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अमेरिका में हर कैंपस में अब सिर्फ 5% भारतीय, जानें किन देशों में है बेस्ट पढ़ाई के ऑप्शन?

अमेरिकी प्रशासन ने अमेरिका की यूनिवर्सिटीज को एक 10-सूत्रीय मेमो भेजा है. इसके अनुसार, यूनिवर्सिटीज को अब कुछ शर्ते पूरी करनी होगी. वहीं अमेरिका में सिर्फ 15 प्रतिशत वि‍देशी छात्र एडमिशन ले पाएंगे.

अमेरिका ने भारत से बढ़ते व्यापारिक तनाव के बीच विदेशी छात्रों के लिए नई पाबंदियां लागू कर दी हैं. पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर टैरिफ लगाया था, अब ट्रंप प्रशासन ने विदेशी छात्रों को लेकर नया फरमान जारी कर दिया है. दरअसल, अमेरिकी प्रशासन ने हाल ही अमेरिका की यूनिवर्सिटीज को एक 10-सूत्रीय मेमो भेजा है. इसके अनुसार अमेरिका की यूनिवर्सिटीज में अब सिर्फ 15 प्रतिशत ही इंटरनेशनल स्टूडेंट्स एडमिशन ले पाएंगे और किसी एक देश के छात्रों की संख्या 5 प्रतिशत से ज्यादा नहीं होगी.

इसके अलावा ट्रंप प्रशासन ने अमेरिका की यूनिवर्सिटीज को विदेशी छात्रों के रजिस्ट्रेशन को कम करने और कुछ डिपार्टमेंट में सुधार करने के लिए भी कहा है. अमेरिका में भारतीय छात्रों के ऊपर लगाई गई पाबंदियों के बीच चलिए जानते हैं कि अमेरिका के अलावा किन-किन देशों में पढ़ाई के बेहतर ऑप्शन मौजूद हैं. 

पहले जानें भारतीय छात्रों पर फैसले का असर 

अमेरिकी प्रशासन के नए मेमो का असर सबसे ज्‍यादा भारतीय छात्रों पर देखने को मिलेगा. दरअसल, अमेरिका  में काफी संख्या में भारतीय छात्र पढ़ाई करते हैं. ट्रंप के इस फैसले के बाद अमेरिकी यूनिवर्सिटीज में एडमिशन लेना पहले से कहीं ज्यादा मुश्किल हो जाएगा, क्योंकि हर यूनिवर्सिटी में कुल छात्रों में विदेशी छात्रों की संख्या सिर्फ 15 प्रतिशत तक सीमित होगी और किसी एक देश के 5 प्रत‍िशत से ज्यादा स्टूडेंट नहीं हो सकते हैं. इसका मतलब है कि भारतीय छात्रों के लिए कंपटीशन बढ़ जाएगा और बहुत से छात्रों को एडमिशन नहीं मिल पाएगा . इसके अलावा यूनिवर्सिटी को स्टूडेंट के जीपीए, टेस्ट स्कोर, ट्यूशन फीस और ग्रेजुएशन के बाद कमाई का डाटा भी पब्लिक करना होगा. माना जा रहा है क‍ि ट्रंप के इस फैसले के बाद अब भारतीय छात्र अमेरिका के अलावा विदेश में पढ़ाई के नए ऑप्शन तलाशने लगेंगे. 

जर्मनी भारतीय छात्रों की पसंद 

अमेरिकी सरकार के फैसलों के बाद जर्मनी को भी भारतीय छात्रों की पढ़ाई के लिए अच्छा विकल्प माना जा रहा है. दरअसल, जर्मनी की ज्यादातर पब्लिक यूनिवर्सिटी में इंटरनेशनल स्टूडेंट से ट्यूशन फीस नहीं ली जाती है. इसके अलावा यहां इंटरनेशनल स्टूडेंट्स को सेमेस्टर की फीस भी ज्यादा नहीं देनी होती है. साथ ही यहां पार्ट टाइम जॉब करने और पोस्ट स्टडी वर्क वीजा लेने की परमिशन भी होती है. ऐसे में भारतीय छात्रों के लिए जर्मनी को अमेरिका के बाद सबसे अच्छा विकल्प माना जा रहा है. 

कनाडा भी है सुरक्षित विकल्प 

भारतीय छात्रों के लिए कनाडा को भी अच्छा विकल्प माना जा रहा है. अमेरिका की तुलना में कनाडा की यूनिवर्सिटी में ट्यूशन फीस भी कम होती है . वहीं अगर स्टूडेंट चाहे तो यहां कई स्कॉलरशिप के जरिए ट्यूशन फीस को भी कम कर सकते हैं. साथ ही कनाडा में बिजनेस और हेल्थ केयर को लेकर भी कई प्रोग्राम ऑफर किए जाते हैं, जिनका लाभ भी स्टूडेंट उठा सकते हैं. 

ब्रिटेन भी भारतीय छात्रों की ल‍िस्‍ट में

ब्रिटेन को जहां एक तरफ घूमने वाली जगह और मजबूत अर्थव्यवस्था के लिए जाना जाता है. वहीं इसे अब विदेशी छात्रों की पढ़ाई के लिए भी सबसे अच्छे देश में से एक माना जा रहा है. इसकी बड़ी वजह यह है कि ब्रिटेन में दुनिया की टॉप यूनिवर्सिटीज में पढ़ने का मौका मिलता है. जिनमें ऑक्सफोर्ड और कैम्ब्रिज जैसी यूनिवर्सिटी शामिल है. इसके अलावा ग्रेजुएशन के बाद यहां ग्रेजुएट वीजा के जरिए नौकरी का ऑप्शन भी रहता है. 

फ्रांस भी छात्रों की पसंद 

अमेरिका के फैसलों के बाद भारतीय स्टूडेंट्स फ्रांस का भी रुख कर सकते हैं. दरअसल फ्रांस में भी कई यूनिवर्सिटीज में इंटरनेशनल स्टूडेंट्स के लिए फीस काफी कम है. इसके अलावा यहां रहने का खर्च भी अलग-अलग शहरों में अलग-अलग होता है, जिससे यहां के छोटे शहर स्टूडेंट के लिए किफायती हो सकते हैं.

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कविता गाडरी बीते कुछ साल से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता की दुनिया से जुड़ी हुई है. राजस्थान के जयपुर से ताल्लुक रखने वाली कविता ने अपनी पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय भोपाल से न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी में मास्टर्स और अपेक्स यूनिवर्सिटी जयपुर से बैचलर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में की है. 
पत्रकारिता में अपना सफर उन्होंने राजस्थान पत्रिका से शुरू किया जहां उन्होंने नेशनल एडिशन और सप्लीमेंट्स जैसे करियर की उड़ान और शी न्यूज के लिए बाय लाइन स्टोरी लिखी. इसी दौरान उन्हें हेलो डॉक्टर शो पर काम करने का मौका मिला. जिसने उन्हें न्यूज़ प्रोडक्शन के लिए नए अनुभव दिए. 

इसके बाद उन्होंने एबीपी नेटवर्क नोएडा का रुख किया. यहां बतौर कंटेंट राइटर उन्होंने लाइफस्टाइल, करंट अफेयर्स और ट्रेडिंग विषयों पर स्टोरीज लिखी. साथ ही वह कंटेंट मैनेजमेंट सिस्टम और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी लगातार सक्रिय रही. कविता गाडरी हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में दक्ष हैं. न्यूज़ राइटिंग रिसर्च बेस्ड स्टोरीटेलिंग और मल्टीमीडिया कंटेंट क्रिएशन उनकी खासियत है. वर्तमान में वह एबीपी लाइव से जुड़ी है जहां विभिन्न विषयों पर ऐसी स्‍टोरीज लिखती है जो पाठकों को नई जानकारी देती है और उनके रोजमर्रा के जीवन से सीधे जुड़ती है.

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