'एक साल तक बिस्तर से नहीं उठी...', झूठे आरोपों के बाद डिप्रेशन में चली गई थीं राधे मां, सालों बाद छलका दर्द
राधे मां उर्फ सुखविंदर कौर ने हाल ही में अपने जीवन के सबसे मुश्किल दौर को लेकर खुलकर बात की है. उन्होंने खुलासा किया कि विवादों और आरोपों के बाद वो डिप्रेशन में चली गई थीं.
आए दिन विवादों में रहने वाली आध्यात्मिक गुरु और खुद को देवी का अवतार बताने वाली राधे मां एक बार फिर से सुर्खियों में आ गई हैं. राधे मां उर्फ सुखविंदर कौर ने हाल ही में अपने जीवन के सबसे मुश्किल दौर को लेकर खुलकर बात की है. उन्होंने खुलासा किया कि विवादों और आरोपों के बाद वो डिप्रेशन में चली गई थीं और उन्हें लंबे समय तक डॉक्टरी इलाज और दवाओं का सहारा लेना पड़ा था.
सीने में बहुत चोट लगी थी...
नयनदीप रक्षित को दिए इंटरव्यू में राधे मां ने अपनी जिंदगी के तमाम राज खोले हैं. इंटरव्यू में जब उनसे मुश्किल समय के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा, 'अगर सच पूछो तो मुझे डिप्रेशन हो गया था. डॉक्टर माचिसवाला ने मेरा ट्रीटमेंट किया और दवाइयां दीं, तब जाकर मैं ठीक हुई. सीने में बहुत चोट लगी थी कि जो काम मैंने किया ही नहीं, वो आरोप मुझ पर कैसे लग गया?'
'1 साल तक बेड से नहीं उठी, लेकिन किसी से सवाल नहीं किया'
जब नयनदीप रक्षित ने राधे मां से सवाल किया कि क्या उन्होंने आरोप लगाने वालों से कभी कोई सवाल पूछा, तो राधे मां ने कहा कि उन्होंने कभी किसी से कोई शिकायत नहीं की. उन्होंने बताया, 'दो-तीन साल मैं डिप्रेशन में रही. लगभग एक साल तक तो मैं अपने बेड और आसन से उठी ही नहीं. लेकिन मैंने किसी से कोई सवाल नहीं पूछा. मैंने बस यही सोचा कि जब सीता माता को भी अग्नि परीक्षा देनी पड़ी थी, तो फिर हम इंसानों की क्या बिसात है?'
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'गुस्सा नहीं, मन में दुख होता है'
इंटरव्यू के दौरान उन्होंने साफ किया कि इन सब बातों से उनके मन में किसी के प्रति गुस्सा नहीं है. उन्होंने कहा, 'मुझे गुस्सा इतना नहीं आता, बस मन में गहरा दुख होता है.'
बता दें कि राधे मां का विवादों से गहरा नाता है. उन पर लोगों से पैसे लेने जैसे कई आरोप भी लगे हैं. अब सालों बाद उन्होंने अपनी निजी जिंदगी और इन आरोपों पर खुलकर बात की है. राधे मां ने कहा कि वो संत नहीं हैं और उन्होंने कभी खुद को संत होने का दावा भी नहीं किया.
मैं कोई संत नहीं हूं...
जब राधे मां से पूछा गया कि वो दूसरे गुरुओं से अलग क्यों हैं, तो उन्होंने कहा, 'मैंने कभी खुद को संत या साधु नहीं कहा. मैं सिर्फ राधे हूं और लोगों को सही राह दिखाने की कोशिश करती हूं. जो भी मेरे पास आया, वो कभी खाली हाथ नहीं गया. मेरे भक्तों को मेरा श्रृंगार पसंद है, इसलिए मैं श्रृंगार करती हूं. मैंने कभी ये दावा नहीं किया कि मैं संत हूं.'
शादीशुदा हैं राधे मां
राधे मां ने कहा कि जब उनके बारे में ये खबरें चलीं कि वो लोगों से पैसे लेती हैं, तो उन्हें बहुत दुख हुआ. उन्होंने कहा, 'मैंने कभी किसी से एक रुपये की मांग नहीं की. अगर किसी की मन्नत पूरी होने के बाद वो अपनी इच्छा से चढ़ावा या कोई गिफ्ट देता है, तो उसे मना करना भी सही नहीं होगा.' इसी इंटरव्यू में राधे मां ने आगे बताया कि वो शादीशुदा हैं और उनके बच्चे भी हैं.






















