Jammu University: जम्मू यूनिवर्सिटी में सिलेबस में बदलाव पर क्यों छिड़ा है घमासान, जान लीजिए पूरा मामला?
Jammu University: जम्मू यूनिवर्सिटी में भगत सिंह पढ़ाए जाएंगे. जिन्ना पर विवाद के बाद सिलेबस में बदलाव किया जा रहा है. जिन्ना के चैप्टर को लेकर यूनिवर्सिटी को काफी विरोध झेलना पड़ा.

इन दिनों जम्मू यूनिवर्सिटी चर्चा के केंद्र में है. वजह है पॉलिटिकल साइंस विभाग के पोस्ट ग्रेजुएशन सिलेबस में किया गया बदलाव. कुछ समय पहले विभाग ने सिलेबस में पाकिस्तान के राष्ट्रपिता मोहम्मद अली जिन्ना से जुड़ा चैप्टर शामिल किया था. इस फैसले के बाद छात्र संगठनों ने विरोध शुरू कर दिया. बहस बढ़ी, बैठकें हुईं और आखिरकार अब यूनिवर्सिटी ने सिलेबस में बदलाव करने का फैसला ले लिया है. जिन्ना से जुड़े सभी हिस्से हटाए जा रहे हैं और उनकी जगह अब शहीद भगत सिंह के विचार पढ़ाए जाएंगे.
पोस्ट ग्रेजुएशन के सिलेबस में जिन्ना पर आधारित पाठ जोड़े जाने की खबर जैसे ही बाहर आई, छात्र संगठनों ने इसे मुद्दा बना लिया. खास तौर पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने इसका विरोध किया और मांग की कि इस हिस्से को हटाया जाए. उनका कहना था कि भारतीय छात्रों को पढ़ाने के लिए ऐसे विषयों का चयन सोच-समझकर होना चाहिए.
यूनिवर्सिटी की ओर से उस समय यह कहा गया कि यह बदलाव नई शिक्षा नीति के अनुसार किया गया है. उद्देश्य छात्रों को व्यापक और संतुलित नजरिया देना है, ताकि वे इतिहास और राजनीति को अलग-अलग पहलुओं से समझ सकें. लेकिन विरोध थमता नहीं दिखा.
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बोर्ड ऑफ स्टडीज की अहम बैठक
मामले को देखते हुए पॉलिटिकल साइंस विभाग की बोर्ड ऑफ स्टडीज की बैठक बुलाई गई. इस बैठक में यूनिवर्सिटी से जुड़े कई कॉलेजों के प्रतिनिधि शामिल हुए. सिलेबस की विस्तार से समीक्षा की गई. कई मुद्दों पर चर्चा हुई और कुछ मामलों में मतभेद भी सामने आए.
लंबी बहस के बाद इस बात पर सहमति बनी कि जिन्ना से जुड़े सभी टॉपिक्स सिलेबस से हटा दिए जाएं. इसके साथ ही यह तय किया गया कि उनकी जगह अब शहीद भगत सिंह के विचारों को सिलेबस में शामिल किया जाएगा, ताकि छात्रों को आजादी की लड़ाई और देश के भविष्य को समझने का बेहतर मौका मिल सके.
कुछ नाम सिलेबस में रहेंगे
बैठक में यह भी चर्चा हुई कि अन्य ऐतिहासिक व्यक्तित्वों को लेकर क्या रुख अपनाया जाए. इस दौरान अल्लामा इकबाल और सर सैय्यद अहमद खान के नाम पर किसी सदस्य ने आपत्ति नहीं जताई. इसलिए इनके पाठ सिलेबस में पहले की तरह बने रहेंगे. यानी बदलाव केवल जिन्ना से जुड़े हिस्सों तक सीमित रहेगा. यूनिवर्सिटी का कहना है कि सिलेबस का मकसद छात्रों को अलग-अलग विचारों से परिचित कराना है.
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Source: IOCL



























