AI Copy Checking: क्या एआई से चेक होने लगी हैं कॉपियां, किन देशों में बढ़ रहा ये चलन?
AI Copy Checking: CBSE ने कॉपियों की जांच के लिए OSM सिस्टम अपनाया है. कॉपियां शिक्षक ही चेक करते हैं, जबकि कई देशों में एआई ग्रेडिंग का इस्तेमाल बढ़ रहा है.

AI Copy Checking: देश भर में शिक्षा के क्षेत्र में बच्चों को पढ़ाना जितना जरूरी होता है, उतना ही जरूरी उनकी परीक्षा लेना भी होता है. यही शिक्षा जगत का सबसे अहम काम माना जाता है. लेकिन परीक्षा कराना जितना बड़ा काम होता है, उससे भी बड़ी चुनौती होती है परीक्षा में बैठे लाखों छात्रों की कॉपियां चेक करना. इसमें टीचर्स की बहुत मेहनत लगती है और रिजल्ट आने में भी काफी समय लग जाता है.
पिछले कुछ समय से देश भर में एआई से कॉपी चेक होने को लेकर काफी चर्चा हो रही थी, खासकर CBSE बोर्ड की कॉपियों की जांच को लेकर. आइए जानते हैं कि असल में सच्चाई क्या है और दुनिया के किन देशों में एआई से कॉपी चेक करने का चलन बढ़ रहा है?
दुनिया भर में कितनी तेजी से बढ़ रहा है यह चलन?
आंकड़े बताते हैं कि साल 2025 में ही दुनिया भर के करीब 72 प्रतिशत स्कूल कॉपियां चेक करने के लिए एआई का इस्तेमाल कर रहे थे और 2026 तक 60 प्रतिशत से ज्यादा टीचर्स के इसे अपनाने की उम्मीद जताई गई है. यानी अब एआई से कॉपी चेक कराना कोई बड़ी बात नहीं बल्कि यह एक आम तरीका बनता गया है.
बताया जाता है कि एआई से कॉपी चेकिंग होने से पहले टीचर देर रात तक कॉपियों को चेक करते थे, जिससे वे थक जाते थे और इसमें समय भी बहुत ज्यादा लगता है, जिसके कारण कभी-कभार कॉपियों की मार्किंग में गलतियां हो जाती थीं और बच्चे के नंबर कम आ जाते थे. वहीं इस समस्या के समाधान के लिए कॉपी चेकिंग का एआई के इस्तेमाल से होने लगा, इससे नतीजा एकदम सटीक पाया गया, साथ ही मिनटों में कॉपियां चेक होने लगीं. यही वजह है कि यह प्रक्रिया तेजी से बढ़ रही है और कई सारे देशों में इस्तेमाल की जा रही है.
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किन देशों में सबसे ज्यादा हो रहा है इस्तेमाल?
इस जानकारी के बाद सबसे पहले ख्याल आता है कि क्या भारत में भी अब सारी कॉपियां एआई के इस्तेमाल से होने लगी हैं, ऐसे में बता दें कि भारत में CBSE बोर्ड ने 2026 की क्लास 12वीं बोर्ड परीक्षा से कॉपी चेक करने का तरीका बदल दिया है. अब कॉपियां हाथ से नहीं, बल्कि स्कैन करके ऑन-स्क्रीन मार्किंग यानी OSM सिस्टम के जरिए चेक की जा रही हैं.
हालांकि इसे लेकर काफी अफवाहें फैलीं कि अब कॉपियां एआई चेक करेगी, जिस पर CBSE ने खुद साफ किया कि कॉपियां अब भी अनुभवी टीचर्स ही चेक करते हैं, सिर्फ माध्यम कागज की जगह स्क्रीन बन गया है. बोर्ड ने ये बात भी साफ की है कि एआई का इस्तेमाल केवल कॉपियों की क्वालिटी और गलतियां पकड़ने के लिए की जाती है, न कि चेकिंग के लिए.
अगर भारत से बाहर देशों की बात करें तो इजराइल में शिक्षा मंत्रालय हाई स्कूल पास करने वाले छात्रों की नेशनल परीक्षा में एआई ग्रेडर का इस्तेमाल कर रहा है, जिससे इतिहास और साहित्य जैसे विषयों की कॉपियां भी जांची जा रही हैं. इसके अलावा अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा की कई यूनिवर्सिटी भी अब एआई की मदद से छात्रों के असाइनमेंट और एग्जाम के पेपर चेक कर रही हैं.
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