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विदेश पढ़ाई का सपना क्यों छोड़ रहे भारतीय छात्र? जानिए किस देश की ओर बढ़ रहा युवाओं का रुख

महंगी फीस, बढ़ते रहने के खर्च और मुश्किल वीजा नियमों के कारण 43% भारतीय छात्रों ने विदेश में पढ़ाई का सपना छोड़ दिया है. आइए पूरी डिटेल्स जानते हैं.

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  • ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया पर छात्रों का भरोसा बढ़ा.

कुछ साल पहले तक विदेश में पढ़ाई करना लाखों भारतीय छात्रों का सबसे बड़ा सपना माना जाता था. परिवार बच्चों को विदेश भेजने के लिए बचत करते थे, एजेंटों के दफ्तरों में भीड़ लगती थी और हर साल हजारों छात्र ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, ब्रिटेन और अमेरिका की उड़ान भरते थे. लेकिन अब तस्वीर धीरे-धीरे बदल रही है. महंगी फीस, बढ़ता खर्च और मुश्किल वीजा नियमों ने कई छात्रों के कदम रोक दिए हैं.

हाल ही में आई IDP की रिपोर्ट “Emerging Futures” ने इस बदलती सोच की बड़ी तस्वीर सामने रखी है. रिपोर्ट बताती है कि अब भारतीय छात्र सिर्फ विदेश जाने का सपना नहीं देख रहे, बल्कि बहुत सोच-समझकर फैसला ले रहे हैं.

43% छात्रों ने फीस के कारण छोड़ा सपना

रिपोर्ट के मुताबिक, विदेश में पढ़ाई का प्लान छोड़ने वाले 43 प्रतिशत भारतीय छात्रों ने कहा कि अब फीस उनकी पहुंच से बाहर हो चुकी है. वहीं 32 प्रतिशत छात्रों ने बढ़ते रहने और खाने-पीने के खर्च को बड़ी वजह बताया. इसके अलावा 28 प्रतिशत छात्रों ने माना कि स्टूडेंट वीजा हासिल करना पहले से ज्यादा मुश्किल हो गया है. सिर्फ भारत ही नहीं, दुनिया भर के छात्रों में भी यही चिंता दिखाई दी. करीब 50 प्रतिशत छात्रों ने कहा कि ट्यूशन फीस इतनी बढ़ गई है कि विदेश में पढ़ाई अब आसान नहीं रही.

अब सिर्फ डिग्री नहीं, करियर चाहिए

रिपोर्ट बताती है कि भारतीय छात्रों की सोच पहले से काफी बदल चुकी है. अब वे सिर्फ विदेशी डिग्री के पीछे नहीं भाग रहे, बल्कि यह देख रहे हैं कि पढ़ाई पूरी होने के बाद नौकरी मिलेगी या नहीं.

करीब 41 प्रतिशत भारतीय छात्रों ने कहा कि विदेश पढ़ाई का सबसे बड़ा फायदा अच्छा करियर और नौकरी के मौके हैं. वहीं 31 प्रतिशत छात्रों ने बेहतर पढ़ाई और अच्छी शिक्षा व्यवस्था को जरूरी बताया. 27 प्रतिशत छात्र ऐसे कोर्स चाहते हैं जो सीधे इंडस्ट्री और नौकरी से जुड़े हों.

बिजनेस और इंजीनियरिंग सबसे पसंदीदा

रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि विदेश जाने वाले छात्रों की पहली पसंद अभी भी बिजनेस से जुड़े कोर्स हैं. करीब 24 प्रतिशत छात्रों ने बिजनेस और एडमिनिस्ट्रेशन स्टडीज को चुना. इसके बाद इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजी दूसरे नंबर पर रहे, जिन्हें 20 प्रतिशत छात्रों ने पसंद किया. हेल्थ और मेडिसिन को 18 प्रतिशत छात्रों ने चुना, जबकि कंप्यूटर और मैथ्स से जुड़े कोर्स में भी छात्रों की अच्छी रुचि देखने को मिली.

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बड़े और नामी विश्वविद्यालयों पर भरोसा

आज के छात्र किसी भी कॉलेज में दाखिला लेने के बजाय ब्रांड और रैंकिंग को ज्यादा महत्व दे रहे हैं. करीब 65 प्रतिशत छात्रों ने कहा कि वे दुनिया की रैंकिंग वाले विश्वविद्यालयों में पढ़ना चाहते हैं. कम छात्रों ने पॉलिटेक्निक, कम्युनिटी कॉलेज या छोटे संस्थानों में रुचि दिखाई. इसका मतलब साफ है कि छात्र अब डिग्री के साथ यूनिवर्सिटी की पहचान को भी करियर से जोड़कर देख रहे हैं.

किस देश पर सबसे ज्यादा भरोसा?

विदेश पढ़ाई के लिए ब्रिटेन छात्रों का सबसे भरोसेमंद देश बनकर सामने आया. करीब 85 प्रतिशत छात्रों ने माना कि UK उन्हें बेहतर स्किल और करियर के लिए तैयार कर सकता है. इसके बाद कनाडा और ऑस्ट्रेलिया रहे, जहां छात्रों का भरोसा 84 और 83 प्रतिशत रहा. अमेरिका और न्यूजीलैंड भी छात्रों की पसंद में शामिल रहे. हालांकि कुछ नए देशों पर छात्रों का भरोसा कम दिखा. जर्मनी, चीन और फ्रांस जैसे देशों में छात्रों का विश्वास काफी नीचे रहा. UAE सबसे नीचे रहा, जहां सिर्फ 47 प्रतिशत छात्रों ने भरोसा जताया.

ऑस्ट्रेलिया क्यों बना पहली पसंद?

भारतीय छात्रों में ऑस्ट्रेलिया सबसे ज्यादा पसंद किया जा रहा है. रिपोर्ट के अनुसार 41 प्रतिशत छात्रों ने ऑस्ट्रेलिया को अपनी पहली पसंद बताया. इसकी सबसे बड़ी वजह वहां की नौकरी के मौके, पढ़ाई का माहौल और इंटरनेशनल एजुकेशन सिस्टम है. वहीं UK को अच्छी पढ़ाई और मजबूत शिक्षा व्यवस्था के लिए पसंद किया गया. कनाडा और अमेरिका को भी छात्र नौकरी और नेटवर्किंग के बेहतर अवसरों के कारण चुन रहे हैं. न्यूजीलैंड को पढ़ाई के बाद वर्क परमिट और नौकरी के अच्छे विकल्पों के लिए पसंद किया जा रहा है.

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रजनी उपाध्याय बीते करीब छह वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखने वाली रजनी ने आगरा विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. बचपन से ही पढ़ने-लिखने में गहरी रुचि थी और यही रुचि उन्हें मीडिया की दुनिया तक ले आई.

अपने छह साल के पत्रकारिता सफर में रजनी ने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया. उन्होंने न्यूज, एंटरटेनमेंट और एजुकेशन जैसे प्रमुख वर्टिकल्स में अपनी पहचान बनाई. हर विषय में गहराई से उतरना और तथ्यों के साथ-साथ भावनाओं को भी समझना, उनकी पत्रकारिता की खासियत रही है. उनके लिए पत्रकारिता सिर्फ खबरें लिखना नहीं, बल्कि समाज की धड़कन को शब्दों में ढालने की एक कला है.

रजनी का मानना है कि एक अच्छी स्टोरी सिर्फ हेडलाइन नहीं बनाती, बल्कि पाठकों के दिलों को छूती है. वर्तमान में वे एबीपी लाइव में कार्यरत हैं, जहां वे एजुकेशन और एग्रीकल्चर जैसे अहम सेक्टर्स को कवर कर रही हैं.

दोनों ही क्षेत्र समाज की बुनियादी जरूरतों से जुड़े हैं और रजनी इन्हें बेहद संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ संभालती हैं. खाली समय में रजनी को संगीत सुनना और किताबें पढ़ना पसंद है. ये न केवल उन्हें मानसिक सुकून देते हैं, बल्कि उनकी रचनात्मकता को भी ऊर्जा प्रदान करते हैं.

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