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Telangana Election Result: कांग्रेस तेलंगाना में कैसे जीती, केसीआर के लिए नाराजगी या जनता को भाया ये इमोशनल फैक्टर? जानें सब

Telangana Election Result 2023: पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव नतीजों में से आज चार प्रदेशों की तस्वीर लगभग साफ हो गई है. सबसे ज्यादा चर्चा तेलंगाना व छत्तीसगढ़ की है जहां चुनावी नतीजों ने चौंकाया है.

Telangana Election Result 2023: पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव नतीजों में मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा. हालांकि तेलंगाना में पार्टी बंपर जीत हासिल करती दिख गई है. राज्य की जनता ने प्रचंड बहुमत से कांग्रेस को दक्षिण के इस सबसे नए राज्य की सत्ता की चाबी सौंप दी है. दोपहर डेढ़ बजे तक ये साफ है कि दक्षिणी राज्य तेलंगाना में कांग्रेस पार्टी को बहुमत मिल रहा है. तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्यालय के बाहर पार्टी कार्यकर्ताओं के जश्न के बीच कांग्रेस के लिए ये बड़ी राहत और खुशी की खबर है.

दोपहर 1.30 बजे तक तेलंगाना की तस्वीर ये है

चुनाव आयोग की वेबसाइट के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक 1.30 बजे तक तेलंगाना की 119 सीटों में इंडियन नेशनल कांग्रेस 65 सीटों पर आगे थी. राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी बीआरएस (भारत राष्ट्र समिति) को 39 सीटों पर जीत मिलती दिख रही है. बीजेपी 9 सीटों पर आगे है. असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व वाली AIMIM को 5 सीटें और सीपीआई (कम्यूनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया) 1 सीट पर आगे है. राज्य के 40 फीसदी (39.74 फीसदी) वोट शेयर पर कांग्रेस का कब्जा हुआ है और बीआरएस 37.90 फीसदी के वोट प्रतिशत के साथ दूसरे स्थान पर पिछड़ गई.

राज्य में सत्ता पर काबिज होगी कांग्रेस- दक्षिणी राज्यों में बढ़ेगी पकड़

5 राज्यों के विधानसभा चुनावों के तहत तेलंगाना में 30 नवंबर को चुनाव हुआ था और उसी दिन आए एग्जिट पोल्स में मिलीजुली तस्वीर आई थी. इसमें से ज्यादातर में प्रदेश की सत्ता पर आसीन बीआरएस को बहुमत मिलने का अनुमान दिखाया गया था. हालांकि आज आए चुनावी नतीजों में तेलंगाना का चुनावी समर कांग्रेस ने जीत लिया है. इस प्रदेश की जीत से दक्षिण के राज्यों में कांग्रेस की पकड़ और मजबूत हो सकती है जहां कर्नाटक में पहले से ही कांग्रेस की सरकार है.

क्या रहे कांग्रेस की जीत के बड़े कारण

चुनावी कैंपन में कांग्रेस ने बड़े आर्थिक मदद के वादे किए जिसका फायदा इसे साफ तौर पर मिला है. अपने मेनिफेस्टो में पार्टी ने कहा कि राज्य के प्रत्येक बेरोजगार युवा को चार हजार रुपये हर महीने दिए जाएंगे. वहीं महिलाओं के लिए भी 2500 रुपये की सौगात का एलान किया. पेंशन के तौर पर बुज़ुर्गों को 4000 रुपये का तोहफा देने और किसानों को वित्तीय सहायता के तौर पर 15 हजार रुपये देने का एलान किया था. साफ है कि देश में चल रही फ्रीबीज की बहस को एक तरफ करते हुए पार्टी ने सामाजिक कल्याण और विकासोन्मुख सरकार बनने का वादा किया और लोगों को ये वादे लुभा गए. तेलंगाना में सत्ता की रेस में चुनाव प्रचार के दौरान मुख्य पार्टियां सत्तारूढ़ बीआरएस, कांग्रेस, बीजेपी और एआईएमआईएम थी और जनता जनार्दन ने कांग्रेस को अपना विकल्प चुनकर स्पष्ट जनादेश दे दिया. कांग्रेस ने इस बात पर जोर दिया कि 10 सालों तक बीआरएस द्वारा भ्रष्टाचार, वंशवाद और तुष्टीकरण की राजनीति की गई जिसका इस राज्य के लोगों को कोई बेनेफिट नहीं मिला. केसीआर के कथित भ्रष्टाचार के साथ कांग्रेस ने गाहे-बगाहे इस बात को भी उठाया कि बीजेपी के साथ केसीआर का जुड़ाव है.

तेलंगाना में कांग्रेस की जीत के कैप्टन बने रेवंत रेड्डी

तेलंगाना में कांग्रेस की जीत का नायक प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के रेवंत रेड्डी को कहा जा रहा है. रेवंत रेड्डी इस बार के चुनावों में कांग्रेस के स्टार लीडर बन गए. रेवंत रेड्डी को 2021 में जब से कांग्रेस ने प्रदेश अध्यक्ष बनाया तभी से वो विधानसभा चुनाव की तैयारियों में लगे थे. इसका असर आज कांग्रेस की शानदार जीत के रूप में सामने आ चुका है. कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी के साथ अक्सर चुनावी रैलियों में वो दिखाई देते रहे. 2017 में कांग्रेस में शामिल होने वाले रेवंत रेड्डी तेलंगाना के सीएम की रेस में आज सबसे आगे आ चुके हैं.

तेलंगाना को राज्य का दर्ज दिलाने की लड़ाई लड़ने वालों को रेवंत रेड्डी ने याद रखा- जनता पर दिखा इमोशनल इफेक्ट

आज चुनावी तस्वीर साफ होने के बाद रेवंत रेड्डी ने कहा कि राज्य के 4 करोड़ लोगों और तेलंगाना के शहीदों को न्याय दिलाने का समय आ गया है. अपने चुनावी कैंपेन में भी कांग्रेस जनता को ये भरोसा दिलाने में कामयाब रही थी कि तेलंगाना को राज्य बनाने के पीछे जिन लोगों ने बलिदान दिया, उन शहीदों को पार्टी याद रखती है और उन्हें भुलाया नहीं है. 

रेवंत रेड्डी अक्सर चुनावी कैंपेन में भी श्रीकांत चारी का नाम लेते रहे और एक एक्स पोस्ट में उन्होंने श्रीकांत चारी को श्रद्धांजलि भी अर्पित की जिनकी पुण्यतिथि आज है. श्रीकांत चारी ने आंध्र प्रदेश से तेलंगाना को अलग करने और इसे नए प्रदेश का दर्जा देने के लिए 3 दिसंबर 2009 को आत्मदाह किया था. वो इस मुद्दे के लिए आत्‍मदाह करने वाले पहले लोगों में से थे. उनके आत्मदाह के बाद से ही बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए जिसके बाद 9 दिसंबर 2009 को केंद्र की तत्कालीन यूपीए सरकार ने तेलंगाना को राज्य का दर्जा देने की प्रक्रिया शुरू करने का ऐलान कर दिया. तेलंगाना के लोगों में श्रीकांत चारी को लेकर काफी जुड़ाव है और इसे कांग्रेस ने महसूस करने और अपने प्रचार में दिखाने में कोताही नहीं बरती.

रेवंत रेड्डी को जानें

साल 2019 के आम चुनावों में जीत हासिल करने वाले तेलंगाना कांग्रेस के 3 लोकसभा सांसदों में रेवंत रेड्डी भी हैं. वो ना सिर्फ तेलंगाना के मलकाजगिरी से सांसद हैं, तेलंगाना के मौजूदा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हैं. ये चर्चा लंबे समय से है कि कांग्रेस की सरकार बनने के बाद इन्हें तेलंगाना का मुख्यमंत्री बनाया जाएगा, हालांकि रेवंत रेड्डी खुद इस पर कोई कमेंट नहीं करते हैं. रेवंत रेड्डी का साल 1969 में आंध्र प्रदेश के महबूबनगर में जन्म हुआ था और अपने शुरुआती राजनीतिक दौर में ये चंद्रबाबू नायडू की तेलुगू देशम पार्टी में थे. साल 2014 में ये टीडीपी की ओर से सदन के नेता भी चुने गए लेकिन 2017 में इन्होंने कांग्रेस का दामन थाम लिया और तब से पार्टी को मजबूती देते आ रहे हैं. 

सीएम केसीआर को हरा सकते हैं रेवंत रेड्डी- इस सीट से आगे

रेवंत रेड्डी ने मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव के सामने कामारेड्डी विधानसभा सीट से इस बार चुनाव लड़ा. दोपहर डेढ़ बजे यानी नौवें राउंड की काउंटिंग तक सीएम केसीआर से रेवंत रेड्डी 1768 वोटों से आगे चल रहे थे. हालांकि केसीआर दो सीटों से चुनाव लड़ रहे हैं और गजवेल सीट पर वो सबसे आगे हैं.

तेलंगाना में हैट्रिक लगाने से चूक गए केसीआर 

साल 2014 में तेलंगाना को राज्य का दर्जा मिला और तब से ही केसीआर यहां के मुख्यमंत्री हैं. तेलंगाना के अलग राज्य बनने के बाद से तीसरे चुनाव इस साल 2023 में हुए और जनता ने इस बार केसीआर को नकार दिया. लोगों ने देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी कांग्रेस पर भरोसा दिखाया. राज्य की विपक्षी पार्टियों का हमेशा से ये कहना था कि तेलंगाना में लोग बदलाव चाहते हैं. अब नतीजों से साफ है कि राज्य में एंटी इंकमबेंसी इफेक्ट भी केसीआर की पार्टी को ले डूबने के कारणों में से है.

2014 में तेलंगाना बना था भारत का नया राज्य 

बहुत सालों की कोशिशों और आंदोलन के बाद 2 जून 2014 को एक अलग राज्य बना. आन्ध्र प्रदेश राज्य से अलग होकर बना तेलंगाना कभी हैदराबाद और मराठवाड़ा का हिस्सा था. इसे आंध्र प्रदेश की 294 में से 119 विधानसभा सीटें और लोकसभा की 42 सीटों में से 17 सीटें मिली थी. तेलंगाना का अर्थ है - 'तेलुगूभाषियों की भूमि'. 

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