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Supreme Court Lawyer: सुप्रीम कोर्ट में कैसे बनते हैं लॉयर, इसके लिए कितने एक्सपीरियंस की होती है जरूरत? 

Supreme Court Lawyer: सुप्रीम कोर्ट में वकील बनने का पहला कदम 12वीं पास करने से शुरू होता है. ज्यादातर लॉ कॉलेज में एडमिशन के लिए 45 प्रतिशत या उससे ज्यादा नंबर लाने जरूरी माने जाते हैं.

Supreme Court Lawyer: कानून की पढ़ाई करने वाले हजारों स्टूडेंट्स सुप्रीम कोर्ट में वकालत करने का सपना देखते हैं, लेकिन जिला अदालत या हाईकोर्ट की तुलना में सुप्रीम कोर्ट में वकालत का सफर बहुत लंबा और मुश्किल भरा होता है. इसके लिए सिर्फ कानून की डिग्री ही नहीं, बल्कि कई सालों का एक्सपीरियंस, एग्जाम और सुप्रीम कोर्ट की प्रक्रियाओं की गहरी समझ भी जरूरी होती है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि सुप्रीम कोर्ट में लॉयर कैसे बनते हैं और कितने साल का एक्सपीरियंस जरूरी होता है. 

12वीं के बाद शुरू होती है तैयारी 

सुप्रीम कोर्ट में वकील बनने का पहला कदम 12वीं पास करने से शुरू होता है. ज्यादातर लॉ कॉलेज में एडमिशन के लिए 45 प्रतिशत या उससे ज्यादा नंबर लाने जरूरी माने जाते हैं. इसके बाद पास 5 साल का इंटीग्रेटेड लॉ कोर्स जैसे बीए एलएलबी, बीबीए एलएलबी या बीकॉम एलएलबी में एडमिशन ले सकते हैं, जो स्टूडेंट पहले किसी दूसरे के सब्जेक्ट में ग्रेजुएशन कर चुके है वे 3 साल के एलएलबी कोर्स के जरिए भी कानून की पढ़ाई कर सकते हैं. देश के कई प्रमुख लॉ इंस्टीट्यूट में एडमिशन के लिए क्लेट जैसी परीक्षाओं के माध्यम से एडमिशन मिलता है. कानून की पढ़ाई के दौरान स्टूडेंट्स को सीनियर वकीलों या फिर लॉ फर्म के साथ इंटर्नशिप करने की सलाह दी जाती है. इससे उन्हें कोर्ट की काम करने की प्रणाली, कानूनी ड्राफ्टिंग, रिसर्च और मुकदमे की तैयारी को करीब से समझने का मौका मिलता है. यही एक्सपीरियंस आगे कोर्ट में प्रैक्टिस की मजबूत नींव तैयार करता है. 

बार काउंसिल में रजिस्ट्रेशन के बाद मिलती है वकालत की परमिशन 

एलएलबी की डिग्री पूरी करने के बाद उम्मीदवार को किसी राज्य की बार काउंसलिंग में रजिस्ट्रेशन करना होता है. एडवोकेट्स एक्ट 1961 के तहत यह प्रक्रिया पूरी करने के बाद ही व्यक्ति ऑफिशियल तौर पर वकील बनकर अदालत में प्रैक्टिस कर सकता है. इसके बाद वकील को ऑल इंडिया बार एग्जाम भी पास करना होता है. इस परीक्षा को पास करने के बाद काउंसिल ऑफ इंडिया की ओर से प्रैक्टिस सर्टिफिकेट जारी किया जाता है, जिससे पूरे देश में वकालत करने की अनुमति मिलती है. 

क्या सीधे सुप्रीम कोर्ट में की जा सकती है प्रैक्टिस?

कानूनन वकील बनने के बाद कोई भी अधिवक्ता अदालत में प्रैक्टिस कर सकते हैं, लेकिन सुप्रीम कोर्ट में स्वतंत्र रूप से केस दाखिल करने के लिए ज्यादा योग्यता की जरूरत होती है. कई युवा शुरुआत में किसी वरिष्ठ सुप्रीम कोर्ट वकील के जूनियर के रूप में काम करते हैं. इससे उन्हें सुप्रीम कोर्ट की कार्यशैली, फाइलिंग प्रक्रिया और सुप्रीम कोर्ट की तैयारी को समझने में मदद मिलती है. वहीं एक्सपर्ट्स के अनुसार करियर की शुरुआत जिला अदालत या हाई कोर्ट से करना सबसे बेहतर माना जाता है. इससे वकील को जमीनी स्तर पर मुकदमे को समझने, बहस करने और कोर्ट और कोर्ट प्रक्रिया का एक्सपीरियंस मिलता है. यही एक्सपीरियंस आगे चलकर सुप्रीम कोर्ट में अच्छे वकील की आधारशिला बनता है. 

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सुप्रीम कोर्ट में केस दाखिल करने के लिए क्या चाहिए?

सुप्रीम कोर्ट में स्वतंत्र रूप से केस दाखिल करने का अधिकार सिर्फ एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड का होता है, जो वकील एओआर नहीं होते, वह सुप्रीम कोर्ट में बहस तो कर सकते हैं, लेकिन उन्हें किसी एओआर के माध्यम से ही मामला दाखिल करना पड़ता है. एओआर  बनने के लिए वकील को कम से कम 4 साल की प्रैक्टिस पूरी करनी होती है. इसके बाद एक साल तक किसी मान्यता प्राप्त एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड के अधीन ट्रेनिंग लेना अनिवार्य होता है. वहीं सुप्रीम कोर्ट की ओर से एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड परीक्षा आयोजित की जाती है. इस परीक्षा में सुप्रीम कोर्ट के नियम, कानून में ड्राफ्टिंग, प्रोफेशनल एथिक्स और कोर्ट प्रक्रियाओं से जुड़े सब्जेक्ट शामिल होते हैं. परीक्षा पास करने के बाद वकील को एडवोकेट ओन रिकॉर्ड का दर्जा मिलता है. इसके बाद वह सुप्रीम कोर्ट में स्वतंत्र रूप से याचिकाएं दाखिल कर सकता है और मामलों की पैरवी भी कर सकता है.

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कविता गाडरी बीते कुछ साल से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता की दुनिया से जुड़ी हुई है. राजस्थान के जयपुर से ताल्लुक रखने वाली कविता ने अपनी पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय भोपाल से न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी में मास्टर्स और अपेक्स यूनिवर्सिटी जयपुर से बैचलर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में की है. 
पत्रकारिता में अपना सफर उन्होंने राजस्थान पत्रिका से शुरू किया जहां उन्होंने नेशनल एडिशन और सप्लीमेंट्स जैसे करियर की उड़ान और शी न्यूज के लिए बाय लाइन स्टोरी लिखी. इसी दौरान उन्हें हेलो डॉक्टर शो पर काम करने का मौका मिला. जिसने उन्हें न्यूज़ प्रोडक्शन के लिए नए अनुभव दिए. 

इसके बाद उन्होंने एबीपी नेटवर्क नोएडा का रुख किया. यहां बतौर कंटेंट राइटर उन्होंने लाइफस्टाइल, करंट अफेयर्स और ट्रेडिंग विषयों पर स्टोरीज लिखी. साथ ही वह कंटेंट मैनेजमेंट सिस्टम और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी लगातार सक्रिय रही. कविता गाडरी हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में दक्ष हैं. न्यूज़ राइटिंग रिसर्च बेस्ड स्टोरीटेलिंग और मल्टीमीडिया कंटेंट क्रिएशन उनकी खासियत है. वर्तमान में वह एबीपी लाइव से जुड़ी है जहां विभिन्न विषयों पर ऐसी स्‍टोरीज लिखती है जो पाठकों को नई जानकारी देती है और उनके रोजमर्रा के जीवन से सीधे जुड़ती है.

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