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कई राज्यों में बदले राज्यपाल और दो नए एलजी नियुक्त, जानिए कितनी होती है उनकी सैलरी और क्या मिलती हैं सुविधाएं

देश में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 9 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में राज्यपाल और उपराज्यपाल के पदों पर बड़े स्तर पर बदलाव किए हैं. आइए जानते हैं इन्हें कितनी सैलरी और सुविधाएं मिलती हैं.

देश में गुरुवार रात को बड़े स्तर पर प्रशासनिक बदलाव देखने को मिले. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने एक साथ कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में राज्यपाल और उपराज्यपाल की नई नियुक्तियों की घोषणा की. इस फैसले के बाद कुल 9 जगहों पर नए चेहरे सामने आए हैं. इनमें दिल्ली और लद्दाख जैसे केंद्र शासित प्रदेश भी शामिल हैं, जहां नए उपराज्यपाल नियुक्त किए गए हैं.

यह बदलाव ऐसे समय पर हुआ है जब कई राज्यों में राजनीतिक हलचल तेज है. खास तौर पर पश्चिम बंगाल में राज्यपाल सी.वी. आनंद बोस ने उसी दिन इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद वहां तुरंत नया राज्यपाल नियुक्त कर दिया गया. राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी अधिसूचना में बताया गया कि दिल्ली, बिहार, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, तेलंगाना, हिमाचल प्रदेश, नागालैंड, लद्दाख और तमिलनाडु में राज्यपाल या उपराज्यपाल के पद पर नए लोगों को जिम्मेदारी दी गई है.

इन राज्यों में हुए नए नियुक्ति बदलाव

दिल्ली में पहले वी.के. सक्सेना उपराज्यपाल थे, लेकिन अब उनकी जगह तरनजीत सिंह संधू को नई जिम्मेदारी दी गई है. बिहार में पहले आरिफ मोहम्मद खान राज्यपाल थे, अब सैयद अता हसनैन को नया राज्यपाल बनाया गया है. पश्चिम बंगाल में सी.वी. आनंद बोस के इस्तीफे के बाद आर.एन. रवि को राज्यपाल की जिम्मेदारी दी गई है. महाराष्ट्र में पहले सी.पी. राधाकृष्णन राज्यपाल थे, अब उनकी जगह जिष्णु देव वर्मा को यह पद दिया गया है. तेलंगाना में पहले जिष्णु देव वर्मा थे, अब उनकी जगह शिव प्रताप शुक्ला को राज्यपाल बनाया गया है.

हिमाचल प्रदेश में पहले शिव प्रताप शुक्ला राज्यपाल थे, अब यह जिम्मेदारी कविंदर गुप्ता को दी गई है. नागालैंड में अजय कुमार की जगह नंद किशोर यादव को राज्यपाल बनाया गया है. लद्दाख में पहले कविंदर गुप्ता उपराज्यपाल थे, अब उनकी जगह विनय कुमार सक्सेना को यह जिम्मेदारी दी गई है. तमिलनाडु में आर.एन. रवि राज्यपाल थे, लेकिन अब राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर को वहां अतिरिक्त प्रभार दिया गया है.

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कितनी होती है राज्यपाल की सैलरी?

रिपोर्ट्स के अनुसार मौजूदा समय में किसी भी राज्य के राज्यपाल को हर महीने करीब 3.5 लाख रुपये सैलरी मिलती है. यह वेतन पूरे देश में एक जैसा होता है. यानी चाहे राज्य छोटा हो या बड़ा, हर राज्यपाल को समान सैलरी दी जाती है. अगर किसी व्यक्ति को एक साथ दो राज्यों का राज्यपाल बना दिया जाता है, तब भी उसे सैलरी केवल एक ही पद की मिलती है. यानी उसकी मासिक सैलरी 3.5 लाख रुपये से अधिक नहीं होती.

सैलरी के अलावा मिलती हैं कई सुविधाएं

राज्यपाल को केवल सैलरी ही नहीं मिलती, बल्कि कई सरकारी सुविधाएं भी दी जाती हैं. ये सुविधाएं उनके पद और जिम्मेदारी को देखते हुए दी जाती हैं. सबसे बड़ी सुविधा है रहने के लिए सरकारी आवास. हर राज्यपाल को राज्य की राजधानी में राजभवन दिया जाता है. यह आमतौर पर एक बड़ा और ऐतिहासिक भवन होता है. यहां राज्यपाल अपने परिवार के साथ रहते हैं.

इसके अलावा उन्हें सुरक्षा के लिए विशेष व्यवस्था दी जाती है. उनके साथ सुरक्षाकर्मी तैनात रहते हैं. साथ ही उनके पास निजी स्टाफ, सहायक कर्मचारी और कई अधिकारी भी काम करते हैं जो उनके सरकारी कामों में मदद करते हैं.

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रजनी उपाध्याय बीते करीब छह वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखने वाली रजनी ने आगरा विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. बचपन से ही पढ़ने-लिखने में गहरी रुचि थी और यही रुचि उन्हें मीडिया की दुनिया तक ले आई.

अपने छह साल के पत्रकारिता सफर में रजनी ने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया. उन्होंने न्यूज, एंटरटेनमेंट और एजुकेशन जैसे प्रमुख वर्टिकल्स में अपनी पहचान बनाई. हर विषय में गहराई से उतरना और तथ्यों के साथ-साथ भावनाओं को भी समझना, उनकी पत्रकारिता की खासियत रही है. उनके लिए पत्रकारिता सिर्फ खबरें लिखना नहीं, बल्कि समाज की धड़कन को शब्दों में ढालने की एक कला है.

रजनी का मानना है कि एक अच्छी स्टोरी सिर्फ हेडलाइन नहीं बनाती, बल्कि पाठकों के दिलों को छूती है. वर्तमान में वे एबीपी लाइव में कार्यरत हैं, जहां वे एजुकेशन और एग्रीकल्चर जैसे अहम सेक्टर्स को कवर कर रही हैं.

दोनों ही क्षेत्र समाज की बुनियादी जरूरतों से जुड़े हैं और रजनी इन्हें बेहद संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ संभालती हैं. खाली समय में रजनी को संगीत सुनना और किताबें पढ़ना पसंद है. ये न केवल उन्हें मानसिक सुकून देते हैं, बल्कि उनकी रचनात्मकता को भी ऊर्जा प्रदान करते हैं.

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