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खतरनाक साबित हो रही अंतरिक्ष की दौड़! रॉकेट लॉन्च से पतली हो रही ओजोन परत- रिसर्च

Rocket Launches: एक नए रिसर्च से पता चलता है कि रॉकेट प्रक्षेपण में तेजी से वृद्धि होने से ओजोन परत को नुकसान पहुंचेगा. हर साल दुनिया भर में सैकड़ों रॉकेट प्रक्षेपित किए जाते हैं.

Ozone Layer: अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष उद्योग विकास की राह पर है, लेकिन नए रिसर्च से पता चलता है कि रॉकेट प्रक्षेपण में तेजी से वृद्धि होने से ओजोन परत को नुकसान पहुंचेगा. हर साल दुनिया भर में सैकड़ों रॉकेट प्रक्षेपित किए जाते हैं, जिनमें से कई वाणिज्यिक कंपनियों और राष्ट्र-राज्य अंतरिक्ष कार्यक्रमों के तहत अंतरिक्ष में भेजे जाते हैं. ये लगभग 20 जगहों पर प्रक्षेपित किए जाते हैं, लगभग सभी उत्तरी गोलार्ध में, और वर्तमान में सबसे ज़्यादा प्रक्षेपण दर अमेरिका, चीन, न्यूज़ीलैंड और रूस से हैं.

हमारा नवीनतम रिसर्च उस महत्वपूर्ण बिंदु का पता लगाता है जब ज्यादा रॉकेट प्रक्षेपण करने से समस्याएँ पैदा होने लगेंगी. हमारे निष्कर्ष बताते हैं कि एक बार जब दरें प्रति साल 2,000 प्रक्षेपण तक पहुँच जाएंगी - जो पिछले साल की तुलना में लगभग दस गुना वृद्धि है - तो ओजोन परत में वर्तमान में हो रहा सुधार धीमा पड़ जाएगा. हमारा तर्क है कि सावधानी से हम भविष्य के इस नुकसान से बच सकते हैं. उद्योग विकास के आर्थिक लाभ प्राप्त किए जा सकते हैं, लेकिन इसके लिए सामूहिक प्रयास की आवश्यकता होगी.

रॉकेट प्रक्षेपण से ओजोन परत पतली हुई

ओजोन परत पृथ्वी पर जीवन को हानिकारक सौर पराबैंगनी (यूवी) किरणों से बचाती है. मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल के तहत वैश्विक सहकारी समझौतों की बदौलत यह पिछली सदी में उत्सर्जित क्लोरोफ्लोरोकार्बन और अन्य हानिकारक रसायनों के प्रभावों से धीरे-धीरे ठीक हो रही है.

रॉकेटों द्वारा वायुमंडल में प्रवेश करने पर उत्सर्जित गैसों और कणों से ओजोन परत पतली होती है. अब तक, वे ओजोन परत को बहुत ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचाते हैं, क्योंकि हर साल अपेक्षाकृत कम प्रक्षेपण होते हैं.

प्रक्षेपण लगातार बढ़ रहे हैं

हालांकि, प्रक्षेपण लगातार बढ़ रहे हैं. 2019 में 102 प्रक्षेपण हुए. 2024 तक, दुनिया भर में प्रक्षेपणों की संख्या 258 हो जाएगी. 2025 में और भी ज़्यादा प्रक्षेपण होने की उम्मीद है. अमेरिका आधारित प्रक्षेपणों के लिए, 2023 में प्रक्षेपित रॉकेटों की संख्या में 2028 तक तीन गुना वृद्धि होने की उम्मीद है.

इस वृद्धि का एक कारण पृथ्वी की कक्षा में कम ऊंचाई पर स्थित हजारों इकाइयों के उपग्रह समूह बनाने का प्रयास है. इसके लिए कई प्रक्षेपणों की आवश्यकता होती है और यह कई देशों में हो रहा है, जिन्हें कई कंपनियां चला रही हैं. स्थापित हो जाने के बाद इन उपग्रहों को सक्रिय उपग्रहों की आपूर्ति जारी रखने के लिए निरंतर प्रक्षेपण की आवश्यकता होती है.

ओजोन परत के ठीक होने में संभावित देरी

यह पता लगाने के लिए कि भविष्य में प्रक्षेपण ओजोन परत को कैसे प्रभावित कर सकते हैं, हमने सबसे पहले वर्तमान में उपयोग में आने वाले रॉकेटों द्वारा उत्सर्जित ओजोन-क्षयकारी रसायनों का एक डेटाबेस बनाया. फिर हमने इस डेटाबेस को पृथ्वी के वायुमंडल और जलवायु के एक मॉडल में डाला, और रॉकेट प्रक्षेपण की उच्च दरों के कई परिदृश्यों के तहत वायुमंडलीय संरचना का अनुकरण किया.

इसके बाद हमने इस डाटाबेस को पृथ्वी के वायुमंडल और जलवायु के मॉडल में डाला तथा रॉकेट प्रक्षेपण की उच्चतर दरों के कई परिदृश्यों के तहत वायुमंडलीय संरचना का अनुकरण किया. हमने पाया कि हर साल दुनिया भर में लगभग 2,000 प्रक्षेपणों के साथ, ओजोन परत तीन प्रतिशत तक पतली हो जाती है. रॉकेट से निकलने वाले रसायनों के वायुमंडलीय परिवहन के कारण, हमने अंटार्कटिका में ओजोन को सर्वाधिक नुकसान देखा, भले ही ज्यादाांश प्रक्षेपण उत्तरी गोलार्ध में हो रहे हों.

सौभाग्य से, ओजोन का नुकसान कम है. हम मनुष्यों या पारिस्थितिकी तंत्र को होने वाले विनाशकारी नुकसान की उम्मीद नहीं करेंगे. हालांकि, ओजोन परत को ठीक करने के लिए जारी वैश्विक प्रयासों को देखते हुए नुकसान महत्वपूर्ण है. क्लोरोफ्लोरोकार्बन के कारण होने वाले नुकसान की शुरुआत से पहले ओजोन की वैश्विक प्रचुरता अब भी लगभग दो प्रतिशत कम है.

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