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UP Board Results 2020: यूपी बोर्ड के रिजल्ट का क्या है सरकारों से कनेक्शन? अखिलेश के राज में टूटा था ये रिकॉर्ड

UP Board Results 2020: यूपी बोर्ड के परीक्षा का परिणाम सरकारों के इर्द-गिर्द घूमता रहा है. साल 2013 में अखिलेश यादव के राज में बोर्ड के रिजल्ट ने रिकॉर्ड तोड़कर इतिहास में अपना नाम दर्ज कर दिया.

लखनऊ: UP Board Results 2020: उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद के हाईस्कूल और इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षा के परिणाम घोषित हो चुका है. इस साल बोर्ड परीक्षा के परिणाम एकसाथ लखनऊ से जारी किए गए. रिजल्ट उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा दोपहर 12 बजे रिजल्ट घोषित किया. इस बार हाईस्कूल का रिजल्ट 83.31 फीसदी रहा, जबकि 12वीं में 74.63 फीसदी परीक्षार्थी पास हुए.

यूपी बोर्ड के रिजल्ट के परिणाम की बात करें,तो हमेशा से ही मौजूदा राज्य सरकारों के साथ ऊपर-नीचे होता रहा है. सीधा कहा जाए, तो किस पार्टी की सरकार है, इसके इर्द-गिर्द परीक्षा का परिणाम रहता है.

मुलायम के राज में उछला रिजल्ट

साल 1991 में यूपी में समाजवादी पार्टी की सरकार थी और मुख्यमंत्री थे मुलायम सिंह यादव. उस साल भी परीक्षार्थियों की मेहनत रिजल्ट में नजर आई और बोर्ड का रिजल्ट 80.54 फीसदी रहा. साल 2016 में भी सपा की सरकार में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव थे. इस साल हाईस्कूल का रिजल्ट 87.66 फीसदी और इंटरमीडिएट का रिजल्ट 87.99 फीसदी रहा है. कुल मिलाकर औसत 87.82 फीसदी रहा.

कल्याण के राज में रिजल्ट हुआ धड़ाम

1991 में जहां मुलायम सिंह यादव की सरकार में बोर्ड का रिजल्ट 80.54 फीसदी थी, वो अगले साल 1992 में बीजेपी की सरकार में धड़ाम से नीचे गिर पड़ा. उस वक्त सूबे की कमान कल्याण सिंह के हाथ में थी. इस साल बोर्ड का रिजल्ट 30.8 फीसदी पर आकर गिर गया. इसके पीछे की वजह कइयों में परीक्षा पर नकल पर नकेल बताया.

फिर सपा सरकार में रिजल्ट में रिकॉर्ड ग्रोथ दिखी

इसके बाद फिर 1993 में सूबे की सत्ता पर मुलायम सिंह काबिज हुए. इस साल रिजल्ट में थोड़ा सुधार देखा गया. रिजल्ट 30.8 फीसदी से बढ़कर 38.68 हो गया. 1994 में रिजल्ट में और थोड़ा सुधार हुआ और बढ़कर 54.02 हो गया. इसके बाद 1995 में तो रिजल्ट में रिकॉर्ड ग्रोथ देखने को मिली और इस बार ये आंकड़ा बढ़कर 72.77 फीसदी तक जा पहुंचा.

सरकारें बदलीं और ऐसे बदलते रहे रिजल्ट प्रतिशत

1996 में जब प्रेसीडेंट रूल था. उस दौरान भी रिजल्ट पर कुछ फर्क नहीं दिखा. इस साल 72.43 फिसदी रिजल्ट रहा. इसके बाद 1997 में सूबे की कमान मायावती के हाथ में आई. इस साल रिजल्ट घटकर 68.18 फीसदी हो गया. इसके बाद एक बार फिर जब 1998 में कल्याण सिंह सूबे के मुख्यमंत्री बने, तो फिर रिजल्ट का ग्राफ गिरकर 55.29 फीसदी रह गया. कहते हैं कल्याण सिंह की सरकार में सख्ती के साथ परीक्षा होती थीं. नकलचियों की दाल गलना मुश्किल था. इस कारण कई परीक्षार्थी, तो परीक्षा में बैठने से भी डरते थे. साल 1999 में भी कल्याण सिंह की सरकार थी और इस बार भी रिजल्ट सिर्फ 61.34 फीसदी तक ही पहुंचा. इसके बाद अगले साल 2000 में बीजेपी ने राम प्रकाश गुप्ता को मुख्यमंत्री बनाया. इस साल रिजल्ट में थोड़ा सुधार आया और 69.28 फीसदी बच्चे पास हुए. राजनाथ सिंह के राज में साल 2001 में रिजल्ट 69.89 फीसदी और 2002 में 70.21 फीसदी पहुंचा.

साल 2004 में मुलायम के राज में फिर हुई वृद्धि

2003 में फिर मुलायाम सिंह यादव की वापसी हुई. उनके राज में साल 2004 में बोर्ड के परिणाम में रिकॉर्ड वृद्धि हुई और इस साल 89.5 फीसदी रिजल्ट रहा. 2007 तक रिजल्ट 89 फीसदी के आसपास रहा. 2008 से 2011 तक सूबे में बीएसपी की सरकार में मायावती मुख्यमंत्री रही. इस दौरान ज्यादातर रिजल्ट 79 से 80 फीसदी के बीच रहा.

अखिलेश राज ने तो रिकॉर्ड ही तोड़ दिया

इसके बाद साल 2012 में मानों परीक्षार्थियों के बीच अखिलेश भैया छा गए. 2012 में सपा की सरकार में अखिलेश यादव सूबे के मुख्यमंत्री थे और उनके साथ में रिजल्ट का सेंसेक्स बढक़र 89.4 फीसदी हो गया. 2013 में तो बोर्ड के रिजल्ट ने रिकॉर्ड तोड़कर इतिहास में अपना नाम दर्ज कर दिया. बोर्ड के इतिहास में पहली बार रिजल्ट 92.68 रहा. जिसके बाद अखिलेश यादव छात्र-छात्राओं के बीच लोकप्रिय हो गए.

यूपी बोर्ड का पिछले कुछ सालों का रिजल्ट

  • 1991- मुलायम सिंह यादव- 80.54
  • 1992- कल्याण सिंह एंड प्रेसीडेंट- 30.38
  • 1993 - मुलायम सिंह- 38.62
  • 1994 - मुलायम सिंह- 54.02
  • 1995- मुलायम सिंह- 72.77
  • 1996- प्रेसीडेंट रूल- 72.43
  • 1997- 68.18- प्रेसीडेंट एंड मायावती
  • 1998 - कल्याण सिंह-55.29
  • 1999 - कल्याण सिंह- 61.34
  • 2000- राम प्रकाश गुप्ता- 68.28
  • 2001 - राज नाथ सिंह- 69.89
  • 2002 - राजनाथ सिंह एंड प्रेसीडेंट- 70.21
  • 2003 - मुलायम सिंह- 70.51
  • 2004 - मुलायम सिंह-89.5
  • 2005 - मुलायम सिंह- 89.38
  • 2006 - मुलायम सिंह- 89
  • 2007 - मुलायम सिंह- 89.34
  • 2009 - मायावती 79.52
  • 2010 - मायावती - 80.54
  • 2011 - मायावती - 80.14
  • 2012 - अखिलेश यादव- 89.4
  • 2013 - अखिलेश यादव - 92.68
  • 2014 - अखिलेश यादव- 89.46
  • 2015 - अखिलेश यादव 86.28
  • 2016-     87.66 फीसदी
  • 2017  -    81.18 फीसदी
  • 2018  -   75.16 फीसदी
  • 2019 -    80 फीसदी

UP Board Result 2020: पिछले साल 10वीं का टॉपर

साल 2019 के टॉपर की बात करें, तो पिछले साल हाईस्कूल में कानपुर ओंकारेश्वर सरस्वती विद्या निकेतन जवाहर नगर के छात्र गौतम रघुवंशी ने टॉप किया था. उनके 600 में से 583 अंक आए थे. यानी 97.17 फीसदी नंबरों के साथ गौतम ने टॉप किया था. गौतम के हिंदी में हिंदी: 97, अंग्रेजी: 98, गणित: 98, विज्ञान: 99 सामाजिक विज्ञान: 92 और कला: 99 अंक आए थे.

UP Board Result 2020: पिछले साल 12वीं का टॉपर

साल 2019 में इंटरमीडिएट का परिणाम 70.06 फीसदी रहा था. बागपत की तनु तोमर ने 97.80 फीसदी अंकों के साथ टॉप किया था.

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