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पंजाब में MBBS-BDS एडमिशन नीति लागू, सरकारी कॉलेज के लिए लगेगा 20 लाख का बॉन्ड

Punjab Medical Bond Policy: नई नीति के अनुसार राज्य कोटे से एमबीबीएस और बीडीएस में एडमिशन लेने वाले छात्रों की डिग्री पूरी होने के बाद 2 साल तक सरकारी संस्थानों सेवाओं में सेवा देनी होगी.

Punjab Medical Bond Policy:  एमबीबीएस की पढ़ाई को लेकर देशभर में राज्य सरकारें कई तरह के बदलाव करते रहे हैं. इसी तरह हाल ही में पंजाब सरकार ने सरकारी मेडिकल और डेंटल कॉलेज में एडमिशन लेने वाले एमबीबीएस और बीडीएस छात्रों के लिए नई बॉन्ड पॉलिसी लागू की. इस नई व्यवस्था के तहत शैक्षणिक स्तर 2025-26 से एडमिशन लेने वाले छात्रों को पढ़ाई पूरी करने के बाद सरकारी अस्पतालों में अनिवार्य सेवाएं देनी होगी. ऐसा नहीं करने पर उन्हें 20 लाख रुपये का बॉन्ड भरना पड़ेगा. इस फैसले के साथ ही ट्यूशन फीस में पांच प्रतिशत के बढ़ोतरी भी की गई, जिसके बाद राज्य भर में मेडिकल छात्रों, इंटर्न और रेजीडेंट डॉक्टरों का विरोध तेज हो गया. 

क्या है नई बॉन्ड पॉलिसी? 

नई नीति के अनुसार राज्य कोटे से एमबीबीएस और बीडीएस में एडमिशन लेने वाले छात्रों की डिग्री पूरी होने के बाद 2 साल तक सरकारी संस्थानों सेवाओं में सेवा देनी होगी. वहीं ऑल इंडिया कोटा के छात्रों के लिए यह अवधि 1 साल तय की गई है. अगर कोई छात्र निर्धारित सेवा पूरी नहीं करता, तो उसे 20 लाख रुपये तक का बॉन्ड भरना होगा. सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि जरूरत पड़ने पर सेवा अवधि बढ़ाई भी जा सकती है.

फीस में भी हुई बढ़ोतरी 

बॉन्ड पॉलिसी के साथ मेडिकल शिक्षा विभाग ने अपकमिंग शैक्षणिक स्तर के लिए ट्यूशन फीस में 5 प्रतिशत की बढ़ोतरी की. सरकार का कहना है कि बढ़ोतरी 2020 की अधिसूचना के अनुसार नियमित प्रक्रिया का हिस्सा है. हालांकि छात्र संगठनों का कहना है कि हॉस्टल और मेस शुल्क जोड़ने की बाद सरकारी मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई का कुल खर्च 13 से 14 लाख रुपये तक पहुंच रहा है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों पर ज्यादा बोझ बढ़ेगा.

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सरकार ने क्यों लिया यह फैसला? 

पंजाब सरकार का कहना है कि राज्य के ग्रामीण और पिछड़े इलाकों में डॉक्टरों की भारी कमी को देखते हुए यह नीति लागू की गई है. सरकार के अनुसार स्वीकृत 3847 मेडिकल ऑफिसर पदों में करीब 1962 पद खाली है. स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. बलबीर सिंह का कहना है कि सरकारी संसाधनों से पढ़ाई करने वाले डॉक्टर कुछ ही महीनो में नौकरी छोड़ देते हैं. नई नीति से यह सुनिश्चित होगा कि डॉक्टर कम से कम निर्धारित अवधि तक सरकारी अस्पतालों में सेवाएं दें. 

डॉक्टर और छात्रों का विरोध 

नई बॉन्ड पॉलिसी और फीस बढ़ोतरी के विरोध में राज्य के सरकारी मेडिकल कॉलेज के रेजीडेंट डॉक्टर और एमबीबीएस इंटर्न विरोध कर रहे हैं. फोरम ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स, पंजाब ने सरकार से बॉन्ड पॉलिसी और फीस वृद्धि वापस लेने, इंटर्न और रेजिडेंट डॉक्टरों का स्टाइपेंड बढ़ाने, महंगाई भत्ते के अनुसार स्टाइपेंड तय करने और दूसरे लंबित मांगों को पूरा करने की मांग की है. डॉक्टर्स का कहना है कि पड़ोसी राज्यों की तुलना में पंजाब में स्टाइपेंड पहले से ही काफी कम है और अब फीस बढ़ाकर छात्रों की मुश्किलें और बढ़ा दी गई है.

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कविता गाडरी बीते कुछ साल से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता की दुनिया से जुड़ी हुई है. राजस्थान के जयपुर से ताल्लुक रखने वाली कविता ने अपनी पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय भोपाल से न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी में मास्टर्स और अपेक्स यूनिवर्सिटी जयपुर से बैचलर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में की है. 
पत्रकारिता में अपना सफर उन्होंने राजस्थान पत्रिका से शुरू किया जहां उन्होंने नेशनल एडिशन और सप्लीमेंट्स जैसे करियर की उड़ान और शी न्यूज के लिए बाय लाइन स्टोरी लिखी. इसी दौरान उन्हें हेलो डॉक्टर शो पर काम करने का मौका मिला. जिसने उन्हें न्यूज़ प्रोडक्शन के लिए नए अनुभव दिए. 

इसके बाद उन्होंने एबीपी नेटवर्क नोएडा का रुख किया. यहां बतौर कंटेंट राइटर उन्होंने लाइफस्टाइल, करंट अफेयर्स और ट्रेडिंग विषयों पर स्टोरीज लिखी. साथ ही वह कंटेंट मैनेजमेंट सिस्टम और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी लगातार सक्रिय रही. कविता गाडरी हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में दक्ष हैं. न्यूज़ राइटिंग रिसर्च बेस्ड स्टोरीटेलिंग और मल्टीमीडिया कंटेंट क्रिएशन उनकी खासियत है. वर्तमान में वह एबीपी लाइव से जुड़ी है जहां विभिन्न विषयों पर ऐसी स्‍टोरीज लिखती है जो पाठकों को नई जानकारी देती है और उनके रोजमर्रा के जीवन से सीधे जुड़ती है.

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