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IAS माता-पिता के बच्चों को भी आरक्षण क्यों? सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी, जानें UPSC में किसे मिलता है कितना रिजर्वेशन

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान सवाल उठाया कि अगर किसी परिवार ने आरक्षण के जरिए शिक्षा, नौकरी और आर्थिक मजबूती हासिल कर ली है, तो क्या उसके बच्चों को भी आरक्षण का लाभ मिलता रहना चाहिए.

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  • UPSC में SC, ST, OBC और EWS के लिए आरक्षण लागू है.

देश में आरक्षण व्यवस्था को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है. इस बार चर्चा की वजह सुप्रीम कोर्ट में हुई एक सुनवाई है, जहां अदालत ने ऐसा सवाल पूछा जिसने आरक्षण और क्रीमी लेयर को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी. अदालत ने पूछा कि अगर किसी परिवार ने आरक्षण का लाभ लेकर अच्छी शिक्षा, अच्छी नौकरी और मजबूत आर्थिक स्थिति हासिल कर ली है, तो क्या उसके बच्चों को भी उसी तरह आरक्षण का फायदा मिलता रहना चाहिए?

यह टिप्पणी उस समय सामने आई जब सुप्रीम कोर्ट कर्नाटक के एक उम्मीदवार से जुड़े मामले की सुनवाई कर रहा था. उम्मीदवार को क्रीमी लेयर के आधार पर आरक्षण का लाभ नहीं दिया गया था, जिसके खिलाफ उसने अदालत का दरवाजा खटखटाया था.

सुनवाई के दौरान क्या बोला सुप्रीम कोर्ट?

सुनवाई के दौरान जस्टिस बी.वी. नागरत्ना ने कहा कि आरक्षण का मकसद उन लोगों को आगे लाना है जो सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े हैं. लेकिन अगर किसी परिवार ने आरक्षण का लाभ लेकर समाज में अच्छी स्थिति हासिल कर ली है, तो फिर अगली पीढ़ी को भी लगातार उसी लाभ की जरूरत क्यों पड़नी चाहिए?

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर माता-पिता दोनों IAS अधिकारी हैं, अच्छी आय कमा रहे हैं और समाज में उनका सम्मानजनक स्थान है, तो उनके बच्चों को आरक्षण दिए जाने पर सवाल उठता है. अदालत ने कहा कि शिक्षा और आर्थिक मजबूती के साथ सामाजिक स्थिति भी बदलती है और इस पहलू को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.

हाई कोर्ट का क्या था फैसला?

इस मामले में पहले कर्नाटक हाई कोर्ट ने फैसला दिया था कि उम्मीदवार के परिवार की आय तय सीमा से अधिक है और वह क्रीमी लेयर के दायरे में आता है. इसलिए उसे आरक्षण का लाभ नहीं मिल सकता. हाई कोर्ट ने यह भी कहा था कि राज्य सरकार की आरक्षण नीति के अनुसार उम्मीदवार आरक्षण के लिए पात्र नहीं है. इसी फैसले को चुनौती देते हुए मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा.

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UPSC सिविल सेवा परीक्षा में किसे मिलता है कितना आरक्षण?

UPSC सिविल सेवा परीक्षा में विभिन्न वर्गों के लिए आरक्षण की व्यवस्था है, ताकि सभी वर्गों को सरकारी सेवाओं में अवसर मिल सके. रिपोर्ट्स के अनुसार SC वर्ग के उम्मीदवारों के लिए 15 प्रतिशत सीटें आरक्षित हैं. ST वर्ग को 7.5 प्रतिशत आरक्षण दिया जाता है. 

वहीं, नॉन-क्रीमी लेयर OBC उम्मीदवारों को 27 प्रतिशत आरक्षण का लाभ मिलता है. जबकि EWS वर्ग के लिए 10 प्रतिशत सीटें आरक्षित हैं. उधर, दिव्यांग उम्मीदवारों को 4 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण दिया जाता है, जो सभी श्रेणियों में लागू होता है.  आरक्षण पाने वाले कई वर्गों को सिर्फ सीटों में ही नहीं, बल्कि उम्र सीमा और परीक्षा देने के प्रयासों में भी छूट मिलती है.

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रजनी उपाध्याय बीते करीब छह वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखने वाली रजनी ने आगरा विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. बचपन से ही पढ़ने-लिखने में गहरी रुचि थी और यही रुचि उन्हें मीडिया की दुनिया तक ले आई.

अपने छह साल के पत्रकारिता सफर में रजनी ने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया. उन्होंने न्यूज, एंटरटेनमेंट और एजुकेशन जैसे प्रमुख वर्टिकल्स में अपनी पहचान बनाई. हर विषय में गहराई से उतरना और तथ्यों के साथ-साथ भावनाओं को भी समझना, उनकी पत्रकारिता की खासियत रही है. उनके लिए पत्रकारिता सिर्फ खबरें लिखना नहीं, बल्कि समाज की धड़कन को शब्दों में ढालने की एक कला है.

रजनी का मानना है कि एक अच्छी स्टोरी सिर्फ हेडलाइन नहीं बनाती, बल्कि पाठकों के दिलों को छूती है. वर्तमान में वे एबीपी लाइव में कार्यरत हैं, जहां वे एजुकेशन और एग्रीकल्चर जैसे अहम सेक्टर्स को कवर कर रही हैं.

दोनों ही क्षेत्र समाज की बुनियादी जरूरतों से जुड़े हैं और रजनी इन्हें बेहद संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ संभालती हैं. खाली समय में रजनी को संगीत सुनना और किताबें पढ़ना पसंद है. ये न केवल उन्हें मानसिक सुकून देते हैं, बल्कि उनकी रचनात्मकता को भी ऊर्जा प्रदान करते हैं.

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