासियों के भोजन में पेड़ पौधों से मिलने वाले खाद्य पदार्थ शामिल हों. 

पाबंदियां सिर्फ मांस तक सीमित नहीं 

यह मुहिम सिर्फ खाने-पीने के विज्ञापनों तक सीमित नहीं है. कई शहरों ने जीवाश्म ईंधन से चलने वाले वाहन, हवाई यात्रा, क्रूज छुट्टी और दूसरी ऐसी गतिविधियों का प्रचार करने वाले विज्ञापनों पर भी पाबंदियां लगाई हैं जिन्हें ज्यादा कार्बन उत्सर्जन वाला माना जाता है. 

नीदरलैंड इस मुहिम में सबसे आगे 

नीदरलैंड इस पहल का वैश्विक केंद्र बनाकर उभरा है.  एमस्टरडैम, हार्लेम, यूट्रेक्ट, निजमेगन, द हेग, अल्मेरे, ज्वोल, ब्लोमेंडाल और लीडेन जैसे शहरों ने या तो मांस के विज्ञापनों पर पाबंदियां लगाई हैं या फिर सार्वजनिक जगहों पर ज्यादा कार्बन वाले उत्पादों के प्रचार को कम करने वाली नीतियों का समर्थन किया है.

दुनिया भर के शहर इस मुहिम में शामिल 

यह मुहिम यूरोप से भी काफी आगे तक फैल चुकी है. अमेरिका में लॉस एंजिल्स, वेस्ट हॉलीवुड, कैम्ब्रिज, सोमरविले, होबोकेन, बॉयंटन बीच और बर्कले जैसे शहरों ने इस तरह की पहलों का समर्थन किया है. यूनाइटेड किंगडम में एडिनबर्ग, बेलफास्ट, शेफील्ड, नॉर्विच, लैम्बेथ, एक्समाउथ और हेवर्ड्स हीथ जैसे शहरों से समर्थन मिला है.

भारत में, उदयपुर, गोपालपुर, ठाणे, अमरावती, राजकोट, जामनगर, मुंद्रा, भुज, भुजपुर और गांधीनगर जैसे शहरों ने जलवायु सुरक्षा की कोशिशों के तहत प्लांट बेस्ड ट्रीटी का समर्थन किया है. इसी के साथ कनाडा, स्पेन, पुर्तगाल, ऑस्ट्रेलिया, स्वीडन, फ्रांस, युगांडा, गाम्बिया और मेक्सिको के शहरों से भी इसी तरह का समर्थन मिला है.

यह भी पढ़ेंः भारतीय नोट पर महात्मा गांधी की तस्वीर लगाने का किसने लिया था फैसला, जानें क्या‌ था इसका इतिहास?

स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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