Engineering Biology UG Course: देश में पहली बार शुरू होगा इंजीनियरिंग बायोलॉजी यूजी कोर्स, बायोटेक में करियर के खुलेंगे नए रास्ते
केंद्र सरकार ने देश में पहली बार इंजीनियरिंग, बायोलॉजी में यूजी स्तर का कोर्स शुरू करने की घोषणा की. सरकार ने 2035 तक भारत को वैश्विक बायो इकोनाॅमी हब बनाने के लिए राष्ट्रीय रोडमैप भी लॉन्च किया है.

Engineering Biology UG Course: भारत में हायर एजुकेशन और बायोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है. केंद्र सरकार ने देश में पहली बार इंजीनियरिंग, बायोलॉजी में ग्रेजुएशन स्तर का कोर्स शुरू करने की घोषणा की है. इसके साथ ही सरकार ने 2035 तक भारत को वैश्विक बायो इकोनामी हब बनाने के लिए राष्ट्रीय रोडमैप भी लॉन्च किया है. केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ जितेंद्र सिंह ने कहा कि नया कोर्स इंजीनियरिंग, जीव विज्ञान, चिकित्सा और नई तकनीक के बीच की दूरी को कम करेगा और भविष्य की जरूरतों के अनुसार तैयार करेगा. मंत्री ने कहा कि जिस तरह कंप्यूटर साइंस में डिजिटल क्रांति को आगे बढ़ाया है, उसी तरह इंजीनियरिंग बायोलॉजी आने वाले समय में भारत की बायोटेक्नोलॉजी ग्रोथ की आधारशिला बनेगी. उन्होंने कहा कि देश को अपने अपना मजबूत और आत्मनिर्भर बायोटेक्नोलॉजी इकोसिस्टम तैयार करना होगा, ताकि विज्ञान, स्वास्थ्य और उद्योग के क्षेत्र में भारत वैश्विक स्तर पर मजबूत स्थिति हासिल कर सके.
क्या है इंजीनियरिंग बायोलॉजी?
इंजीनियरिंग बायोलॉजी एक ऐसा विषय है,जो इंजीनियरिंग, बायोलॉजी, मेडिकल साइंस और आधुनिक तकनीकों को एक साथ जोड़ता है. क्षेत्र में काम करने वाले प्रोफेशनल्स बायोलॉजिकल सिस्टम, मेडिकल टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा साइंस और इंजीनियरिंग के संयोजन से नई तकनीकों और समाधान विकसित करेंगे. सरकार का मानना है कि भविष्य में स्वास्थ्य सेवाओं, जैव प्रौद्योगिकी, बायो-मैन्युफैक्चरिंग और एडवांस मेडिकल रिसर्च में ऐसे विशेषज्ञों की मांग तेजी से बढ़ेगी.
मेडिकल और इंजीनियरिंग के बीच बनेगा नया सेतु
डॉ जितेंद्र सिंह ने कहा कि अब मेडिकल और इंजीनियरिंग अलग-अलग क्षेत्र नहीं रहे गए हैं. आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं में कई तकनीकें ऐसी हैं, जहां डॉक्टरों और इंजीनियरों को मिलकर काम करना होगा. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन और एमआरआई जैसी तकनीकों में भविष्य में इलेक्ट्रॉनिक्स और सॉफ्टवेयर इंजीनियर भी चिकित्सा विशेषज्ञों के साथ मिलकर महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे. उन्होंने बताया कि आईटीआई समेत कई प्रमुख संस्थानों ने मेडिकल संस्थानों के साथ मिलकर इंटरडिसिप्लिनरी प्रोग्राम शुरू करने की प्रस्ताव भी भेजे हैं, जिससे इंजीनियरिंग और मेडिकल एजुकेशन के बीच सहयोग बढ़ेगा.
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भारत के बायो इकोनॉमी को मिलेगा बढ़ावा
कार्यक्रम के दौरान सरकार ने बिल्डिंग इंडिया एस ए लीडिंग बायो इकोनॉमी पावर हाउस बाय 2035 नाम से राष्ट्रीय रोडमैप भी जारी किया. केंद्रीय मंत्री ने कहा कि 2014 में भारत की बायो इकोनॉमी लगभग 10 अरब डॉलर की थी, जो अब बढ़कर 95 अरब डॉलर तक पहुंच चुकी है. सरकार का टारगेट इसे 2030 तक लगभग 300 अरब डॉलर और आगे चलकर 2035 तक वैश्विक स्तर पर अग्रणी बायो इकोनॉमी में बदलना है. उन्होंने कहा कि देश में वर्तमान में 11,000 से ज्यादा बायोटेक स्टार्टअप कम कर रहे हैं, जो क्षेत्र में तेजी से बढ़ते नवाचार और निवेश का संकेत है.
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