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Kuwait: कुवैत में नौकरी करने क्यों जाते हैं भारत के लोग, कुल इतनी है आबादी

कुवैत में आग लगने से 40 भारतीय नागरिकों की मौत हो गई है,इसके बाद भारत समेत पूरी दुनिया में कुवैत की चर्चा हो रही है.क्या आप जानते हैं कि कुवैत में नौकरी करने इतनी बड़ी संख्या में भारतीय क्यों जाते?

कुवैत के दक्षिणी मंगाफ की इमारत में आग लगने से 40 भारतीयों की मौत हो गई और 30 अन्य घायल है. जानकारी के मुताबिक आग लगने के बाद राहत बचाव दल ने  90 भारतीयों को बचाया है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि कुवैत में भारतीय नागरिक इलाज के लिए क्यों जाते हैं और उन्हें वहां पर कितनी सैलरी और सुविधाएं मिलती हैं. 

कुवैत

आज दुनियाभऱ में कुवैत का जिक्र हो रहा है. क्योंकि कुवैत के अहमदी प्रांत के एक इमारत में आग लगने के कारण 40 भारतीयों की मौत हो गई है, वहीं 30 अन्य घायल हैं, जिनका इलाज जारी है. बता दें कि इस घटना के समय उस इमारत में 160 लोग मौजूद थे. जानकारी के मुताबिक लगभग सभी लोग एक ही कंपनी में काम करते थे. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक जहां पर आग लगी है, वहां बड़ी संख्या में भारतीय समेत कई देशों के लोग रहते हैं.

कुवैत में कितने भारतीय

बता दें कि कुवैत में नौकरी के कारण जाने वाले भारतीयों की संख्या सबसे ज्यादा है. कुवैत की जनसंख्या में कुल 21 फीसदी भारतीय रहते हैं. कुवैत में मौजूद भारतीय एम्बेसी के आंकड़ों के मुताबिक यहां काम करने वाली आबादी में 30 फीसदी भारतीय हैं.

कुवैत में क्या काम करते हैं भारतीय 

कुवैत में भारतीय नागरिक कई कारणों से रहते हैं. सबसे बड़ी वजह नौकरी, व्यापार और टूरिज्म है. आज के समय नौकरी के मामले में कुवैत भारतीयों को आकर्षित करता है. इसकी वजहटैक्स-फ्री इनकम, घरों पर मिलने वाली सब्सिडी, कम ब्याज पर मिलने वाला लोन, बेहतरीन सैलरी पैकेज, मेडिकल हेल्प और जॉब के कई मौके हैं. जिस कारण भारतीय कुवैत पहुंचते हैं.
जानकारी के मुताबिक यहां पर सबसे ज्यादा भारतीय ऑयल, गैस, निर्माण क्षेत्र, हेल्थकेयर और फाइनेंस सेक्टर के लिए काम करते हैं. प्रोफेशनल लेवल मिलने वाले फायदे उन्हें यहां नौकरी से बांधे रखता है. इस तरह वहां जाने वाले भारतीयों की संख्या बढ़ रही है. इतना ही नहीं दोनों देशों के बीच अच्छे सम्बंधों का फायदा भारतीयों को भी मिलता है.

कितनी मिलती है सैलरी?

अब सबसे बड़ा सवाल ये है कि आखिर कुवैत में भारतीयों को कितनी सैलरी मिलती है?  जानकारी के मुताबिक लोअर से मिड रेंज तक काम करने वाले प्रोफेशनल की सैलरी 2.70 लाख से लेकर 8 लाख रुपए तक होती है. वहीं हाइली स्किल्ड और अनुभवी प्रोफेशनल्स की सैलरी का आंकड़ा इससे कहीं अधिक रहता है. वहीं कुवैत में अनस्किल्ड लेबर, हेल्पर और क्लीनर को हर महीने करीब 100 कुवैती दिनार यानी करीब 27 हजार रुपए मिलते है. वहीं लोअर स्किल्ड लोगों को 38 हजार से 46 हजार रुपए तक प्रतिमाह मिलते हैं.

कुवैत में भारतीयों के लिए कितने वीजा 

जानकारी के मुताबिक कुवैत भारतीयों को 4 कैटेगरी में वीजा जारी करता है. 

टूरिस्ट वीजा: भारतीय नागरिकों के लिए कुवैत टूरिस्ट वीजा जारी करता है. इसे उन भारतीयों के लिए जारी किया जाता है, जो वहां घूमना चाहते हैं. 

विजिट वीजा: भारतीयों के लिए जारी होने वाला यह वीजा 90 दिनों तक वैलिड रहता है, लेकिन यहां 30 दिन से ज्यादा रहने की अनुमति नहीं होती है. अगर इससे ज्यादा समय बिताते हैं, तो आपको रोजाना 30 डॉलर फाइन के रूप में देना होता है. 

ट्रांजिट वीजा: यह वीजा कुवैत पोर्ट अथॉरिटी या कुवैत वाणिज्य दूतावास के माध्यम से प्राप्त किया जा सकता है. ये सिर्फ 7 दिनों के लिए मान्य होता है. इस वीज़ा को हासिल करने के लिए आवेदकों के पास कुवैत के लिए एक कन्फर्म्ड टिकट होना चाहिए.

वर्क वीजा: यहां पर नौकरी करना चाहते हैं, तो कुवैत वर्क वीजा के लिए आवेदन करना होता है. कुवैत के संविधान के आर्टिकल 17 और 18 के नियमों के लिए यह वीजा जारी किया जाता है. इस वीजा के लिए कई शर्त हैं, जिन्हें पूरा करना होता है. इसके लिए भारतीयों के पास किसी कुवैत की कंपनी का ऑफर लेटर आपके पास होना चाहिए. फिटनेस सर्टिफिकेट भी होना जरूरी है. हालांकि शुरुआती दौर में इसे 90 दिन के लिए जारी किया जाता और बाद में 1 साल के लिए जारी होता है. अपनी सुविधा और जरूरत के मुताबिक भारतीय इनके लिए आवेदन कर सकते हैं.

ये भी पढ़ें: क्या मंत्री बनने के बाद सांसद को ज्यादा सैलरी मिलती है, जिम्मेदारी मिलने से सहूलियत में क्या आता है अंतर?

गिरिजांश गोपालन को मीडिया इंडस्ट्री में चार साल से ज्यादा का अनुभव है. फिलहाल वह डिजिटल में सक्रिय हैं, लेकिन इनके पास प्रिंट मीडिया में भी काम करने का तजुर्बा है. दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद गिरिजांश ने नवभारत टाइम्स अखबार से पत्रकारिता की शुरुआत की. उन्हें घूमना बेहद पसंद है. पहाड़ों पर चढ़ना, कैंपिंग-हाइकिंग करना और नई जगहों को एक्सप्लोर करना उनकी हॉबी में शुमार है। यही कारण है कि वह तीन साल से पहाड़ों में ज्यादा वक्त बिता रहे हैं. अपने अनुभव और दुनियाभर की खूबसूरत जगहों को अपने लेखन-फोटो के जरिए सोशल मीडिया के रास्ते लोगों तक पहुंचाते हैं.
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