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अब इस सब्जेक्ट में नहीं कर सकेंगे डिस्टेंस से पढ़ाई, UGC ने अपनाया कड़ा रुख, लाखों स्टूडेंट्स पर पड़ेगा असर

यूजीसी ने मनोविज्ञान के डिस्टेंस लर्निंग कोर्स पर रोक लगा दी है, जिससे देशभर के 1.3 लाख से अधिक छात्रों का करियर प्रभावित हुआ है.

देशभर के छात्रों के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है. विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने मनोविज्ञान के डिस्टेंस लर्निंग यानी दूरस्थ शिक्षा कोर्स पर रोक लगा दी है. इस फैसले का असर 1.3 लाख से अधिक छात्रों पर पड़ा है. इनमें वे छात्र शामिल हैं जो अभी मनोविज्ञान के अंडरग्रेजुएट या पोस्टग्रेजुएट कोर्स कर रहे हैं और वे भी जिनके पास पहले से इस विषय में डिग्री है. अब ऐसे छात्रों को अपनी डिग्री की वैधता और आगे की पढ़ाई को लेकर चिंता सताने लगी है.

रोक लगाने का कारण
यूजीसी ने यह कदम इसलिए उठाया क्योंकि मनोविज्ञान अब राष्ट्रीय सहयोगी और हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स कमीशन (NCAHP) के तहत आता है. NCAHP स्वास्थ्य से जुड़े पेशों की निगरानी करने वाली एक सरकारी संस्था है, जिसकी स्थापना 2021 में हुई थी. इसके तहत यूजीसी की डिस्टेंस एजुकेशन शाखा ने उन यूनिवर्सिटीज को मनोविज्ञान के डिस्टेंस कोर्स चलाने की अनुमति वापस ले ली, जो पहले इसे चला रही थीं.

छात्र और शिक्षकों में बढ़ी चिंता
इस फैसले से छात्रों और शिक्षकों में काफी चिंता और असमंजस पैदा हो गया है. कई यूनिवर्सिटीज जो सालों से यह कोर्स चला रही थीं, अब इस अचानक निर्णय से परेशान हैं. छात्रों को भी इस बात की चिंता है कि उनकी डिग्री की मान्यता क्या रहेगी और आगे उनका करियर कैसे प्रभावित होगा.

दिल्ली यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग के पूर्व प्रिंसिपल डॉ. यूएस पांडे का कहना है कि डिस्टेंस कोर्स का सिलेबस रेगुलर कोर्स के समान होता है, इसलिए इसे बंद करना सही नहीं है. वहीं कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि हेल्थकेयर से जुड़े कामों में डिस्टेंस कोर्स पूरी तरह से उपयुक्त नहीं हैं.

डिस्टेंस कोर्स की बढ़ती लोकप्रियता
मनोविज्ञान के डिस्टेंस कोर्स पिछले कुछ सालों में तेजी से लोकप्रिय हुए हैं. 2020-21 में देशभर की 17 यूनिवर्सिटीज ऐसे कोर्स ऑफर करती थीं, जो 2024-25 में बढ़कर 57 हो गईं. तेलंगाना और तमिलनाडु में सबसे ज्यादा स्टेट यूनिवर्सिटीज ये कोर्स ऑफर कर रही हैं.

विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के खिलाफ है. NEP का मकसद शिक्षा को सभी के लिए सुलभ बनाना है, लेकिन डिस्टेंस लर्निंग पर रोक लगाने से छात्रों की सुविधा पर विपरीत असर पड़ा है.

छात्रों की समस्याएं
इस फैसले के बाद वर्तमान में पढ़ रहे छात्र और ग्रैजुएट छात्रों के लिए यह बड़ी चिंता का विषय बन गया है. छात्रों को अब इस बात की चिंता है कि उनकी डिग्री वैध मानी जाएगी या नहीं. वहीं जिन छात्रों ने पहले से इस विषय में डिग्री प्राप्त की है, उनके लिए आगे की पढ़ाई या नौकरी में परेशानी आ सकती है.

यूजीसी और NCAHP की भूमिका
NCAHP की स्थापना का मकसद स्वास्थ्य पेशेवरों की गुणवत्ता और मानकों को सुनिश्चित करना है. मनोविज्ञान को अब इस बोर्ड के अधीन लाकर, यूजीसी ने डिस्टेंस लर्निंग पर रोक लगा दी है. हालांकि इस फैसले से छात्रों को समय देने के बजाय इसे तुरंत लागू कर दिया गया, जिससे छात्रों और शिक्षकों को असमंजस का सामना करना पड़ रहा है.

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रजनी उपाध्याय बीते करीब छह वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखने वाली रजनी ने आगरा विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. बचपन से ही पढ़ने-लिखने में गहरी रुचि थी और यही रुचि उन्हें मीडिया की दुनिया तक ले आई.

अपने छह साल के पत्रकारिता सफर में रजनी ने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया. उन्होंने न्यूज, एंटरटेनमेंट और एजुकेशन जैसे प्रमुख वर्टिकल्स में अपनी पहचान बनाई. हर विषय में गहराई से उतरना और तथ्यों के साथ-साथ भावनाओं को भी समझना, उनकी पत्रकारिता की खासियत रही है. उनके लिए पत्रकारिता सिर्फ खबरें लिखना नहीं, बल्कि समाज की धड़कन को शब्दों में ढालने की एक कला है.

रजनी का मानना है कि एक अच्छी स्टोरी सिर्फ हेडलाइन नहीं बनाती, बल्कि पाठकों के दिलों को छूती है. वर्तमान में वे एबीपी लाइव में कार्यरत हैं, जहां वे एजुकेशन और एग्रीकल्चर जैसे अहम सेक्टर्स को कवर कर रही हैं.

दोनों ही क्षेत्र समाज की बुनियादी जरूरतों से जुड़े हैं और रजनी इन्हें बेहद संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ संभालती हैं. खाली समय में रजनी को संगीत सुनना और किताबें पढ़ना पसंद है. ये न केवल उन्हें मानसिक सुकून देते हैं, बल्कि उनकी रचनात्मकता को भी ऊर्जा प्रदान करते हैं.

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