Ideas of India: 'होमबाउंड' की टीम के लिए बहुत खास है फिल्म, नीरज घेवान बोले - 'ये फिल्म हमारी रिस्पॉन्सिब्लिटी थी'
Ideas of India 2026: मुंबई में आयोजित हो रही एबीपी नेटवर्क की समिट 'आईडियाज ऑफ इंडिया' में फिल्म 'होमबाउंड' की टीम शामिल हुई.

एबीपी नेटवर्क के समिट 'आईडियाज ऑफ इंडिया 2026' में शाम के सेशन में 'होमबाउंड' फिल्म के निर्देशक नीरज घेवान, एक्टर ईशान खट्टर और विशाल जेठवा शामिल हुए हैं. इन तीनों के सेशन में असली कहानियों के बारे में बात की जा रही है.
ये कहानी क्यों लिखी?
इस समिट के दौरान जब फिल्म 'होमबाउंड' के निर्देशक नीरज घेवान से फिल्म की कहानी के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने बताया, 'मैं खुद भी इसी हाशिए के समाज से आता हूं तो शायद इसलिए मेरा रुझान इस तरफ ज्यादा है. ये मेर मानना भी है कि किसी तरह हमारी दुनिया से खासतौर से सिनेमा से गांव गायब हो रहे हैं. जब मेरे प्रोड्यूसर ने ये कहानी मुझे पढ़ने के लिए दी, तब मैंने कहानी पढ़ी और मैं काफी हताश हो गया था, इसने मुझे अंदर से झकझोर दिया था. लेकिन जब मैंने इसे 2-3 बार पढ़ा तो मुझे लगा कि इसे एक बड़े स्केल पर बनाया जा सकता है. इसके जरिए बताया जा सकता है कि हमारा युवा इस समय किस स्थिति से गुजर रहा है. ये कोशिश थी कि उनके एक्सपीरियंस को जाना जाए, क्योंकि हमें जानना चाहिए कि ये कैसे काम करते हैं'.
तेड़ी कहानियों पर ही क्यों काम करते हैं नीरज?
नीरज की अन्य फिल्मों को देखते हुए जब उनसे पूछा गया कि आप हमेशा ऐसी ही फिल्में क्यों बनाते हैं, तो उन्होंने कहा कि, 'देखिए दृष्टिकोण की बात है, शायद मैं तो सीधा खड़ा हूं मंच पर लेकिन शायद लोग मानते हैं कि मैं तिरछा खड़ा रहता हूं. मैं महिलाओं की, समलैंगिकता, या दलितों की कहानी इसलिए दिखाता हूं, मैं खुद दलित बैकग्राउंड से हूं, इसलिए मैं शायद इसे ज्यादा समझता हूं और इन कहानियों पर काम करता हूं'.
ऐसी फिल्में करने पर क्या भाव आता है?
ईशान खट्टर से जब फिल्म को लेकर बात की गई तो उन्होंने कहा कि, 'ये एक ऐसी फिल्म है जिस पर हम सबको गर्व है. जैसा कि नीरज ने हमें शुरू से ही बताया है कि उन्हें कल्पना के जरिए कहानी कहना पसंद नहीं है. ये एक सच्ची कहानी थी, ये बहुत बड़ी सच्चाई है हमारे जमाने की ना केवल देश और दुनिया की बल्कि जमाने की. हमारी कोशिश ये थी कि पूरी सच्चाई से इस दोस्ती को एक मिसाल बना सकें. क्योंकि इस कहानी में बहुत दुख है, इसे देखने पर बहुत दर्द होता है, कई लोगों को ये एक होपफुल फिल्म लगती है'
आगे उन्होंने बताया, 'हमारी कोशिश यही थी कि आपस में समाज में ये बात फैला पाएं कि हमारे समाज में कितनी खूबसूरती है, तरह तरह की मुश्किलें हैं हमारे देश में जो हमें बताती हैं कि संविधान क्या कहता है. ये फिल्म सिर्फ एक दुख भरी कहानी नहीं बताती बल्कि ये हमें दोस्ती की गहराई भी बताती है'
विशाल जेठवा ने बताया अपना एक्सपीरियंस
'होमबाउंड' में नजर आए एक्टर विशाल जेठवा ने बताया कि, 'मेरी लाइफ भी काफी मायनों में इस तरह से रही है, फिल्म में जो शोएब और चंदन जैसे जीते हैं, मुझे वो जीना नहीं पड़ा है. मेरा एक्सपीरियंस बहुत अलग है. जैसे ही मैं नीरज सर से मिला, उन्होंने बताया कि समाज में और क्या क्या चल रहा है. जब हम एक फिल्म करते हैं वो केवल एक महीने या दो महीने की वर्कशॉप ही नहीं होती. जो हम इतने सालों में एक्सपीरियंस देखते हैं उन्हें एक्टर के तौर पर डालते हैं. रियल लाइफ से मैंने बहुत सारे एक्सपीरियंस उठाए. ईशान की तरफ से भी मैं कह सकता हूं कि इस फिल्म का एक ही हीरो रहा है वो हैं नीरज घेवान'. इसके साथ उन्होंने फिल्म के निर्देशक को धन्यवाद भी कहा.
इस फिल्म को लेकर आगे नीरज घेवान ने ये भी कहा कि 'ये फिल्म हमारी एक मोरल रिस्पॉन्सिब्लिटी थी. ये कहानी इस देश के अनगिनत चंदन और अनगिनत शोएब की कहानी है'.
'धड़क' की कहानी भ लगभ एक जैसी ही थी
अपनी मेनस्ट्रीम डेब्यू फिल्म के बारे में बात करते हुए बताया कि, 'धड़क मेरी पहली हिंदी मेनस्ट्रीम फिल्म थी. इसकी कहानी ने मुझे बहुत प्रेरित किया. मुझे लगता है कि सैराट हमारे दौर की बहुत जरूरी फिल्म है. मेरे ख्याल से इसे आर्टिस्टिक तरीके से देखें तो ये मास्टरक्लास फिल्म है. ये एक यूनिक और अनमोल फिल्म थी. हमारी कोशिश यही थी कि हम इस कहानी को ऑडियंस तक लेकर आएं. लेकिन होमबाउंड का मेरा एक्सपीरियंस काफी अलग था. क्योंकि मैं भी चाहता था कि ऐसे एक्टर और निर्देशक के साथ काम करूं जो मुझे पुश करें. नीरज घेवान ऐसा निर्देशक हैं जिनके साथ मैं पिछले 10 सालों से काम करना चाहता था'.
Source: IOCL



























