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BJP के चक्रव्यूह से अपने गढ़ को बचाने की Akhilesh Yadav के पास बड़ी चुनौती, 'यादव लैंड' है दांव पर

UP Assembly Election 2022: मुलायम सिंह यादव ने आज करहल में अपने बेटे अखिलेश यादव के लिए वोट मांगे. ये करहल जिस मैनपुरी में आता है, वहां से मुलायम सिंह लोकसभा के सांसद हैं.

Uttar Pradesh Assembly Election 2022: उत्तर प्रदेश में दो चरणों का चुनाव हो चुका है और तीसरे चरण के चुनाव के लिए सभी दल पूरी ताकत लगा रहे हैं. तीसरे चरण के लिए सपा धुआंधार प्रचार कर रही है. इलाकों में चुनावी रैलियां तेज़ हो चली हैं. ऐसे में सपा के पास 'यादव लैंड' को बचाने की बड़ी चुनौती है. 'यादव लैंड' की राजनीति को समझने के लिए हमें तीस साल पीछे चलना पड़ेगा. बीएसपी के संस्थापक कांशीराम कई चुनाव यहां से लड़े थे, और हारे. 1991 में वे इटावा से चुनाव लड़ने आ गए. मुलायम के समर्थन से कांशीराम पहली बार सांसद बने. बदले में कांशीराम के समर्थन से दो साल बाद मुलायम यूपी के मुख्यमंत्री बने, लेकिन आज उनके बेटे अखिलेश के सामने चुनौती न सिर्फ सत्ता में वापसी की है, बल्कि अपना चुनाव बचाने की भी है.

इसलिए मुलायम सिंह यादव ने आज करहल में अपने बेटे अखिलेश यादव के लिए वोट मांगे. ये करहल जिस मैनपुरी में आता है, वहां से मुलायम सिंह लोकसभा के सांसद हैं. दोनों का एक साथ मंच पर होना कोई सामान्य घटना नहीं है. करीब तीस साल पहले इसी मैनपुरी में दोनों तब साथ नजर आए थे, जब मुलायम के लिए मायावती वोट मांगने आई थीं. चरखा दांव से विरोधियों को चित करने वाले मुलायम के आशीर्वाद से इस बार अखिलेश यूपी में सरकार बनाने का दम भर रहे हैं.


BJP के चक्रव्यूह से अपने गढ़ को बचाने की Akhilesh Yadav के पास बड़ी चुनौती, 'यादव लैंड' है दांव पर

वहीं बीजेपी इस बार अखिलेश यादव को उनके ही गढ़ में निपटाने की रणनीति पर काम कर रही है. मतलब न बचेगा बांस न बचेगी लाठी. बीजेपी को लगता है कि क्या पता करहल अखिलेश के लिए नंदीग्राम बन जाए. आज करहल में एक तरफ अखिलेश ने अपने लिए वोट मांगे तो दूसरी तरफ बीजेपी के चाणक्य कहे जाने वाले अमित शाह ने बीजेपी के लिए प्रचार किया. अखिलेश के खिलाफ बीजेपी ने दलित समाज के मोदी सरकार के मंत्री एसपी सिंह बघेल को उम्मीदवार बनाया है.

बात सिर्फ करहल की नहीं है. बीजेपी और समाजवादी पार्टी के बीच ये एक तरह का माइंडगेम है. पिछले चुनाव में समाजवादी पार्टी यादव लैंड में ही चारों खाने चित हो गई थी. चुनावी चर्चा में जिसे 'यादव लैंड' कहा जाता है, उसमें सात जिले आते हैं. अब जरा एक नजर पिछले चुनाव के नतीजों पर डालते हैं. 2017 के चुनाव में यादव लैंड की 25 विधानसभा सीटों में से 19 पर बीजेपी का कब्जा रहा, जबकि 6 सीटें समाजवादी पार्टी को मिलीं.

जिले बीजेपी समाजवादी पार्टी कुल सीटें
फिरोजाबाद  4 1 5
मैनपुरी 1 3 4
एटा  4 0 4
कासगंज  3 0 3
कन्नौज 2 1 3
इटावा  2 1 3
औरेया 3 0

इस बार अपना किला बचाने के लिए अखिलेश यादव ने पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ने का फैसला किया तो इसके लिए अपने पिता मुलायम सिंह याद की कर्मभूमि करहल को चुना. चुनाव में जाने से पहले परिवार एक है का संदेश देने के लिए चाचा शिवपाल यादव को साथ लिया. शिवपाल इटावा के जसवंतनगर से विधानसभा का चुनाव लड़ रहे हैं. 

बीजेपी के परिवारवाद से बचने के लिए अखिलेश ने घर के किसी और सदस्य को चुनाव नहीं लड़ाया. यही नहीं परिवार को उन्होंने प्रचार से दूर रखा. इस बार तो पत्नी डिंपल यादव भी अब तक सीन से गायब हैं. इसलिए अमित शाह जब करहल पहुंचे तो उन्होंने अपनी लाइन और लेंथ थोड़ी बदल दी. अमित शाह ने कहा कि SP का मतलब है संपत्ति बटोर लो और परिवार की चिंता करो.


BJP के चक्रव्यूह से अपने गढ़ को बचाने की Akhilesh Yadav के पास बड़ी चुनौती, 'यादव लैंड' है दांव पर

समाजवादी पार्टी पर ये आरोप लगता रहा है कि उनकी सरकार में गुंडागर्दी बढ़ जाती है. इसलिए पिछले कुछ दिनों से अखिलेश यादव लगातार कह रहे हैं कानून तोड़ने वालों का वोट हमें नहीं चाहिए. पर सवाल ये है कि क्या वे बीजेपी के चक्रव्यूह से अपने और अपने गढ़ को बचा पायेंगे?

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