'हमने चेतावनी दी थी', दिल्ली से शेख हसीना ने दबाई कौन सी नस? भड़क गया बांग्लादेश
पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की नई दिल्ली से हुई वर्चुअल प्रेस कान्फ्रेंस को लेकर बांग्लादेश ने भारत के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराया है. ढाका ने दावा किया कि उसने पहले ही भारत सरकार को आगाह किया था.

पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की नई दिल्ली से हुई वर्चुअल प्रेस कान्फ्रेंस को लेकर बांग्लादेश ने भारत के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराया है. ढाका ने दावा किया कि उसने इस कार्यक्रम के संभावित असर को लेकर पहले ही भारत सरकार को आगाह किया था, लेकिन इसके बावजूद इसे आयोजित होने दिया गया. बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने इसे दोनों देशों के संबंधों को सामान्य बनाने की कोशिशों के लिए नुकसानदायक बताया और कहा कि इस घटना से वहां की जनता की भावनाएं भी आहत हुई हैं.
प्रेस कॉन्फ्रेंस पर बांग्लादेश ने जताई कड़ी आपत्ति
बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने 5 अगस्त 2026 को जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि वह इस बात से बेहद नाराज है कि फरार और दोषी करार दी जा चुकी शेख हसीना को नई दिल्ली से मीडिया के साथ लाइव बातचीत करने की अनुमति दी गई.
मंत्रालय ने आरोप लगाया कि इस दौरान शेख हसीना और उनके सहयोगियों ने बांग्लादेश और वहां की जनता के खिलाफ तीखी और आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं.
'भारत को पहले ही चेतावनी दी थी'
बांग्लादेश ने कहा कि इस कार्यक्रम के संभावित प्रभावों को लेकर उसने पहले ही भारत सरकार को अपनी चिंता से अवगत करा दिया था. इसके बावजूद कार्यक्रम आयोजित होने दिया गया, जिस पर ढाका ने गहरा खेद जताया. मंत्रालय का कहना है कि इससे दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य बनाने की प्रक्रिया पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है.
'जुलाई क्रांति की दूसरी बरसी पर हुआ अपमान'
बयान में कहा गया कि जिस दिन बांग्लादेश की जनता 'जुलाई क्रांति' की दूसरी वर्षगांठ मना रही थी, उसी दिन भारतीय धरती से शेख हसीना की यह बातचीत बांग्लादेश की संप्रभुता और जुलाई क्रांति के शहीदों का गंभीर अपमान है. विदेश मंत्रालय ने दावा किया कि इसमें उन नागरिकों का भी अपमान हुआ, जिनमें बच्चे भी शामिल हैं, जिन्होंने जुलाई-अगस्त 2024 के आंदोलन के दौरान अपनी जान गंवाई थी.
'बांग्लादेश के लोग हसीना को पहले ही खारिज कर चुके हैं'
विदेश मंत्रालय ने आरोप लगाया कि दोषी करार दी जा चुकी शेख हसीना और उनके सहयोगियों का इतिहास को पलटने का प्रयास पूरी तरह विफल रहेगा. बयान में कहा गया कि बांग्लादेश की जनता ऐसे प्रयासों को पहले भी खारिज कर चुकी है और आगे भी ऐसा ही करेगी.
'हसीना और उनके सहयोगियों की राजनीति में कोई जगह नहीं'
मंत्रालय ने कहा कि जुलाई क्रांति की भावना को कायम रखते हुए बांग्लादेश के लोगों ने यह संकल्प लिया है कि देश कभी भी फासीवाद के दौर में वापस नहीं जाएगा और बांग्लादेश कभी भी पुलिस राज्य नहीं बनेगा. बयान में कहा गया कि दोषी करार दी जा चुकी शेख हसीना और उनके सहयोगियों के लिए बांग्लादेश की राजनीति में कोई स्थान नहीं है.
भारत से प्रत्यर्पण की मांग फिर दोहराई
बांग्लादेश ने कहा कि वह भारत के साथ समानता, पारस्परिक सम्मान, आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने और राष्ट्रीय गरिमा के आधार पर रचनात्मक तथा भविष्य की ओर देखने वाले संबंध चाहता है. हालांकि मंत्रालय ने कहा कि 2013 की भारत-बांग्लादेश प्रत्यर्पण संधि के तहत शेख हसीना के प्रत्यर्पण के लिए की गई उसकी बार-बार की गई मांगों का अब तक कोई जवाब नहीं मिला है.
'भारत का फैसला जनता की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला'
बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने कहा कि ऐसे समय में शेख हसीना को मीडिया के सामने खुलकर बोलने का अवसर देना वहां के लोगों की भावनाओं को गहरी ठेस पहुंचाने वाला कदम है. मंत्रालय ने कहा कि इस तरह की घटनाएं भारत और बांग्लादेश के बीच सौहार्दपूर्ण और संतुलित द्विपक्षीय संबंधों के विकास के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती हैं.
संगठित समूहों ने अपने कब्जे में लिया छात्र आंदोलनः शेख हसीना
इससे पहले पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने कहा कि 2024 का छात्र आंदोलन संगठित समूहों ने अपने कब्जे में लेकर उसे हिंसक राजनीतिक आंदोलन का माध्यम बना दिया. उन्होंने दावा किया कि इस आंदोलन का इस्तेमाल बैलेट बॉक्स के बाहर सत्ता तक पहुंचने का रास्ता बनाने के लिए किया गया.
शेख हसीना ने कहा, "मैं सिर्फ पांच बार प्रधानमंत्री रहने के नाते नहीं, बल्कि राष्ट्रपिता बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान की बेटी के रूप में भी आपसे बात कर रही हूं."
"छात्रों की भावनाओं का इस्तेमाल किया गया"
उन्होंने कहा, "शुरुआत से ही मेरी सरकार ने बातचीत के जरिए छात्र आंदोलन का शांतिपूर्ण समाधान निकालने की कोशिश की. लेकिन संगठित समूहों ने छात्रों की मांगों को हिंसक राजनीतिक आंदोलन का हथियार बना दिया. छात्रों की भावनाओं का इस्तेमाल किया गया."
सत्ता हासिल करने का था आंदोलन का उद्देश्य
शेख हसीना ने कहा कि मुहम्मद यूनुस ने खुद कहा था कि यह एक बेहद सुनियोजित आंदोलन था, जिसका नेतृत्व एक मास्टरमाइंड कर रहा था. उनके अपने शब्द ही सच्चाई सामने लाते हैं. यह केवल स्वतःस्फूर्त छात्र आंदोलन नहीं था. उन्होंने कहा कि इस आंदोलन का कोई दिखाई देने वाला या जिम्मेदार नेतृत्व नहीं था. निर्देश पर्दे के पीछे से दिए जा रहे थे. यह पूरी तरह संगठित, निर्देशित और बैलेट बॉक्स के बाहर सत्ता हासिल करने के उद्देश्य से इस्तेमाल किया गया आंदोलन था. भारत-बांग्लादेश संबंधों पर शेख हसीना ने कहा कि भारत हमेशा से बांग्लादेश का एक महान मित्र रहा है.






















