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Telangana Election Result: वो 6 गारंटी और छह कारण जिनसे तेलंगाना में कांग्रेस ने पलट दिया गेम KCR का गेम

Telangana Election 2023: तेलंगाना का चुनावी समर कांग्रेस ने जीता है और इसने आसानी से बहुमत का जादुई आंकड़ा हासिल कर लिया है. सुबह जैसे ही चुनावी रुझान आने शुरू हुए तभी से कांग्रेस विजेता बनती दिखी थी.

Telangana Election 2023: 10 सालों से जबसे तेलंगाना में चुनाव के जरिए सरकार चुनी गई है, मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) की ओर से देश के सबसे युवा राज्य पर शासन करते आ रहे थे. हालांकि आज आए इलेक्शन रिजल्ट में कांग्रेस ने बीआरएस को पछाड़कर सत्ता में आने का अपना सपना पूरा कर लिया है. इलेक्शन कमीशन की वेबसाइट पर कांग्रेस का वोट परसेंटेज 40 फीसदी का दिख रहा है जो कि साल 2018 यानी पिछले विधानसभा चुनाव में 28 फीसदी पर था. अभी तक के चुनावी रुझानों के मुताबिक सीधा-सीधा 12 फीसदी का वोट शेयर गेन दिख रहा है जो कांग्रेस पार्टी के लिए बड़ी उपलब्धि है.

शाम 4 बजे तक तेलंगाना चुनावी नतीजों का हाल

शाम 4 बजे तक तेलंगाना में सभी 119 सीटों के नतीजे/रुझान आ चुके हैं और इसमें कांग्रेस को 63 सीटें, बीआरएस को 40, बीजेपी को 9 और एआईएमआईएम को 6 सीटें मिलती दिख रही है. सीपीआई भी 1 सीट जीतती दिखी है. तेलंगाना में बहुमत का जादुई आंकड़ा 60 सीटों का है जो कांग्रेस आराम से हासिल करती दिखी है. तेलंगाना की बीआरएस सरकार के सीएम के चंद्रशेखर राव को सत्ता से बाहर करने के कई कारण रहे. कांग्रेस के लिए वो फायदेमंद कारण जिनसे पार्टी ने तेलंगाना का किला आसानी से फतह कर लिया, इनके बारे में यहां जान सकते हैं.

कांग्रेस की 6 गारंटी बनी पार्टी के लिए गेम चेंजर 

कांग्रेस ने चुनावी कैंपेन दौरान अपने घोषणापत्र या मेनिफेस्टो में ये छह गारंटी देने का वादा किया जो मुख्य तौर पर इसकी जीत की वजह मानी जा रही हैं. ये हैं-

  1. महालक्ष्मी: इसमें महिला-केंद्रित वेलफेयर प्रोग्राम के अंतर्गत महिलाओं के लिए 2500 रुपये हर महीने, 500 रुपये में गैस सिलेंडर और पब्लिक ट्रांसपोर्ट में मुफ्त सफर दिया जाएगा.
  2. रयथु भरोसा: किसानों और कृषि श्रमिकों के उद्देश्य से शुरू की जाएगी. कांग्रेस ने 10 लाख रुपये का हेल्थ इंश्योरेंस देने का भी वादा किया है.
  3. इंदिराम्मा: गरीब लोगों के लिए सस्ते घरों का वादा देने वाली स्कीम है. इंदिराम्मा इंदिलु स्कीम के जरिए जिन परिवारों के पास घर नहीं हैं उन्हें घर के लिए जगह और घर बनवाने के लिए 5 लाख रुपये दिए जाएंगे.
  4. गृहज्योति: इस स्कीम में बिजली बिल सब्सिडी की गारंटी दी गई. गृह ज्योति स्कीम के तहत पात्र घरों को 200 यूनिट बिजली फ्री दी जाएगी.
  5. युवा विकासमः आर्थिक रूप से पिछड़े घरों के बच्चों को उनकी पढ़ाई के लिए पैसा दिलाने की गारंटी है. युवा विकासम स्कीम में यंग स्टूडेंट्स को 5 लाख रुपये दिए जाएंगे.
  6. चेयुथा: एक हेल्थ इंश्योरेंस और पेंशन प्रोग्राम में मदद  देने वाली 'चेयुथा' स्कीम में सीनियर सिटीजन्स, विधवाओं, दिव्यांगों, बीड़ी मजदूर, सिंगल वुमेन, बुनकरों, एड्स एंड फाइलेरिया पेशेंट्स के साथ-साथ डायलिसिस से गुजरने वाले किडनी पेशेंट्स को हर महीने 4000 रुपये की पेंशन दी जाएगी. 

वो छह कारण जिनसे कांग्रेस ने पलट दिया केसीआर का गेम

तेलंगाना के शहीदों का सम्मान भी कांग्रेस के लिए यहां चुनावी माइलेज लेने में मददगार साबित हुआ. कांग्रेस के चुनावी घोषणापत्र में वादा किया गया था कि सभी तेलंगाना आंदोलन सेनानियों को 250 वर्ग गज रहने की जगह प्रदान किया जाएगा. कांग्रेस की शानदार जीत के पीछे इसकी 6 गारंटी के अलावा ये छह कारण भी सबसे बड़े फैक्टर रहे जिनसे पार्टी राज्य में 10 सालों से सत्ता पर काबिज केसीआर का पॉलिटिकल गेम पलटने में कामयाब रही.

  • बीआरएस पर भ्रष्टाचार के आरोपों का लिया सहारा

तेलंगाना में कांग्रेस ने बीजेपी को कमजोर प्रतिद्वंदी मानते हुए अपनी स्ट्रेटेजी साफ रखी कि सत्तारूढ़ बीआरएस सरकार को असफल बताने पर सारा ध्यान देना है. पार्टी ने लगभग हर रैली में मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव (केसीआर) को घेरा. कांग्रेस ने लगातार आरोपों की झड़ी लगाई कि पिछले 10 सालों में केसीआर के नेतृत्व वाली सरकार ने भ्रष्टाचार के अलावा कुछ नहीं किया. हर रैली में कांग्रेस ने तेलंगाना के हैदराबाद आउटर रिंग रोड घोटाला, मिशन काकतीय एंड मिशन भागीरथ स्कैम, मिंयापुर लैंड केस और कालेश्वरम लिफ्ट सिंचाई प्रोजेक्ट में हो रही वित्तीय धांधली का हवाला दिया जिसका सीधा कनेक्ट जनता के दिलो-दिमाग पर देखा गया.

  • केसीआर के खिलाफ निगेटिव वोट हुआ कांग्रेस के पक्ष में शिफ्ट

के चंद्रशेखर राव और उनकी सरकार के आसपास सत्ता विरोधी लहर का कांग्रेस ने पूरा फायदा उठाया. अभी तक के नतीजों से साफ है कि पार्टी ने गांवों और सब-अर्बन एरिया इलाकों में भारी वोट हासिल किए जबकि ये कई सालों से बीआरएस के पारंपरिक गढ़ रहे हैं.

  • सोशल मीडिया कैंपेन में कांग्रेस का रहा आक्रामक रुख

सोशल मीडिया अब वो प्लेटफॉर्म हो गया है जो देशों में सरकारों को बनाने और बिगाड़ने की ताकत रखता है. कांग्रेस ने इन चुनावों में इसकी ताकत का बखूबी इस्तेमाल किया और ऑनलाइन लड़ाई पर भी खूब ध्यान दिया. प्रदेश में सत्ता-विरोधी कारक या एंटी इन्कमबेंसी को फोकस करते हुए कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर वीडियो, मीम्स, जिफ और पोस्टर पर बेस्ड एक ऑनलाइन कैंपेन चलाया. इसके लिए पार्टी ने सोशल मीडिया एक्सपर्ट सुनील कनुगोलू की मदद ली और उन्हें तेलंगाना के अपने इलेक्शन कैंपेन स्ट्रेटेजिस्ट की कमान सौंपी. इंडियन एक्सप्रेस में कुछ समय पहले आई खबर में ये दावा किया गया था कि सुनील कनुगोलू को अपनी स्ट्रेटेजी को लागू करने और लोकल सर्विसेज को ऑपरेट करने के लिए तेलंगाना में खुली छूट मिली थी जबकि राजस्थान और मध्य प्रदेश में ऐसा नहीं था. कर्नाटक के सुनील कानुगोलू भारत के सबसे पॉपुलर चुनाव रणनीतिकारों में से एक हैं. इसी साल मई 2023 में कर्नाटक में कांग्रेस पार्टी की जीत का क्रेडिट इन्हें दिया जाता है. तेलंगाना में कांग्रेस के इलेक्शन कैंपेन का प्लान बनाने के पीछे कानुगोलू ही हैं जिन्होंने लगातार दूसरी बार पार्टी को जीत और राज्य में प्रचंड बहुमत दिलाया.

  • BJP-बीआरएस पर मिलीभगत का आरोप लगा जनता से किया कनेक्ट

तेलंगाना में चुनाव प्रचार के आखिरी दिन 28 नवंबर को राहुल गांधी ने हैदराबाद में रैली में कहा कि सबसे भ्रष्ट सरकार चलाने के बावजूद सीएम केसीआर के खिलाफ एक भी केस क्यों नहीं चल रहा है. वजह है कि केसीआर बीजेपी को महाराष्ट्र, राजस्थान, असम, एमपी के साथ छत्तीसगढ़ और गोवा में सपोर्ट दे रहे हैं. ताकि बीजेपी ईडी, सीबीआई, इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को उनके खिलाफ ना लगा पाए. राहुल गांधी ने केसीआर पर ईडी की कार्रवाई ना होने का उदाहरण देते हुए कहा कि साफ है कि ये सब एक टीम हैं जिसमें बीआरएस, बीजेपी और AIMIM शामिल हैं. प्रियंका गांधी ने भी एक चुनावी जनसभा में कहा कि जब भी बीजेपी को मदद चाहिए होती है तब बीआरएस और एआईएमआईएम ही आगे आती हैं. ये एक युद्ध है जिसमें तेलंगाना की जनता के साथ सिर्फ कांग्रेस है तो दूसरी तरफ बीजेपी, बीआरएस और एआईएमआईएम हैं.

  • अल्पसंख्यक या माइनॉरिटी वोट इस बार कांग्रेस को मिले

तेलंगाना में मुस्लिम वोटों ने इस बार कांग्रेस का रुख कर लिया है जो अभी तक के रुझान में भी दिख रहा है. राज्य में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम को नुकसान हुआ है जो कांग्रेस को फायदे के रूप में सामने है. इसके पीछे पार्टी की 'अल्पसंख्यक घोषणा' का हाथ कहा जा सकता है जो माइनॉरिटी वैलफेयर पर फोकस होने का दावा कर रही थी और मुस्लिमों ने इस पर भरोसा दिखाया.

  • तेलंगाना में बीजेपी की कमजोर लीडरशिप भी बनी वजह

5 जुलाई 2023 को केंद्रीय कैबिनेट मिनिस्टर जी किशन रेड्डी को तेलंगाना में भारतीय जनता पार्टी के राज्य अध्यक्ष के रूप में फिर से तैनात किया गया. बीजेपी ने 11 मार्च 2020 से 4 जुलाई 2023 तक तेलंगाना पार्टी अध्यक्ष के रूप में कार्यरत बंदी संजय कुमार की जगह जी किशन रेड्डी की नियुक्ति कर दी. हालांकि ये दांव उल्टा पड़ा और इसने बीजेपी की राज्य इकाई को कमजोर ही किया. इससे तेलंगाना में मुख्य विपक्षी दल के रूप में कांग्रेस को अपनी स्थिति बेहतर करने का भरपूर मौका मिल गया जिसे उन्होंने काफी अच्छी तरह भुनाया. लिहाजा इलेक्शन रिजल्ट में बंपर कामयाबी हासिल कर ली.

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