AAP MP: कौन था आम आदमी पार्टी का पहला राज्यसभा सांसद, जानें अब पार्टी में कितने सांसद बचे?
AAP MP: आम आदमी पार्टी के सात राज्यसभा सांसद भाजपा में शामिल हो गए हैं. आइए जानते हैं कौन था आम आदमी पार्टी का पहला राज्यसभा सांसद.

- 2018 में AAP ने तीन राज्यसभा सांसद भेजे थे, यह बड़ी उपलब्धि थी।
- अब राघव चड्ढा समेत सात सांसद AAP छोड़कर BJP में शामिल हुए।
- इस दलबदल से AAP के अब सिर्फ तीन सांसद बचे हैं।
- नेतृत्व परिवर्तन और पार्टी सिद्धांतों पर मतभेद के कारण हुई फूट।
AAP MP: आम आदमी पार्टी ने 2018 में राज्यसभा में एंट्री की थी. यह उसके राष्ट्रीय राजनीतिक विस्तार में एक अहम पड़ाव था. उस समय पार्टी ने दिल्ली से तीन नेताओं संजय सिंह, सुशील कुमार गुप्ता और एन.डी. गुप्ता को ऊपरी सदन में भेजा था. इस पल को आम आदमी पार्टी के लिए एक अहम कदम माना गया था. लेकिन आज राघव चड्ढा समेत सात राज्यसभा सांसद भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए हैं.
राज्यसभा में आम आदमी पार्टी का पहला प्रतिनिधित्व
जब 2018 में आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा की अपनी पहली सीटें हासिल की तो यह पार्टी के बढ़ते राजनीतिक प्रभाव का संकेत था. तीनों सांसदों में से संजय सिंह संसद में पार्टी के सबसे मुखर और चर्चित प्रतिनिधियों में से एक के तौर पर तेजी से उभरे. उनकी मौजूदगी ने आम आदमी पार्टी को राष्ट्रीय मुद्दा उठाने और खुद को एक अहम विपक्षी आवाज के तौर पर स्थापित करने में मदद की.
एक बड़ा राजनीतिक उथल-पुथल
आज पार्टी को एक बड़ा झटका लगा है. एक बड़ी फूट ने राज्यसभा में उनकी ताकत को कम कर दिया है. राघव चड्ढा की अगुवाई में सात सांसदों ने आम आदमी पार्टी छोड़ दी और भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए. इस बड़े पैमाने पर हुए दलबदल ने पार्टी की संसदीय स्थिति को पूरी तरह से बदल दिया.
पार्टी किसने छोड़ी?
जिन नेताओं ने पार्टी छोड़ी उनमें राघव चड्ढा, स्वाति मालीवाल, हरभजन सिंह, संदीप पाठक, अशोक मित्तल, राजेंद्र गुप्ता और विक्रमजीत सिंह साहनी शामिल हैं. उनके इस फैसले को दलबदल विरोधी कानून के प्रावधानों का समर्थन मिला था. यह इस तरह के विलय की इजाजत देता है. बस शर्त यह है कि किसी पार्टी के दो तिहाई सांसद एक साथ पार्टी बदलें.
अब आम आदमी पार्टी में कितने सांसद बचे हैं?
इस बड़े पैमाने पर हुए दलबदल के बाद अब आम आदमी पार्टी के राज्यसभा में सिर्फ तीन सांसद बचे हैं. इनमें संजय सिंह, एन.डी. गुप्ता और बलबीर सिंह सीचेवाल शामिल हैं.
यह फूट अचानक नहीं हुई थी. राघव चड्ढा को हाल ही में राज्यसभा में उपनेता के पद से हटा दिया गया था. उनकी जगह अशोक मित्तल को नियुक्त कर दिया गया था. इसके साथ ही चड्ढा और अन्य नेताओं ने पार्टी पर अपने मूल सिद्धांतों से भटकने का आरोप लगाया और पार्टी के अंदर गहरे मतभेद और असंतोष की तरफ इशारा किया.
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