क्या ऑस्कर विजेता बेच भी सकता है अपनी ट्रॉफी, जानें कब-कब हुई इसकी नीलामी?
भारतीय फैंस के लिए इस साल खास आकर्षण रहा ग्लोबल स्टार प्रियंका चोपड़ा, जिन्होंने अपने पति निक जोनस के साथ रेड कार्पेट पर हिस्सा लिया और अवॉर्ड सेरेमनी की प्रेजेंटर रहीं.

हर साल ऑस्कर अवॉर्ड्स फिल्म इंडस्ट्री का सबसे बड़ा जश्न होते हैं. यहां दुनिया के सबसे बेहतरीन कलाकार, निर्देशक और फिल्ममेकर अपनी प्रतिभा के लिए सम्मानित होते हैं. 98वें ऑस्कर अवॉर्ड्स में इस बार भी फिल्म प्रेमियों को जबरदस्त रोमांच देखने को मिला. रायन कूगलर की फिल्म सिनर्स और पॉल थॉमस एंडरसन की वन बैटल आफ्टर एनदर के बीच कड़ी टक्कर रही. सिनर्स को 16 नॉमिनेशन मिले, जबकि वन बैटल आफ्टर एनदर को 113 नॉमिनेशन.
लॉस एंजेलिस की डॉल्बी थिएटर में आयोजित इस समारोह में कॉमेडियन कोनान ओ'ब्रायन ने शो होस्ट किया. भारतीय फैंस के लिए इस साल खास आकर्षण रहा ग्लोबल स्टार प्रियंका चोपड़ा, जिन्होंने अपने पति निक जोनस के साथ रेड कार्पेट पर हिस्सा लिया और अवॉर्ड सेरेमनी की प्रेजेंटर रहीं. इसके अलावा इंडियन-अमेरिकन फिल्ममेकर गीता गंभीर भी दो कैटेगरी में नॉमिनेट थी. लेकिन इस बार कई लोगों की दिलचस्पी ऑस्कर की ट्रॉफी और उसके नियमों में थी. कई लोग ऑस्कर विजेता और ट्रॉफी को लेकर अलग-अलग सवाल कर रहे हैं. ऐसे में आइए जानते हैं कि क्या ऑस्कर विजेता अपनी ट्रॉफी बेच भी सकता है और इसकी नीलामी कब-कब हुई.
ऑस्कर ट्रॉफी की खासियत
ऑस्कर की ऑफिशियल ट्रॉफी का नाम अकादमी अवॉर्ड ऑफ मेरिट है. यह 13.5 इंच ऊंची और 3.8 किलो वजनी होती है. ब्रॉन्ज की बनी यह ट्रॉफी गोल्ड प्लेटेड होती है. हर विजेता के लिए यह सिर्फ एक पुरस्कार नहीं बल्कि फिल्म इंडस्ट्री में उनकी सफलता और कड़ी मेहनत का प्रतीक होती है.
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क्या ऑस्कर विजेता अपनी ट्रॉफी बेच भी सकता है?
साल 1951 के बाद से अकादमी ऑफ मोशन पिक्चर आर्ट्स एंड साइंसेज (AMPAS) ने एक सख्त नियम लागू किया है. इसके अनुसार, कोई भी विजेता अपनी ऑस्कर ट्रॉफी को सीधे बेच नहीं सकता है. अगर विजेता या उनके परिवार वाले इसे बेचना चाहें, तो पहले ट्रॉफी को अकादमी को सिर्फ 1 डॉलर में वापस ऑफर करना होगा. यह नियम इसलिए बनाया गया ताकि ऑस्कर की गरिमा बनी रहे और यह किसी व्यावसायिक वस्तु की तरह न बिके. इसका मतलब है कि 1951 के बाद से दिए गए सभी ऑस्कर अवॉर्ड्स आम बाजार में सीधे नहीं बिक सकते हैं.
इसकी नीलामी कब-कब हुई?
इस नियम का प्रभाव 1951 से पहले के ऑस्कर पर नहीं है. पुराने पुरस्कारों को नीलामी में बेचा जा सकता था और कुछ ने इसे बहुत ऊंची कीमत में खरीदा भी था. माइकल जैक्सन ने 1999 में डेविड ओ. सेल्जनिक की फिल्म गॉन विद द विंड (1939) का ऑस्कर लगभग 15 लाख डॉलर में खरीदा. सिटीजन केन (1942) के ऑस्कर को 2011 में 861,542 डॉलर में बेचा गया. अन्य बिक्री में बेट्टे डेविस और क्लार्क गैबल की ट्रॉफीज भी उच्च कीमतों पर नीलामी में गईं. 1951 से पहले के ऑस्कर को खरीदना और बेचना संभव था, लेकिन नियम लागू होने के बाद से यह सिर्फ अकादमी की अनुमति से ही संभव है.
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Source: IOCL
























