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दक्षिण एशिया की यूनिवर्सिटी ने क्यों रोकी अफगानी स्टूडेंट्स की स्कॉलरशिप? समझ लें पूरा मामला

दक्षिण एशियाई विश्वविद्यालय (SAU) ने फंडिंग विवाद और अफगानिस्तान के वित्तीय योगदान न मिलने के कारण अफगान छात्रों की स्कॉलरशिप फिलहाल बंद कर दी है.

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  • दक्षिण एशियाई विश्वविद्यालय ने फंडिंग विवाद से अफगान छात्रवृत्ति निलंबित की है.
  • अफगानिस्तान के वित्तीय योगदान न देने से यह विवाद अनसुलझा है.
  • विश्वविद्यालय ऑनलाइन शिक्षा, वैकल्पिक फंडिंग पर विचार कर रहा है.

दक्षिण एशियाई विश्वविद्यालय ने अफगानिस्तान के छात्रों को मिलने वाली स्कॉलरशिप फिलहाल बंद कर दी है. विश्वविद्यालय का कहना है कि यह फैसला किसी एक देश को निशाना बनाकर नहीं लिया गया, बल्कि SAARC सदस्य देशों के बीच फंडिंग को लेकर उठे विवाद के बाद सभी नियमों को समान रूप से लागू करने के लिए किया गया है.

विश्वविद्यालय के अनुसार अफगानिस्तान पिछले कई वर्षों से विश्वविद्यालय में तय वित्तीय योगदान नहीं दे पाया है. इसी मुद्दे पर भूटान ने आपत्ति जताई और कहा कि जो देश समय पर अपना हिस्सा जमा कर रहे हैं, उनके साथ समान व्यवहार होना चाहिए. इसके बाद विश्वविद्यालय ने अफगान छात्रों की स्कॉलरशिप रोकने का फैसला 

SAU के अध्यक्ष प्रो. के.के. अग्रवाल ने बताया कि तालिबान के सत्ता में आने के बाद इस मामले पर अफगानिस्तान की ओर से कोई आधिकारिक बातचीत नहीं हो पाई है. भारत सरकार ने अब तक तालिबान सरकार को औपचारिक मान्यता नहीं दी है, इसलिए विश्वविद्यालय भी इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक संवाद स्थापित नहीं कर सका. यही वजह है कि फंडिंग से जुड़ा विवाद अब तक सुलझ नहीं पाया है.

दी जाएगी ये सुविधा

हालांकि विश्वविद्यालय ने यह भी साफ किया कि अफगान छात्रों के लिए शिक्षा के दरवाजे पूरी तरह बंद नहीं किए गए हैं. अगर अफगान प्रशासन सहमत होता है, तो खासकर छात्राओं के लिए ऑनलाइन पढ़ाई की सुविधा शुरू की जा सकती है. विश्वविद्यालय का कहना है कि उसे बड़ी संख्या में अफगान छात्रों, विशेषकर महिलाओं के ईमेल मिलते हैं, जो शिक्षा जारी रखना चाहती हैं लेकिन महिलाओं की पढ़ाई पर पाबंदियों और वीजा संबंधी दिक्कतों के कारण ऐसा नहीं कर पा रहीं.

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार प्रो. अग्रवाल का कहना है कि किसी भी देश का विकास तब तक संभव नहीं है, जब तक उसकी आधी आबादी शिक्षा से वंचित रहे. उन्होंने कहा कि SAARC का उद्देश्य क्षेत्रीय सहयोग और शिक्षा को बढ़ावा देना है, इसलिए विश्वविद्यालय ऑनलाइन शिक्षा के विकल्प पर काम करने को तैयार है.

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कब शुरू हो सकती है सुविधा

विश्वविद्यालय ने यह भी कहा कि अगर कोई SAARC सदस्य देश या कोई अन्य संस्था अफगानिस्तान की ओर से वित्तीय योगदान देने को तैयार होती है, तो अफगान छात्रों की स्कॉलरशिप दोबारा शुरू की जा सकती है. साथ ही शिक्षा मंत्रालय से भी अपील की गई है कि SAU में पढ़ने के इच्छुक अफगान छात्रों के लिए ICCR के माध्यम से छात्रवृत्ति उपलब्ध कराने पर विचार किया जाए.

विश्वविद्यालय के वित्तीय रिकॉर्ड बताते हैं कि 2021 से 30 जून 2026 के बीच भारत सबसे बड़ा योगदानकर्ता रहा और उसने करीब 6.59 करोड़ अमेरिकी डॉलर का योगदान दिया. इसके बाद बांग्लादेश, मालदीव, भूटान और नेपाल का स्थान रहा. वहीं पाकिस्तान ने कई वर्षों के अंतराल के बाद 2025 में केवल एक बार भुगतान किया. विश्वविद्यालय के अनुसार, फिलहाल SAU में पाकिस्तान का कोई छात्र नामांकित नहीं है.

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार 2024-25 सत्र में विश्वविद्यालय में अफगानिस्तान के 10 छात्र पढ़ रहे थे, लेकिन 2026 प्रवेश सत्र में आवेदन मिलने के बावजूद कोई भी अफगान छात्र दाखिला नहीं ले सका. नए बैच में भारत, नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका के छात्रों ने प्रवेश लिया है, जबकि अफगानिस्तान, पाकिस्तान, भूटान, मालदीव और SAARC से बाहर के देशों से इस बार कोई छात्र शामिल नहीं हुआ.

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रजनी उपाध्याय बीते करीब छह वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखने वाली रजनी ने आगरा विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. बचपन से ही पढ़ने-लिखने में गहरी रुचि थी और यही रुचि उन्हें मीडिया की दुनिया तक ले आई.

अपने छह साल के पत्रकारिता सफर में रजनी ने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया. उन्होंने न्यूज, एंटरटेनमेंट और एजुकेशन जैसे प्रमुख वर्टिकल्स में अपनी पहचान बनाई. हर विषय में गहराई से उतरना और तथ्यों के साथ-साथ भावनाओं को भी समझना, उनकी पत्रकारिता की खासियत रही है. उनके लिए पत्रकारिता सिर्फ खबरें लिखना नहीं, बल्कि समाज की धड़कन को शब्दों में ढालने की एक कला है.

रजनी का मानना है कि एक अच्छी स्टोरी सिर्फ हेडलाइन नहीं बनाती, बल्कि पाठकों के दिलों को छूती है. वर्तमान में वे एबीपी लाइव में कार्यरत हैं, जहां वे एजुकेशन और एग्रीकल्चर जैसे अहम सेक्टर्स को कवर कर रही हैं.

दोनों ही क्षेत्र समाज की बुनियादी जरूरतों से जुड़े हैं और रजनी इन्हें बेहद संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ संभालती हैं. खाली समय में रजनी को संगीत सुनना और किताबें पढ़ना पसंद है. ये न केवल उन्हें मानसिक सुकून देते हैं, बल्कि उनकी रचनात्मकता को भी ऊर्जा प्रदान करते हैं.

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