हादसे में टूटीं हड्डियां, 1 साल तक बिस्तर पर रहे, जानें 'गब्बर' के दर्दनाक किस्से
Amjad Khan Death Anniversary: बॉलीवुड के बेहतरीन खलनायक रहे अमजद खान की आज 34वीं पुण्यतिथि है. आइए इस मौके पर आपको हम उनसे जुड़ी कुछ खास बातों से रुबरु कराते हैं.

Amjad Khan Death Anniversary: बॉलीवुड के 100 साल से ज्यादा के इतिहास में कई खलनायकों ने अपने बेहतरीन अभिनय से दर्शकों के दिलों में दहशत पैदा की थी. बात जब भी हिंदी सिनेमा के बेहतरीन विलेन की होती है तो जेहन में सबसे पहले आने वाले नामों में अमजद खान का नाम भी जरूर होता है, जिनकी आज 34वीं पुण्यतिथि है.
पिता की विरासत को संभाला
अमजद खान का जन्म 12 नवंबर 1940 को मुंबई में हुआ था. उनके पिता जयंत भी बॉलीवुड एक्टर थे. उनका असली नाम जकारिया खान था. उन्होंने 30 और 40 के दशक में कई फिल्मों में काम किया था. पिता की तरह ही अमजद ने भी बॉलीवुड में काम किया और काफी सफल रहे.

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11 साल की उम्र में बॉलीवुड डेब्यू
शुरू से ही फिल्मी घराने से ताल्लुक रखने वाले अमजद खान ने हिंदी सिनेमा में अपनी शुरुआत बतौर बाल कलाकार की थी. सबसे पहले वो फिल्म 'नाजनीन' में नजर आए थे. साल 1951 की इस फिल्म के वक्त उनकी उम्र 11 साल थी.
'शोले' ने बना दिया बॉलीवुड का सबसे खूंखार विलेन
अमजद खान को अपने करियर में सबसे बड़ी और खास पहचान फिल्म 'शोले' से मिली थी. साल 1975 की इस आइकॉनिक फिल्म में जितना प्यार अमिताभ बच्चन, जया बच्चन, संजीव कुमार, धर्मेंद्र और हेमा मालिनी जैसे दिग्गजों को मिला था उससे कहीं ज्यादा प्यार विलेन के रोल के लिए अमजद खान ने हासिल किया था.

अमजद खान ने गब्बर नाम के खूंखार किरदार से ऐसा गदर मचाया कि वो बॉलीवुड इतिहास के सबसे खूंखार विलेन में से एक बन गए. उनके इस फिल्म में बोले गए डायलॉग ‘तेरा क्या होगा कालिया?’,'ये हाथ मुझे दे दे ठाकुर!’ और कितने आदमी थे?’ आज 50 साल के बाद भी बेहद पॉपुलर है.
1976 में हुआ था बड़ा हादसा
साल 1975 में शोले जैसी बड़ी सक्सेस के बाद साल 1976 में अमजद खान एक गंभीर हादसे का शिकार हो गए थे. फिल्म 'द ग्रेट गैम्बलर' की शूटिंग के लिए अमजद अपनी कार से अपने परिवार के साथ गोवा जा रहे थे. रात की बारिश से सड़क गीली थी, सुबह का वक्त था. रास्ते में एक खराब ट्रक की वजह से अमजद खान ने गाड़ी को दूसरी तरफ मोड़ा, लेकिन कार पेड़ से टकरा गई.
सत्यजीत रे ने कहा था- मरना मत

उन दिनों सत्यजीत रे 'शतरंज के खिलाड़ी' नाम की फिल्म बना रहे थे और इसमें वो वाजिद अली शाह के किरदार के लिए अमजद को लेना चाहते थे. वो अस्पताल में अमजद को देखने पहुंचे थे और उन्होंने अपनी दिली ख्वाहिश बताते हुए अमजद से कहा था, 'अगर तुम्हें कुछ हो गया, तो मैं यह फिल्म ही नहीं बनाऊंगा. इसलिए मेरी फिल्म के लिए मरना मत.' ठीक होने के बाद अमजद ने इस फिल्म में काम किया था.
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डॉक्टर्स ने कहा था- 3 साल तक एक्सरसाइज मत करना
इस हादसे में अमजद की कई हड्डियां टूट गयी थीं. उनकी गर्दन में भी चोट आई थी. वो करीब एक साल तक बेड पर रहे थे. उन्होंने ढेर सारी दवाईयां इस दौरान लीं, जिससे उनका कई किलो तक वजन बढ़ गया था.

साल 1987 में वेंकूवर के इंद्रधनुष कार्यक्रम में अपने एक्सीडेंट को लेकर अमजद खान ने कहा था, 'मैं रोज 4-5 घंटे कसरत करता था. बैडमिंटन वगैरह खेलता था, फ्री-हैंड एक्सरसाइज करता था, वेट भी उठाता था. उसके बाद मेरा एक्सीडेंट हो गया. तो मैं तीन महीने तक बिस्तर पर पड़ा रहा. डॉक्टर्स ने मुझे मना कर दिया था कि तीन महीने तक कोई एक्सरसाइज मत करना.'
चाय के थे शौकीन, सेट पर बंधवा दी थी भैंस
अमजद खान को चाय पीने का बहुत शौक था. उनकी चाय के प्रति दीवानगी का किस्सा भी काफी मशहूर है. बताया जाता है कि शोले की शूटिंग के दौरान वो 80 कप तक चाय पी जाते थे. वहीं थिएटर के दिनों में एक दिन दूध की कमी के चलते उन्होंने सेट पर भैंस लाकर बंधवा दी थी, ताकि उन्हें समय-समय पर चाय मिलती रहे. बता दें कि अमजद खान अब इस दुनिया में नहीं है. उनका 51 साल की उम्र में साल 1992 में 27 जुलाई को हार्ट अटैक से निधन हो गया था.
























