किसी राज्य के राज्यपाल को कितनी मिलती है सैलरी, जानिए कौन सी मिलती हैं सुविधाएं?
भारत में किसी भी राज्य के राज्यपाल को हर महीने 3.5 लाख रुपये वेतन मिलता है और इसके साथ राजभवन, सुरक्षा, स्टाफ और फ्री मेडिकल जैसी कई सुविधाएं भी दी जाती हैं.

भारत में राज्यपाल का पद बेहद गरिमा और जिम्मेदारी वाला माना जाता है. राज्यपाल किसी भी राज्य में राष्ट्रपति के प्रतिनिधि के रूप में कार्य करते हैं. राज्य सरकार की गतिविधियों पर नजर रखना, विधानसभा को संबोधित करना, बिलों को मंजूरी देना और संवैधानिक व्यवस्था बनाए रखना उनका प्रमुख काम होता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इतनी बड़ी जिम्मेदारी निभाने वाले राज्यपाल को कितनी सैलरी मिलती है और उन्हें कौन-कौन सी सुविधाएं दी जाती हैं? आइए जानते हैं.
भारत सरकार ने सभी राज्यों के राज्यपालों के लिए वेतनमान तय कर रखा है. मौजूदा समय में किसी भी राज्य का राज्यपाल हर महीने 3.5 लाख रुपये का वेतन पाता है. यह सैलरी पूरे देश में समान है यानी हर राज्य का राज्यपाल उतनी ही तनख्वाह लेता है. अगर कोई व्यक्ति एक समय में दो राज्यों का राज्यपाल नियुक्त किया जाता है, तब भी उसे वेतन केवल एक राज्यपाल पद का ही मिलता है. यानी सैलरी 3.5 लाख रुपये प्रतिमाह से अधिक नहीं होगी.
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मिलती हैं ये सुविधाएं भी
राज्यपाल को केवल मोटी सैलरी ही नहीं मिलती, बल्कि इसके साथ कई तरह की सरकारी सुविधाएं और भत्ते भी दिए जाते हैं. ये सुविधाएं उनके कार्यकाल को सहज और सम्मानजनक बनाने के लिए दी जाती हैं. हर राज्यपाल को राज्य में रहने के लिए शानदार सरकारी आवास मिलता है, जिसे राजभवन कहा जाता है. यह एक विशाल और ऐतिहासिक इमारत होती है, जहां राज्यपाल और उनका परिवार रहते हैं. राज्यपाल को सुरक्षा के लिए विशेष प्रोटेक्शन दिया जाता है. उनके पास व्यक्तिगत स्टाफ, सुरक्षाकर्मी और अन्य सहायक कर्मचारी तैनात रहते हैं. राज्यपाल और उनके परिवार को पूरी तरह फ्री मेडिकल सुविधा मिलती है. इलाज का खर्च राज्य सरकार उठाती है.
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कितने साल का होता है कार्यकाल
राज्यपाल को सत्कार भत्ता मिलता है, ताकि वे राज्य में आने वाले मेहमानों का स्वागत-सत्कार अच्छे तरीके से कर सकें. इसके अलावा गृह स्थापना व्यय और कार्यालय व्यय भी सरकार देती है. भारत के संविधान के अनुसार राज्यपाल को राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त किया जाता है. एक राज्यपाल का कार्यकाल 5 साल का होता है. हालांकि यह राष्ट्रपति की इच्छा पर निर्भर करता है कि वह उन्हें कार्यकाल पूरा करने दें या पहले ही पद से हटा दें.
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Source: IOCL





















